नई दिल्ली: 1984 विरोधी सिख दंगा मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद सज्जन कुमार की बरी किए जाने के खिलाफ दायर अपील पर मंगलवार को नोटिस जारी किया। यह मामला जनकपुरी और विकासपुरी पुलिस स्टेशनों में दर्ज एफआईआर से जुड़ा हुआ है।

न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने सज्जन कुमार को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर के लिए तय की। 1984 दंगा पीड़ित मनजीत सिंह ने सज्जन कुमार को बरी किए जाने के फैसले को चुनौती दी है।

दंगा पीड़ित की तरफ से अधिवक्ताओं ने रखा पक्ष

दंगा पीड़ित की ओर से अधिवक्ता कामना वोहरा, गुरबख्श सिंह और सुरप्रीत कौर ने पक्ष रखा। 22 जनवरी 2026 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने 1984 विरोधी सिख दंगा मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को बरी कर दिया था। अदालत ने कहा था कि घटनास्थल पर उनकी मौजूदगी या गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा होने के पर्याप्त और विश्वसनीय सबूत नहीं मिले।

अपीलकर्ता ने कहा कि ट्रायल कोर्ट इस तथ्य को समझने में विफल रही कि घटनास्थल पर सज्जन कुमार की मौजूदगी की पुष्टि अन्य गवाहों हरजीत कौर, तेजिंदर सिंह और अन्य गवाहों ने भी की थी, लेकिन उनकी गवाही पर विचार नहीं किया गया।

सही मूल्यांकन किए बगैर सुनाया फैसला- अपीलकर्ता

अपील में कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों का सही तरीके से मूल्यांकन किए बिना यांत्रिक तरीके से फैसला सुनाया, इसलिए यह निर्णय रद्द किया जाना चाहिए।

याचिका में यह भी कहा गया कि ट्रायल कोर्ट ने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि सज्जन कुमार की भूमिका प्रत्यक्ष और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से साबित होती है। गुरचरण सिंह, सोहन सिंह और अवतार सिंह की मौत में उनकी भूमिका को लेकर सुनवाई के दौरान कोई बड़ा विरोधाभास सामने नहीं आया, फिर भी अदालत ने उन्हें संदेह का लाभ दे दिया।

सज्जन कुमार ने राज्य मशीनरी का किया दुरुपयोग- अपीलकर्ता

अपीलकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि उस समय सज्जन कुमार इलाके के बेहद प्रभावशाली नेता थे और उन्होंने राज्य मशीनरी का दुरुपयोग किया। साथ ही कानून की प्रक्रिया में बाधा डाली, जिसके कारण कोई भी उनके खिलाफ कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। काफी प्रयासों के बाद एसआईटी उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर सकी।