Punjab Politics: प्रकाश सिंह बादल के करीबी रहे मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों BJP में शामिल, जानिए कौन हैं ‘मेजर भूप’
प्रकाश सिंह बादल के लंबे समय तक करीबी सहयोगी और उनके राजनीतिक सचिव रहे मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों ने भाजपा का दामन थाम लिया है। 78 वर्षीय रिटायर्ड सैन्य अधिकारी के साथ उनके बेटे अमरवीर सिंह बादल भी भाजपा में शामिल हुए। 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले इस कदम को बादल परिवार और अकाली राजनीति से जुड़े पुराने नेटवर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पंजाब की राजनीति में प्रकाश सिंह बादल का नाम लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल की राजनीति के केंद्र में रहा। अब उनके परिवार से जुड़े एक पुराने और भरोसेमंद चेहरे ने अपनी राजनीतिक दिशा बदल ली है। 78 वर्षीय मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों, जिन्हें लंबी विधानसभा क्षेत्र के बादल गांव में ‘मेजर भूप’ के नाम से जाना जाता है, भाजपा में शामिल हो गए हैं। उनके साथ उनके बेटे अमरवीर सिंह बादल ने भी पार्टी की सदस्यता ली। चंडीगढ़ में हुए इस कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों मौजूद रहे।
ढिल्लों का भाजपा में जाना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह केवल बादल परिवार के रिश्तेदार नहीं रहे, बल्कि लंबे समय तक प्रकाश सिंह बादल के राजनीतिक सहयोगी भी रहे। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने बादल के साथ करीब 25 वर्षों तक राजनीतिक सलाहकार और सहयोगी की भूमिका निभाई तथा 1997 से 2002 के दौरान बादल सरकार में राजनीतिक सचिव के तौर पर भी काम किया।
कौन हैं मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों?
मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों का जन्म 1948 में हुआ था। उन्होंने द लॉरेंस स्कूल, सनावर से पढ़ाई करने के बाद राष्ट्रीय रक्षा अकादमी का रुख किया। इसके बाद भारतीय सैन्य अकादमी, देहरादून से प्रशिक्षण लेकर दिसंबर 1969 में सेना में सेकंड लेफ्टिनेंट के तौर पर कमीशन हासिल किया।
उन्होंने आर्टिलरी रेजिमेंट में लंबे समय तक सेवा की। सैन्य करियर के दौरान वह पंजाब के तत्कालीन राज्यपाल जय सुख लाल हाथी के एड-डी-कैंप यानी ADC भी रहे। सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उनका जुड़ाव परिवार के कृषि और कारोबार से रहा, लेकिन राजनीतिक गतिविधियों से उनका संपर्क बना रहा।
बादल परिवार के साथ उनका रिश्ता भी केवल राजनीति तक सीमित नहीं था। वह प्रकाश सिंह बादल के चचेरे भाई थे और दोनों परिवारों का लंबे समय तक पारिवारिक संपर्क रहा। ढिल्लों के पिता गुर राज सिंह भी राजनीति में रहे और 1950 के दशक में राज्यसभा के सदस्य थे।
चुनावी राजनीति में पर्दे के पीछे निभाई अहम भूमिका
मेजर भूप की पहचान कभी ऐसे नेता के रूप में नहीं रही जो चुनावी मंचों पर लगातार नजर आए हों। इसके बजाय उनकी भूमिका संगठन और चुनाव प्रबंधन के पीछे काम करने वाले व्यक्ति की रही।
उनके बारे में बताया जाता है कि प्रकाश सिंह बादल के चुनाव अभियानों के दौरान उन्हें अलग-अलग क्षेत्रों और वार्डों की जिम्मेदारी दी जाती थी। पार्टी के नाराज कार्यकर्ताओं या असंतुष्ट नेताओं से बातचीत करना और उन्हें संगठन के साथ बनाए रखने की कोशिश करना भी उनकी भूमिका का हिस्सा था।
यही वजह है कि लंबी और बादल गांव की राजनीति को समझने वाले लोगों के बीच उनका नाम लंबे समय से जाना-पहचाना रहा है। उन्होंने खुद भी कहा है कि उन्हें सार्वजनिक राजनीति और सुर्खियों में रहने की तुलना में पर्दे के पीछे काम करना ज्यादा पसंद रहा।
2022 का चुनाव बना राजनीतिक बदलाव का मोड़
2022 का पंजाब विधानसभा चुनाव भी ढिल्लों के राजनीतिक सफर में एक महत्वपूर्ण मोड़ रहा। उस चुनाव में शिरोमणि अकाली दल का प्रदर्शन काफी सीमित रहा और पार्टी विधानसभा में तीन सीटों तक सिमट गई। प्रकाश सिंह बादल भी लंबी सीट से चुनाव हार गए थे।
इसके बाद प्रकाश सिंह बादल के निधन के बाद ढिल्लों ने कुछ समय तक सार्वजनिक राजनीतिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखी। अब उन्होंने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया है। अपने फैसले की वजह बताते हुए ढिल्लों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम और भाजपा की विचारधारा के प्रति अपनी निकटता का उल्लेख किया है।
BJP में शामिल होने के बावजूद बादल परिवार से रिश्ता कायम
भाजपा में शामिल होने के बाद भी ढिल्लों ने साफ किया है कि उनका बादल परिवार से व्यक्तिगत रिश्ता खत्म नहीं हुआ है। सुखबीर सिंह बादल उनके भतीजे हैं और उन्होंने कहा है कि राजनीतिक विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन पारिवारिक संबंध अपनी जगह बने रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि उनके मन में शिरोमणि अकाली दल या सुखबीर बादल के प्रति कोई कड़वाहट नहीं है।
क्या चुनाव लड़ेंगे मेजर भूप?
मेजर भूपिंदर सिंह ढिल्लों ने अब तक खुद कोई विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा है। भाजपा में शामिल होने के बाद भी उन्होंने किसी संभावित टिकट को लेकर कोई दावा नहीं किया। उनका कहना है कि पार्टी जो भी जिम्मेदारी देगी, वह उसे निभाएंगे।
ऐसे में उनकी अगली भूमिका क्या होगी, यह भाजपा के संगठनात्मक और चुनावी फैसलों पर निर्भर करेगा। फिलहाल उनका भाजपा में शामिल होना पंजाब की 2027 की राजनीति में इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि वह बादल परिवार के पुराने राजनीतिक नेटवर्क से जुड़े रहे हैं और अब उसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के एक हिस्से के साथ भाजपा में नई भूमिका शुरू कर रहे हैं।