लखनऊ/रायबरेली: उत्तर प्रदेश में युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाएं अब जमीन पर सकारात्मक परिणाम देती दिखाई दे रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को बढ़ावा देने की नीति के तहत मत्स्य पालन, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण तथा अन्य ग्रामीण उद्यमों में निवेश को प्रोत्साहन मिल रहा है। इसका लाभ उठाकर कई युवा नौकरी तलाशने के बजाय स्वयं उद्यम स्थापित कर दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रहे हैं। रायबरेली के युवा उद्यमी सुजीत चौधरी इसका एक उदाहरण हैं।
इंजीनियरिंग से मत्स्य पालन तक का सफर:
सुजीत चौधरी ने बताया कि वह मूल रूप से बस्ती जिले के रहने वाले हैं। वर्ष 2005 में बीटेक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने निजी क्षेत्र में काम शुरू किया। वर्ष 2007 में उन्हें नौकरी के सिलसिले में अमेरिका जाने का अवसर मिला, जहां उन्होंने करीब नौ वर्षों तक कार्य किया। वर्ष 2016 में भारत लौटने के बाद उन्होंने नोएडा में एक सॉफ्टवेयर कंपनी शुरू की। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने कृषि आधारित व्यवसाय की संभावनाओं पर काम करने का फैसला किया और मत्स्य पालन क्षेत्र में निवेश करने का निर्णय लिया।
23 तालाबों में हो रहा व्यावसायिक उत्पादन:
सुजीत ने वर्ष 2019 में रायबरेली जिले के महराजगंज क्षेत्र स्थित बल्ला गांव में करीब 10 हेक्टेयर भूमि लीज पर लेकर मत्स्य पालन की शुरुआत की। आज उनके पास 23 तालाब हैं, जिनमें व्यावसायिक स्तर पर मछली उत्पादन किया जा रहा है। उनके अनुसार, हर वर्ष लगभग 500 से 600 टन मछली का उत्पादन और विपणन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस पहल से 50 से अधिक किसान भी उनके साथ जुड़े हैं। वे किसानों को मत्स्य पालन से जोड़कर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने बिचौलियों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे ग्राहकों तक अपनी पहुंच बनाकर कारोबार का विस्तार किया है। इसके अलावा वे समुद्री झींगा (श्रिम्प) उत्पादन के क्षेत्र में भी कार्य कर रहे हैं।
सरकारी सहायता से मिला विस्तार:
सुजीत चौधरी ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2021 में 8.50 लाख रुपये का अनुदान प्राप्त हुआ। उनका कहना है कि इस आर्थिक सहायता से व्यवसाय को आगे बढ़ाने में काफी मदद मिली और उत्पादन क्षमता बढ़ाने का अवसर मिला।
फिश हब और प्रशिक्षण केंद्र की तैयारी:
भविष्य की योजनाओं के बारे में उन्होंने बताया कि अब वे एक आधुनिक फिश हब विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस केंद्र में मत्स्य पालन से संबंधित प्रयोगशाला, प्रशिक्षण सुविधाएं और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराने की योजना है। इसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए तैयार करना है।
सुजीत चौधरी का यह प्रयास दर्शाता है कि यदि युवाओं को उचित मार्गदर्शन, तकनीकी जानकारी और सरकारी योजनाओं का सहयोग मिले तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी बड़े पैमाने पर सफल उद्यम स्थापित किए जा सकते हैं। ऐसे मॉडल स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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