1 अप्रैल से इंटरनेट से जुड़े चीनी CCTV कैमरों पर लगी रोक, जानिए भारत ने ऐसा क्यों किया...
नई दिल्ली: 1 अप्रैल 2026 से भारत में इंटरनेट से जुड़े उन CCTV कैमरों की बिक्री पर प्रभावी रूप से रोक लग जाएगी, जिनमें चीनी कंपोनेंट्स का इस्तेमाल होता है। सरकार नए सर्टिफिकेशन नियम लागू कर रही है, जिनका उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना है।
नए दिशानिर्देशों के तहत, भारत में बिकने वाले सभी CCTV कैमरों को सरकार के मानकीकरण, परीक्षण और गुणवत्ता प्रमाणन (STQC) विभाग से सर्टिफिकेशन लेना अनिवार्य होगा। कंपनियों को यह स्पष्ट बताना होगा कि उनके कैमरों के मुख्य हिस्से—खासकर चिपसेट और फर्मवेयर—कहां से आते हैं। साथ ही, डिवाइस को कड़े साइबर सुरक्षा परीक्षणों से गुजरना होगा और यह साबित करना होगा कि उन्हें किसी अनधिकृत व्यक्ति द्वारा दूर से एक्सेस नहीं किया जा सकता।
किन कंपनियों पर असर पड़ेगा?
इसका मतलब यह है कि ज्यादातर चीनी कैमरों को मंजूरी नहीं मिलेगी। STQC सर्टिफिकेशन के बिना वे भारतीय बाजार में कानूनी रूप से नहीं बेचे जा सकेंगे। Hikvision, Dahua और TP-Link जैसी बड़ी चीनी कंपनियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ने की उम्मीद है। हाल तक ये कंपनियां भारत के CCTV बाजार का लगभग एक-तिहाई हिस्सा नियंत्रित करती थीं, लेकिन अब इंटरनेट से जुड़े कैमरों के सेगमेंट से लगभग बाहर हो जाएंगी।
भारत यह कदम क्यों उठा रहा है?
सरकार के अनुसार, यह फैसला राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और साइबर हमलों के जोखिम को कम करने के लिए लिया गया है। इंटरनेट से जुड़े कैमरे हैकिंग के प्रति संवेदनशील होते हैं और इनके जरिए जासूसी या डेटा लीक का खतरा हो सकता है। इसके अलावा, यह कदम महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चीनी तकनीक पर भारत की निर्भरता कम करने की दिशा में भी एक बड़ा प्रयास है।
दो साल की ट्रांजिशन अवधि खत्म
ये नियम अचानक लागू नहीं हुए हैं। इन्हें 2024 में 'Essential Requirements' के तहत घोषित किया गया था और कंपनियों को दो साल का समय दिया गया था ताकि वे गैर-चीनी कंपोनेंट्स अपनाएं या नए मानकों को पूरा करें। अब यह समय समाप्त हो चुका है और 1 अप्रैल से सख्ती से लागू होंगे।
बाजार पर क्या असर पड़ेगा?
इस नीति का भारतीय निगरानी (surveillance) उद्योग पर पहले ही बड़ा असर दिखने लगा है। अब बाजार का 80% से अधिक हिस्सा भारतीय ब्रांड्स के पास है। हालांकि, मिड और प्रीमियम सेगमेंट के उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, क्योंकि वैकल्पिक कंपोनेंट्स महंगे होते हैं।
जिनके पास पहले से चीनी कैमरे हैं, उनका क्या?
अगर आपके पास पहले से चीनी CCTV कैमरे लगे हैं, तो फिलहाल उन पर कोई सीधा प्रतिबंध नहीं है और वे सामान्य रूप से काम करते रहेंगे। हालांकि, भविष्य में सॉफ्टवेयर अपडेट, तकनीकी सपोर्ट या सुरक्षा पैच मिलने में दिक्कत आ सकती है।
सरकार का बड़ा संदेश
सरकार ने साफ कर दिया है कि वह देश के निगरानी ढांचे पर ज्यादा नियंत्रण चाहती है। इसके लिए वह अल्पकालिक खर्च और चुनौतियों को स्वीकार करने को तैयार है, ताकि लंबी अवधि में सुरक्षा और आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके।