भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच लागू हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) का असर अब ऑटोमोबाइल सेक्टर में भी दिखाई देने लगा है। इस समझौते के तहत ब्रिटेन में बनी कई लग्जरी कारों पर लगने वाली आयात (Import) ड्यूटी में भारी कटौती की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे आने वाले महीनों में भारत में प्रीमियम और लग्जरी कारों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी देखने को मिल सकती है।
इस फैसले का सीधा फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा जो लंबे समय से Rolls-Royce, Land Rover, Jaguar, Bentley, Aston Martin और McLaren जैसी हाई-एंड कारें खरीदने का इंतजार कर रहे थे।
इंपोर्ट ड्यूटी में बड़ी राहत
नई व्यवस्था के तहत यूके से पूरी तरह तैयार होकर भारत आने वाली लग्जरी कारों (Completely Built Units - CBU) पर लगने वाली इंपोर्ट ड्यूटी को 110 प्रतिशत से घटाकर 30 प्रतिशत कर दिया गया है।
हालांकि यह राहत पहले चरण में एक निर्धारित कोटा प्रणाली के तहत मिलेगी। शुरुआती वर्ष में लगभग 20,000 वाहनों को इस रियायत का लाभ मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारतीय बाजार में लग्जरी कारों की पहुंच बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
किन ब्रांड्स को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?
FTA के तहत मुख्य रूप से यूके में निर्मित लग्जरी वाहन इस छूट के दायरे में आएंगे। इनमें प्रमुख ब्रांड शामिल हैं—
- Rolls-Royce
- Land Rover
- Jaguar
- Aston Martin
- Bentley
- McLaren
इसके अलावा कई ऑटोमोबाइल पार्ट्स के आयात पर भी लागत कम होने की संभावना है, जिससे भविष्य में मेंटेनेंस खर्च पर भी सकारात्मक असर पड़ सकता है।
कितनी कम हो सकती हैं कीमतें?
ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का अनुमान है कि इंपोर्ट ड्यूटी में भारी कमी के कारण इन कारों की कीमतों में 20 से 30 प्रतिशत तक की गिरावट संभव है।
उदाहरण के तौर पर—यदि किसी लग्जरी कार की मौजूदा कीमत 7–8 करोड़ रुपये है, तो उसकी कीमत में लगभग 2 से 3 करोड़ रुपये तक की कमी आ सकती है। वहीं 5 करोड़ रुपये के आसपास की कार पर 1 से 2 करोड़ रुपये तक की बचत संभव मानी जा रही है।
हालांकि अंतिम कीमत GST, रोड टैक्स, डीलर मार्जिन और अन्य स्थानीय शुल्कों पर भी निर्भर करेगी।
कैसे काम करेगा कोटा सिस्टम?
सरकार ने घरेलू ऑटोमोबाइल उद्योग के हितों को ध्यान में रखते हुए इस ड्यूटी छूट को सीमित कोटा के साथ लागू किया है।
पहले चरण में केवल निर्धारित संख्या में आयातित वाहनों को ही कम ड्यूटी का लाभ मिलेगा।
पेट्रोल और डीजल वाहनों पर यह व्यवस्था तुरंत लागू होगी, जबकि इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए अलग संक्रमण अवधि तय की गई है, ताकि घरेलू ईवी उद्योग को प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान न हो।
भारतीय ऑटो सेक्टर को भी मिलेगा लाभ
यह समझौता केवल आयात तक सीमित नहीं है। इसके तहत भारत में निर्मित इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों को भी ब्रिटेन के बाजार में बेहतर अवसर मिलने की संभावना है।
कम व्यापारिक बाधाओं के कारण भारतीय ऑटो कंपनियों के लिए निर्यात बढ़ाने का नया रास्ता खुल सकता है, जिससे घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ट्रकों पर भी घटेगा टैक्स
FTA का लाभ केवल लग्जरी कारों तक सीमित नहीं रहेगा।
यूके से आयात होने वाले ट्रकों पर लगने वाली ड्यूटी भी चरणबद्ध तरीके से घटाई जाएगी। मौजूदा 44 प्रतिशत शुल्क अगले कुछ वर्षों में घटकर लगभग 8.8 प्रतिशत तक आ सकता है।
इससे लॉजिस्टिक्स और कमर्शियल ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी लागत कम करने में मदद मिल सकती है।
ऑटो बाजार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा
विशेषज्ञों का मानना है कि कम आयात शुल्क से लग्जरी कार बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और ग्राहकों को अधिक विकल्प मिलेंगे। साथ ही कंपनियां नए मॉडल लॉन्च करने और बेहतर कीमतों पर बिक्री बढ़ाने की रणनीति अपना सकती हैं।
आने वाले दिनों में विभिन्न कंपनियां अपने संशोधित प्राइस लिस्ट जारी करेंगी, जिसके बाद ग्राहकों को वास्तविक कीमतों का स्पष्ट अंदाजा मिल सकेगा।
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