नई दिल्ली, भारत: केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने शुक्रवार को कहा कि महिला आरक्षण बिल को लागू करना एक प्रक्रियात्मक प्रक्रिया है और इसे राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार फिलहाल आवश्यक कानूनी संशोधनों पर काम कर रही है और कानून को लागू करने के लिए अधिसूचना (commencement notification) जारी की गई है।
पत्रकारों से बातचीत में रिजिजू ने कहा, "यह एक प्रक्रिया है। हम अभी कानून में संशोधन ला रहे हैं। पुराना कानून लागू नहीं हुआ था, इसलिए प्रारंभ अधिसूचना जारी की गई। यह एक प्रक्रिया है, इसे मुद्दा मत बनाइए।" उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब लोकसभा में आज संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा और मतदान जारी है, जो संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान करता है।
#WATCH | Delhi | On the Women's Reservation Bill, Union Minister Kiren Rijiju says, "This is a process. We are currently introducing the law for amendment. The older law wasn't implemented, which is why the commencement notification was issued. This is a process. Let's not make… pic.twitter.com/F06ibaPNqB
— ANI (@ANI) April 17, 2026
जनगणना के बाद कानून लागू करने की शर्त हटाई
इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 (दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में लागू करने के लिए) और परिसीमन विधेयक, 2026 (लोकसभा सीटों को बढ़ाकर 850 करने और पुनर्निर्धारण करने के लिए) भी शामिल हैं। इससे पहले गुरुवार को लोकसभा में महिला आरक्षण बिल में संशोधनों पर चर्चा के लिए 12 घंटे का लंबा सत्र चला, जिसमें जनगणना के बाद ही कानून लागू करने की शर्त को हटाने पर चर्चा हुई।
कुल 333 वोटों में से 251 ‘पक्ष’ और 185 ‘विपक्ष’ में
अंतिम मतदान के अनुसार, कुल 333 वोटों में से 251 ‘पक्ष’ (AYES) और 185 ‘विपक्ष’ (NOES) में पड़े। 251 वोटों के बहुमत के साथ संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 सहित तीनों विधेयकों को लोकसभा में पेश किया गया। इस चर्चा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने भाग लिया।
विपक्ष लोकसभा सीटों को बढ़ाने के प्रस्ताव पर चिंतित
वहीं, विपक्ष की ओर से समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपालने भी चर्चा में हिस्सा लिया। विपक्षी सांसदों ने परिसीमन और लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने के प्रस्ताव को लेकर चिंता जताई। उनका आरोप है कि इस प्रस्तावित कानून से सदन में दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है।