लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़ी स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं अब हर्बल उत्पादों के जरिए अपनी अलग पहचान बना रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकारी योजनाओं से मिले सहयोग और प्रशिक्षण के बल पर बिजनौर की महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही 'विदुर हर्बल टी' देश ही नहीं, विदेशों में भी अपनी जगह बना रही है। इस उत्पाद की फ्रेंचाइजी के लिए अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों से रुचि दिखाई जा रही है, जबकि दिल्ली, पंजाब, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
एक लाख रुपये के ऋण से शुरू हुआ सफर:
बिजनौर जिले के कोतवाली ब्लॉक के टांडा मैदास लखी वाला गांव की बबिता रानी बताती हैं कि स्वयं सहायता समूह ने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत एक लाख रुपये का ऋण लेकर इस उद्यम की शुरुआत की थी। आज समूह की 10 महिलाएं मिलकर पूरी तरह ऑर्गेनिक हर्बल टी का उत्पादन कर रही हैं। इस पहल ने उन्हें नियमित आय का स्रोत उपलब्ध कराया है और ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर भी पैदा किए हैं। उनके अनुसार, इस उद्यम से कई महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं।
प्राकृतिक जड़ी-बूटियों से तैयार होती है चाय:
'विदुर हर्बल टी' को पूरी तरह प्राकृतिक और ऑर्गेनिक सामग्री से तैयार किया जाता है। इसमें लेमनग्रास, गिलोय, मुलेठी, जामुन की पत्ती, कच्ची हल्दी, अमरूद की पत्ती, दालचीनी, तुलसी, हरी इलायची और सौंफ जैसी औषधीय जड़ी-बूटियों का उपयोग किया जाता है।
समूह दो प्रकार की हर्बल टी तैयार करता है। पहली पारंपरिक ऑर्गेनिक हर्बल टी है, जबकि दूसरी 'अर्जुना हृदय शक्ति' नाम से तैयार की जाती है, जिसे दूध या पानी दोनों के साथ बनाया जा सकता है।
दूसरे राज्यों तक पहुंचा कारोबार:
तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) बिजनौर और वर्तमान में वाराणसी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष पूर्ण बोरा ने स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को सरकारी योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अनुसार, इस पहल ने महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया है और वे अब अपने परिवार की जिम्मेदारियों को आत्मविश्वास के साथ निभा रही हैं।
आज बिजनौर में 35 से अधिक आउटलेट और कैफे में विदुर हर्बल टी का उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा मुरादाबाद में भी महिलाओं द्वारा दो हर्बल टी सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। हाल ही में सिविल लाइन क्षेत्र में एक नया केंद्र शुरू किया गया है और आने वाले समय में पांच नए कैफे खोलने की तैयारी भी चल रही है।
महिलाओं के हाथों में पूरा संचालन:
इस उद्यम की खास बात यह है कि उत्पादन से लेकर पैकेजिंग और विपणन तक की पूरी प्रक्रिया स्वयं सहायता समूह की महिलाएं ही संभालती हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को भी नई पहचान मिली है।
महिला सशक्तीकरण का सफल उदाहरण:
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने जैसी पहलें ग्रामीण महिलाओं के लिए नए अवसर तैयार कर रही हैं। 'विदुर हर्बल टी' की सफलता इस बात का उदाहरण है कि यदि महिलाओं को उचित सहयोग और संसाधन मिलें, तो वे स्थानीय स्तर पर ऐसा उद्यम विकसित कर सकती हैं जो राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पहचान बना सके।
Add GTC Bharat on Google