भारतीय सिनेमा की दमदार अभिनेत्रियों में शुमार रानी मुखर्जी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि मिलने जा रही है। ऑस्ट्रेलिया की प्रतिष्ठित La Trobe University ने उन्हें भारतीय सिनेमा और समाज सेवा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए Honorary Doctor of Letters (मानद डॉक्टर ऑफ लेटर्स) से सम्मानित करने का फैसला किया है। यह सम्मान उन्हें Indian Film Festival of Melbourne (IFFM) 2026 के दौरान 14 अगस्त को मेलबर्न के फेडरेशन स्क्वायर में आयोजित विशेष समारोह में प्रदान किया जाएगा।
यह सम्मान केवल उनके अभिनय करियर का नहीं, बल्कि उन सामाजिक मुद्दों को भी मान्यता देता है जिन्हें उन्होंने अपनी फिल्मों और व्यक्तिगत प्रयासों के माध्यम से लगातार उठाया है।
करीब तीन दशक का शानदार फिल्मी सफर
रानी मुखर्जी पिछले लगभग 30 वर्षों से भारतीय फिल्म उद्योग का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं। उन्होंने अपने अभिनय से न सिर्फ व्यावसायिक सफलता हासिल की, बल्कि कई ऐसी फिल्मों में काम किया जिनका सामाजिक संदेश भी बेहद प्रभावशाली रहा।
'ब्लैक', 'नो वन किल्ड जेसिका', 'हिचकी', 'मर्दानी' सीरीज और 'मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे' जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों दोनों ने सराहा। इन फिल्मों के जरिए उन्होंने महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, सामाजिक न्याय, लैंगिक समानता और मानवाधिकार जैसे महत्वपूर्ण विषयों को मजबूती से पर्दे पर प्रस्तुत किया।
समाज सेवा में भी सक्रिय भूमिका
रानी मुखर्जी केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रहीं। वे लंबे समय से महिलाओं, बच्चों और समाज के वंचित वर्गों से जुड़े कई सामाजिक अभियानों का समर्थन करती रही हैं। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और सामुदायिक विकास से जुड़े प्रयासों में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही है।
इसी सामाजिक योगदान को देखते हुए विश्वविद्यालय ने उन्हें यह विशेष सम्मान देने का निर्णय लिया है।
सम्मान पर क्या बोलीं रानी मुखर्जी?
इस सम्मान की घोषणा के बाद रानी मुखर्जी ने अपनी खुशी और आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके लिए यह सम्मान बेहद भावुक करने वाला पल है।
रानी ने कहा कि सिनेमा उनके जीवन का सबसे बड़ा शिक्षक रहा है और उन्होंने हमेशा कहानियों की ताकत पर भरोसा किया है। उनके अनुसार, अच्छी कहानियां समाज में संवेदनशीलता बढ़ाने, संवाद शुरू करने और सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम बनती हैं।
उन्होंने यह सम्मान भारत और दुनिया भर के उन दर्शकों को समर्पित किया जिन्होंने उनके अभिनय सफर में लगातार प्यार और समर्थन दिया।
La Trobe University ने क्या कहा?
La Trobe University के चांसलर ने कहा कि रानी मुखर्जी का योगदान केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। उनकी फिल्मों ने सामाजिक न्याय, समानता और समावेशिता जैसे विषयों पर गंभीर चर्चा शुरू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
विश्वविद्यालय का मानना है कि उनका अभिनय और सामाजिक प्रतिबद्धता उन्हें इस सम्मान का योग्य पात्र बनाती है।
IFFM के लिए भी गर्व का अवसर
इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न की निदेशक ने इसे पूरे फेस्टिवल के लिए गर्व का क्षण बताया। उनके अनुसार रानी मुखर्जी अपनी पीढ़ी की सबसे प्रभावशाली अभिनेत्रियों में शामिल हैं, जिन्होंने हर दौर में चुनौतीपूर्ण किरदार निभाकर भारतीय सिनेमा को नई पहचान दी है।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान भारतीय सिनेमा की वैश्विक पहचान को और मजबूत करेगा।
13 से 23 अगस्त तक होगा IFFM 2026
इंडियन फिल्म फेस्टिवल ऑफ मेलबर्न 2026 का आयोजन 13 से 23 अगस्त तक किया जाएगा। इस दौरान दुनिया भर से फिल्म निर्माता, कलाकार और सिनेमा प्रेमी एक मंच पर जुटेंगे। फेस्टिवल में फिल्म स्क्रीनिंग, प्रीमियर, चर्चा सत्र और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
रानी मुखर्जी को मिलने वाला यह सम्मान भारतीय फिल्म उद्योग के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है और इससे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय सिनेमा की प्रतिष्ठा को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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