नई दिल्ली, भारत: 13 अप्रैल का दिन भारतीय इतिहास में हमेशा एक गहरे दर्द और शहादत की याद दिलाता है। इसी दिन 1919 में पंजाब के अमृतसर में जलियांवाला बाग में ब्रिटिश हुकूमत के सैनिकों ने निर्दोष भारतीयों पर गोलियां चलाकर नृशंस हत्या की। यह नरसंहार बैसाखी के अवसर पर आयोजित शांतिपूर्ण सभा में शामिल महिलाओं, बच्चों और बूढ़ों तक को नहीं बख्शा गया।
निर्दोष लोग भागने के लिए बाग के कुएं में कूद गए, लेकिन वो भी लाशों से भर गया। इस दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक काले अध्याय के रूप में दर्ज है। इतने वर्षों बाद भी जलियांवाला बाग की स्मृतियां हमें याद दिलाती हैं कि स्वतंत्रता और न्याय के लिए कितने बेकसूर लोग अपने प्राणों की आहुति देने को तैयार थे। जलियांवाला बाग हत्याकांड की 106वीं बरसी पर नेताओं ने श्रद्धांजलि दी।
पीएम मोदी ने वीर शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की
सोशल मीडिया एक्स पर उन्होंने लिखा, "इस दिन, हम जलियांवाला बाग के वीर शहीदों को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। उनका बलिदान हमारे लोगों की अदम्य भावना की एक सशक्त याद दिलाता है। उन्होंने जिस साहस और अटूट संकल्प का प्रदर्शन किया, वह आने वाली पीढ़ियों को भी देश की रक्षा के लिए तत्पर रहने हेतु निरंतर प्रेरित करता रहेगा।"
ਅੱਜ ਦੇ ਦਿਨ, ਅਸੀਂ ਜੱਲ੍ਹਿਆਂਵਾਲਾ ਬਾਗ਼ ਦੇ ਸੂਰਬੀਰ ਸ਼ਹੀਦਾਂ ਨੂੰ ਦਿਲੋਂ ਸ਼ਰਧਾਂਜਲੀ ਭੇਟ ਕਰਦੇ ਹਾਂ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਕੁਰਬਾਨੀ ਸਾਡੇ ਲੋਕਾਂ ਦੇ ਕਦੇ ਨਾ ਝੁਕਣ ਵਾਲੇ ਜਜ਼ਬੇ ਦੀ ਮਜ਼ਬੂਤ ਯਾਦ ਦਿਵਾਉਂਦੀ ਹੈ। ਉਨ੍ਹਾਂ ਵੱਲੋਂ ਵਿਖਾਇਆ ਗਿਆ ਹੌਸਲਾ ਅਤੇ ਪੱਕਾ ਇਰਾਦਾ, ਆਉਣ ਵਾਲੀਆਂ ਪੀੜ੍ਹੀਆਂ ਨੂੰ ਆਜ਼ਾਦੀ, ਇਨਸਾਫ਼ ਅਤੇ ਮਾਣ-ਸਨਮਾਨ ਦੀਆਂ…
— Narendra Modi (@narendramodi) April 13, 2026
उनका साहस पीढ़ियों को न्याय के लिए खड़े होने की प्रेरणा देगा- रक्षा मंत्री
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को जलियांवाला बाग हत्याकांड के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए 1919 में उनके बलिदान को भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक क्षण बताया, जिसने देश की सामूहिक चेतना को जागृत किया। एक्स पर पोस्ट में सिंह ने लिखा, “1919 में आज ही के दिन जलियांवाला बाग हत्याकांड में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी निर्दोष भारतीयों को श्रद्धांजलि। उनका बलिदान भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक निर्णायक क्षण है, जिसने देश की सामूहिक चेतना को जगाया। उनका साहस पीढ़ियों को न्याय, गरिमा और आत्मसम्मान के लिए खड़े होने की प्रेरणा देता रहेगा।”
Remembering and paying my heartfelt tributes to all those innocent Indians who sacrificed their lives in the Jallianwala Bagh massacre on this day in 1919. Their sacrifice remains a defining moment in India’s freedom struggle, awakening the nation’s collective conscience. Their…
— Rajnath Singh (@rajnathsingh) April 13, 2026
पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें “अमर शहीद” बताया
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भी पीड़ितों को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें “अमर शहीद” बताया। गडकरी ने एक्स पर लिखा, “जलियांवाला बाग हत्याकांड के अमर शहीदों को भावपूर्ण नमन।”
जलियांवाला बाग हत्याकांड के अमर शहीदों को शत्-शत् नमन।🙏🏻#जलियांवाला_बाग_हत्याकांड#JallianwalaBaghMassacre pic.twitter.com/fO8FMlhRSn
— Nitin Gadkari (@nitin_gadkari) April 13, 2026
मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी- मुख्यमंत्री मोहन यादव
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि इन अमर शहीदों का बलिदान देश के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने लिखा, “जलियांवाला बाग हत्याकांड स्मृति दिवस पर उन सभी अमर शहीदों को विनम्र श्रद्धांजलि, जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। आपकी अमर गाथा हमें राष्ट्र के प्रति समर्पण और इस अमूल्य स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करती रहेगी।”
जलियांवाला बाग नरसंहार के स्मृति दिवस पर माँ भारती की स्वाधीनता में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सभी अमर बलिदानियों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ।आपकी अमर गाथा सदैव हमें राष्ट्र के लिए सर्वस्व अर्पित करने और स्वतंत्रता की इस अनमोल धरोहर की रक्षा करने के लिए प्रेरणा… pic.twitter.com/QU9fTH3zqB
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) April 13, 2026
जलियांवाला बाग हत्याकांड इतिहास का काला अध्याय
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने इसे इतिहास का एक काला अध्याय बताते हुए अन्याय के खिलाफ एकजुट रहने का आह्वान किया। उन्होंने लिखा, “जलियांवाला बाग हत्याकांड स्मृति दिवस पर मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति देने वाले वीरों को श्रद्धांजलि। यह काला अध्याय हमें अन्याय के खिलाफ एकजुट रहने और देश की स्वतंत्रता व सम्मान की रक्षा के लिए संकल्पित रहने की प्रेरणा देता है।”
जलियांवाला बाग हत्याकांड स्मृति दिवस पर मातृभूमि के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले सभी वीरों को विनम्र श्रद्धांजलि।यह काला अध्याय हमें अन्याय के विरुद्ध एकजुट होकर खड़े रहने और राष्ट्र की स्वतंत्रता एवं सम्मान की रक्षा हेतु अटूट संकल्प की प्रेरणा देता है।शहीदों का यह… pic.twitter.com/A7JgHy4fns
— Nitin Nabin (@NitinNabin) April 13, 2026
उनके बलिदान ने गरिमा के लिए देश के संकल्प को मजबूत किया
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने इसे भारत के इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक बताते हुए सैकड़ों निहत्थे लोगों के बलिदान को याद किया। उन्होंने लिखा, “1919 का जलियांवाला बाग हत्याकांड हमारे इतिहास के सबसे काले अध्यायों में से एक है। सैकड़ों निहत्थे पुरुष, महिलाएं और बच्चे मारे गए, जिसने देश की चेतना पर गहरा घाव छोड़ा। हम उन शहीदों को कृतज्ञता के साथ याद करते हैं, जिनके बलिदान ने स्वतंत्रता और गरिमा के लिए देश के संकल्प को मजबूत किया।”
The Jallianwala Bagh massacre of 1919 remains one of the darkest chapters in our history. Hundreds of unarmed men, women and children were killed, leaving a deep scar on the nation’s conscience. We remember the martyrs with gratitude whose sacrifice strengthened India’s… pic.twitter.com/XC0P7mw0ia
— DK Shivakumar (@DKShivakumar) April 13, 2026
निहत्थी भीड़ पर डायर ने गोली चलाने का दिया आदेश
यह हत्याकांड पंजाब के अमृतसर स्थित जलियाँवाला बाग में हुआ था, जहां बैसाखी के अवसर पर हजारों लोग एकत्र हुए थे। यह सभा रॉलेट एक्ट के विरोध और नेताओं डॉ. सत्यपाल और डॉ. सैफुद्दीन किचलू की रिहाई की मांग के लिए भी आयोजित की गई थी। ब्रिटिश अधिकारी रेजिनाल्ड डायर ने बिना किसी चेतावनी के निहत्थी भीड़ पर गोली चलाने का आदेश दिया।
गोला-बारूद खत्म हो जाने तक की गई फॉयरिंग
संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, “1650 राउंड गोलियां चलाई गईं और फायरिंग तब तक जारी रही जब तक गोला-बारूद खत्म नहीं हो गया।” जहां ब्रिटिश रिकॉर्ड में मृतकों की संख्या 291 बताई गई, वहीं भारतीय नेताओं जैसे मदन मोहन मालवीय ने 500 से अधिक लोगों के मारे जाने का अनुमान लगाया। संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, इस घटना के दौरान ब्रिगेडियर जनरल डायर ने अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं जताया।