पंजाब CM के कैंप ऑफिस पर CBI की कार्रवाई, बोले- पंजाब में BJP की चुनावी तैयारी शुरू
पंजाब CM के कैंप ऑफिस पर CBI कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। ट्रांसफर-पोस्टिंग और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले की जांच हाई कोर्ट के आदेश पर CBI कर रही है। पंजाब CM ने कार्रवाई को भाजपा की चुनावी रणनीति से जोड़ा है, जबकि विपक्ष ने इसे भ्रष्टाचार की जांच की दिशा में कदम बताया है।
चंडीगढ़: पंजाब के मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की कार्रवाई ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। यह कार्रवाई अधिकारियों के ट्रांसफर-पोस्टिंग और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के हालिया आदेश के बाद हुई है। पंजाब CM ने कार्रवाई को राजनीतिक रंग देते हुए इसे आगामी पंजाब चुनाव की तैयारी बताया है।
पंजाब CM ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए केंद्र की भाजपा सरकार पर निशाना साधा। मुख्यमंत्री का आरोप है कि पंजाब में आने वाले समय में केंद्रीय जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि CBI और ED के जरिए उनकी सरकार तथा आम आदमी पार्टी को बदनाम करने की कोशिश होगी।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद जांच ने पकड़ा जोर
मामला अधिकारियों के तबादले और नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में पंजाब के पुलिस महानिदेशक को कई पत्र भेजे थे। इन पत्रों में कुछ लोगों पर अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग तथा सरकारी कामकाज में कथित हस्तक्षेप से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे।
ED की ओर से जिन लोगों के नाम सामने आए, उनमें मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी राजबीर सिंह घुम्मन के अलावा नितिन गोहल और बीर देविंदर का भी उल्लेख किया गया है। एजेंसी ने आरोप लगाया था कि अधिकारियों की पोस्टिंग और तबादलों के साथ-साथ सरकारी टेंडरों से संबंधित मामलों में भी कथित तौर पर प्रभाव डाला जा रहा था।
इन आरोपों पर पंजाब पुलिस की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए मामला पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट पहुंचा। याचिकाकर्ता की ओर से मामले की स्वतंत्र जांच CBI से कराने की मांग की गई थी।
हाई कोर्ट ने सोमवार को मामले की जांच CBI को सौंपने का निर्देश दिया। अदालत ने जांच को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने को भी कहा। इसके ठीक बाद CBI की कार्रवाई सामने आने से पंजाब की सियासत गरमा गई है।
पंजाब CM ने कार्रवाई को बताया राजनीतिक कदम
CBI की कार्रवाई के बाद पंजाब CM ने भाजपा पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल पंजाब की राजनीतिक परिस्थितियों को प्रभावित करने के लिए किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा कि भाजपा ने पंजाब में चुनावी तैयारियां शुरू कर दी हैं। उनका आरोप है कि आने वाले समय में CBI और ED की कार्रवाई बढ़ सकती है तथा आम आदमी पार्टी सरकार को निशाना बनाया जा सकता है।
पंजाब CM ने यह भी दावा किया कि उनकी पार्टी को जनता से मिल रहे समर्थन के कारण भाजपा परेशान है। हालांकि, ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं और जांच एजेंसी की कार्रवाई का कानूनी आधार हाई कोर्ट के आदेश से जुड़ा हुआ है।
CBI ने 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की
CBI के अनुसार, पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश और प्रवर्तन निदेशालय (ED) से मिली रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए FIR दर्ज की गई है। जांच में पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD और उनके सहयोगियों पर अधिकारियों, जिनमें IAS और IPS अधिकारी भी शामिल हैं, की पोस्टिंग को कथित तौर पर प्रभावित और नियंत्रित करने के आरोपों की जांच की जा रही है।
CBI के मुताबिक, आरोपों में विभागीय कार्यवाही, नीतियां बनाने से जुड़े मामलों, प्रशासनिक मंजूरियों, टेंडर की शर्तों, लाइसेंस से जुड़े मामलों, भूमि उपयोग परिवर्तन, संपत्ति विवाद तथा राजस्व और भूमि से संबंधित मामलों में कथित तौर पर आर्थिक लाभ के बदले प्रभाव डालने की बात शामिल है।
जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि कुछ आरोपी सरकारी कर्मचारियों ने सरकार की ओर से आदेश और नीतियां जारी होने से पहले उनके ड्राफ्ट कथित तौर पर निजी लोगों को उपलब्ध कराए। मामले में CBI ने कुल छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। इनमें पंजाब के मुख्यमंत्री के OSD राजबीर घुम्मन, नितिन गोहल, जितिन गोहल उर्फ राजा, रोमी राजा महाजन, बीर देविंदर, आर.एस. नागरा तथा कुछ अज्ञात सरकारी कर्मचारी और निजी व्यक्तियों के नाम शामिल हैं।
सात शहरों में 8 ठिकानों पर CBI की तलाशी
FIR दर्ज करने के बाद CBI ने आरोपियों से जुड़े परिसरों पर व्यापक और समन्वित तलाशी अभियान चलाया। एजेंसी के अनुसार, चंडीगढ़, मोहाली, गुरदासपुर, लुधियाना, पटियाला, संगरूर और जालंधर में कुल 8 ठिकानों पर तलाशी ली गई।
तलाशी के दौरान CBI ने लैपटॉप, मोबाइल फोन और कई दस्तावेज समेत ऐसे सामान बरामद किए हैं, जिनमें कथित रिश्वतखोरी और अनियमितताओं से संबंधित जानकारी होने की आशंका है। एजेंसी इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच कर रही है ताकि मामले में कथित भ्रष्टाचार और आर्थिक लेन-देन से जुड़े सबूतों का पता लगाया जा सके।
CBI ने कहा है कि जब्त किए गए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि क्या इनका इस्तेमाल अधिकारियों की पोस्टिंग, प्रशासनिक फैसलों या अन्य सरकारी मामलों को प्रभावित करने के लिए किया गया था।
क्या है ट्रांसफर-पोस्टिंग विवाद?
पूरे मामले की शुरुआत अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग में कथित भ्रष्टाचार तथा बाहरी हस्तक्षेप के आरोपों से हुई। ED की ओर से पंजाब पुलिस को भेजे गए पत्रों में आरोप लगाया गया था कि कुछ लोग प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्तियों को प्रभावित करने और सरकारी ठेकों से जुड़े मामलों में दखल देने की कोशिश कर रहे थे।
आरोपों में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों की कथित भूमिका की भी जांच की मांग की गई। चूंकि इन आरोपों पर पंजाब पुलिस द्वारा कार्रवाई किए जाने को लेकर सवाल उठे, इसलिए याचिका के जरिए अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई।
अब CBI को जांच सौंपे जाने के बाद एजेंसी को आरोपों, संबंधित दस्तावेजों और कथित लेन-देन या प्रशासनिक हस्तक्षेप से जुड़े पहलुओं की जांच करनी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई का आधार बनता है।
आगे बढ़ सकता है राजनीतिक विवाद
CBI की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब पंजाब की राजनीति में चुनावी माहौल को लेकर चर्चाएं तेज हैं। आम आदमी पार्टी इसे केंद्रीय एजेंसियों के कथित राजनीतिक इस्तेमाल के तौर पर देख रही है, जबकि विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष जांच की दिशा में कदम बता रहा है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि CBI जांच अदालत के निर्देश के तहत आगे बढ़ रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले दस्तावेज और अधिकारियों के बयान इस मामले की दिशा तय करेंगे। आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़े लोगों की भूमिका और ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित आरोपों पर और जानकारी सामने आने की संभावना है।