पंजाब में बदले सियासी समीकरण: अमृतपाल अकेले लड़ेंगे चुनाव, BSP भी उतरेगी मैदान में; SAD-BJP गठबंधन पर सस्पेंस
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अमृतपाल सिंह के परिवार ने अकेले चुनाव लड़ने का संकेत दिया है, BSP ने गठबंधन से दूरी बनाई है और SAD-BJP के संभावित गठबंधन पर सस्पेंस बरकरार है।
चंडीगढ़: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की राजनीति में कई अहम संकेत सामने आए हैं। एक तरफ खडूर साहिब से सांसद और जेल में बंद अमृतपाल सिंह के परिवार ने साफ किया है कि उनके अलावा परिवार का कोई दूसरा सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा। दूसरी ओर बहुजन समाज पार्टी ने पंजाब में किसी भी दल के साथ गठबंधन से इनकार करते हुए अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
इसी बीच शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच संभावित गठबंधन को लेकर अटकलें जारी हैं। आम आदमी पार्टी ने दोनों दलों के संभावित साथ आने पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। वहीं अरविंद केजरीवाल ने पंजाब और गुजरात के सरकारी स्कूलों की तुलना को लेकर बीजेपी को खुली चुनौती दी है।
अमृतपाल के परिवार ने साफ किया अपना रुख
अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने मंगलवार को कहा कि उनके परिवार से विधानसभा चुनाव में सिर्फ अमृतपाल सिंह ही उम्मीदवार होंगे। परिवार का कोई दूसरा सदस्य चुनाव नहीं लड़ेगा।
तरसेम सिंह ने इस फैसले को परिवारवाद से दूर रहने की नीति से जोड़ा। उनका कहना है कि परिवार की राजनीति को आगे बढ़ाने के बजाय जमीन पर काम करने वाले युवाओं को नेतृत्व का अवसर मिलना चाहिए।
तरसेम सिंह अकाल दल (वारिस पंजाब दे) के कार्यकारी अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि परिवार का उद्देश्य पंजाब और पंथ से जुड़े मुद्दों पर काम करना है और युवाओं को राजनीतिक भूमिका में आगे लाना है।
अमृतपाल सिंह फिलहाल असम की जेल में बंद हैं। ऐसे में उनका चुनाव लड़ना और चुनाव प्रचार किस तरह होगा, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण राजनीतिक सवाल रहेगा। हालांकि, उनके पिता ने परिवार की ओर से उम्मीदवारों को लेकर तस्वीर साफ करने की कोशिश की है।
BSP ने भी गठबंधन से बनाई दूरी
पंजाब की चुनावी तस्वीर में दूसरा बड़ा बदलाव मायावती की बहुजन समाज पार्टी के फैसले से आया है। BSP ने ऐलान किया है कि वह पंजाब विधानसभा चुनाव अपने दम पर लड़ेगी।
पार्टी ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की तरह पंजाब में भी किसी दल के साथ गठबंधन नहीं करने का फैसला किया है। मायावती का तर्क है कि गठबंधन की राजनीति से सीटों और वोट प्रतिशत पर असर पड़ सकता है और इसका प्रभाव पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ता है।
BSP के इस फैसले से पंजाब में चुनावी मुकाबला और बहुकोणीय होने की संभावना बढ़ सकती है। पार्टी अब अपने संगठन और पारंपरिक सामाजिक आधार को मजबूत करने पर जोर देगी।
SAD-BJP गठबंधन पर अभी भी सस्पेंस
पंजाब की राजनीति में सबसे ज्यादा चर्चा शिरोमणि अकाली दल और बीजेपी के संभावित गठबंधन को लेकर है। दोनों दल लंबे समय तक सहयोगी रहे हैं, लेकिन कृषि कानूनों के मुद्दे पर 2020 में उनके रास्ते अलग हो गए थे।
अब दोनों दलों के बीच दोबारा राजनीतिक नजदीकी की अटकलें हैं। हालांकि, अभी तक गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
अकाली दल के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि बीजेपी अपनी तैयारी कर रही है और अकाली दल अपनी। यदि बीजेपी की ओर से कोई प्रस्ताव आता है तो पार्टी हाईकमान उस पर विचार करेगा।
अकाली दल के उपाध्यक्ष संजीव तलवार ने भी कहा कि गठबंधन का अंतिम फैसला सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में पार्टी करेगी। हालांकि, उन्होंने अपनी व्यक्तिगत राय रखते हुए दावा किया कि पंजाब के लोग मौजूदा सरकार को हटाने के लिए दोनों दलों को साथ देखना चाहते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर गठबंधन होता है तो वह मुद्दों के आधार पर होगा और इसमें ‘बड़े भाई’ या ‘छोटे भाई’ जैसी स्थिति नहीं होगी।
AAP ने गठबंधन की संभावनाओं पर साधा निशाना
SAD और BJP के संभावित गठबंधन को लेकर आम आदमी पार्टी ने दोनों दलों पर हमला बोला है। AAP नेता बलतेज पन्नू ने कहा कि राजनीति में बड़ा या छोटा भाई कौन होगा, इसका फैसला पार्टियां नहीं बल्कि जनता करती है।
उन्होंने अकाली दल के मौजूदा राजनीतिक प्रभाव पर भी सवाल उठाया और 2017 तथा 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन का हवाला दिया।
AAP नेताओं ने कृषि कानूनों के मुद्दे को भी बीजेपी और अकाली दल के पुराने रिश्ते से जोड़कर हमला किया। उनका सवाल है कि जिस मुद्दे पर अकाली दल ने बीजेपी से संबंध तोड़े थे, अब अगर दोनों दल फिर साथ आते हैं तो उसके पीछे क्या राजनीतिक आधार होगा?
पंजाब सरकार के मंत्री तरुणप्रीत सिंह सोंड ने भी बीजेपी पर हमला करते हुए दावा किया कि पार्टी चाहे 117 सीटों पर चुनाव लड़े या सीमित सीटों पर, उसे राज्य में कोई सफलता नहीं मिलेगी। उन्होंने किसान आंदोलन के दौरान बीजेपी के रवैये को लेकर भी निशाना साधा।
केजरीवाल ने बीजेपी को दिया स्कूलों पर चैलेंज
इसी राजनीतिक बहस के बीच आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने शिक्षा के मुद्दे पर बीजेपी को खुली चुनौती दी है।
केजरीवाल ने कहा कि बीजेपी पंजाब के सरकारी स्कूलों को बदनाम करने के लिए छेड़छाड़ किए गए और AI से तैयार वीडियो का इस्तेमाल कर रही है। इसके जवाब में उन्होंने गुजरात और पंजाब के सरकारी स्कूलों की तुलना करने की पेशकश की।
केजरीवाल ने बीजेपी को चुनौती देते हुए कहा कि गुजरात में पार्टी लंबे समय से सत्ता में है, जबकि पंजाब में AAP सरकार को कुछ ही वर्ष हुए हैं। उन्होंने दोनों राज्यों के 1,000-1,000 सरकारी स्कूलों का संयुक्त निरीक्षण करने का प्रस्ताव रखा।
उनका कहना है कि पंजाब और गुजरात के स्कूलों को एक साथ देखकर यह तय किया जा सकता है कि किस राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था बेहतर है।
चुनाव से पहले बढ़ रही राजनीतिक हलचल
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले अलग-अलग दलों की रणनीतियां अब धीरे-धीरे सामने आने लगी हैं। अमृतपाल सिंह के परिवार ने परिवारवाद से दूरी का संदेश दिया है, जबकि BSP ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
दूसरी ओर SAD और BJP के बीच संभावित गठबंधन का सवाल अभी खुला है। अगर दोनों दल फिर साथ आते हैं तो पंजाब के राजनीतिक समीकरणों पर इसका असर पड़ना तय माना जाएगा।
AAP पहले से ही इस संभावित गठबंधन को निशाना बना रही है और शिक्षा, किसान तथा पंजाब के मुद्दों पर बीजेपी और अकाली दल को घेरने की कोशिश कर रही है।
ऐसे में आने वाले दिनों में उम्मीदवारों की घोषणा, गठबंधन की तस्वीर और अलग-अलग दलों की चुनावी रणनीति पंजाब की सियासत को और दिलचस्प बना सकती है। फिलहाल तीन बड़े सवाल बने हुए हैं—क्या अमृतपाल चुनाव मैदान में उतर पाएंगे, क्या SAD-BJP फिर साथ आएंगे और क्या BSP का अकेले लड़ने का फैसला उसके लिए फायदेमंद साबित होगा?