पंजाब विधानसभा अपडेट: ‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक’ सदन में पेश...
पंजाब : पंजाब विधानसभा का विशेष सत्र फिर से शुरू हो गया है, जिसमें मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ‘जगत ज्योति श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026’ पेश किया। पंजाब विधानसभा के स्पीकर ने ‘ੴ’ के जाप के साथ इस विधेयक पर ऐतिहासिक चर्चा की शुरुआत करवाई।
कैबिनेट मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने इसे ऐतिहासिक विधेयक बताते हुए कहा कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें भी पहले यह मौका मिला था, लेकिन वे खुद बेअदबी मामलों के दोषी रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस नए कानून के तहत बेअदबी मामलों की जांच डीएसपी स्तर से नीचे का कोई अधिकारी नहीं करेगा और जांच तय समय सीमा में पूरी की जाएगी। उन्होंने इसे “पवित्र विधेयक” बताया।
इस विधेयक पर किसी तरह का विरोध न करने की अपील
आम आदमी पार्टी के विधायक और पूर्व मंत्री इंदरबीर सिंह निज्जर ने कहा कि समाज में कुछ लोग जानबूझकर विभाजन पैदा करते हैं, इसलिए ऐसे सख्त कानून की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पहले के कानूनों में खामियों के कारण आरोपी जल्दी जेल से बाहर आ जाते थे। उन्होंने सभी से अपील की कि इस विधेयक पर किसी तरह का विरोध न किया जाए क्योंकि यह समाज की शांति और सम्मान के लिए जरूरी है।
पंजाब की पहचान सभी धर्मों का सम्मान करना है
विधायिका बलजिंदर कौर ने इसे ऐतिहासिक दिन बताते हुए कहा कि पंजाब की पहचान सिर्फ कृषि या बहादुरी नहीं, बल्कि सभी धर्मों का सम्मान करना है। उन्होंने कहा कि गुरबाणी के साथ लोगों का गहरा संबंध है, लेकिन बेअदबी की घटनाओं ने समाज को गहरी चोट पहुंचाई है। उन्होंने आगे कहा कि जैसे 1984सिख विरोधी दंगे को भुलाया नहीं जा सकता, उसी तरह 2015 का बेअदबी कांड भी पंजाब के लोगों के मन पर गहरा घाव है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारें सही मायनों में न्याय देने में असफल रहीं।
कानून के तहत दोषियों को उम्रकैद, ₹25 लाख जुर्माना
बताया गया कि विधेयक के पास होने के बाद इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। इस कानून के तहत बेअदबी के दोषियों को अधिकतम उम्रकैद और 25 लाख रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। गौरतलब है कि बेअदबी की घटनाओं को रोकने के लिए सरकार ने पिछले साल ‘पंजाब पवित्र ग्रंथों के खिलाफ अपराध निवारण विधेयक 2025’ भी पेश किया था, जिसमें 10 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान था। अब संशोधन के जरिए कानून को और सख्त बनाया जा रहा है।