Azam Khan Jauhar University: ED का बड़ा एक्शन, 426.46 करोड़ की संपत्ति अटैच; बाजार मूल्य 1,170 करोड़ रुपये
ED ने आजम खान से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट की रामपुर स्थित जौहर यूनिवर्सिटी की 426.46 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से अटैच की है। एजेंसी ने निर्माण खर्च, सरकारी धन और जमीन से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं को कार्रवाई का आधार बताया है।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने विश्वविद्यालय की जमीन और इमारतों से जुड़ी 426.46 करोड़ रुपये की संपत्ति को अस्थायी रूप से अटैच किया है। ED के मुताबिक, इन संपत्तियों का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये है। यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान और उनके नियंत्रण वाले ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच के तहत की गई है।
ED का आरोप है कि विश्वविद्यालय के निर्माण में सरकारी धन, निर्माण सामग्री और अन्य संसाधनों का कथित तौर पर अनुचित इस्तेमाल किया गया। जांच एजेंसी के अनुसार, परिसर की वास्तविक निर्माण लागत और ट्रस्ट की ओर से घोषित खर्च के बीच बड़ा अंतर मिला है। एजेंसी का दावा है कि इस अंतर में शामिल 426.46 करोड़ रुपये के स्रोत का संतोषजनक हिसाब नहीं दिया जा सका। हालांकि, ये जांच एजेंसी के आरोप हैं और मामले में अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही तय होगा।
PMLA के तहत जमीन और इमारतें अटैच
ED ने अपनी कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 यानी PMLA के तहत की है। अटैच की गई संपत्तियां रामपुर के सिंहानखेड़ा गांव स्थित जौहर नगर में बने विश्वविद्यालय परिसर से संबंधित हैं। इस परिसर का प्रबंधन मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के पास है। ट्रस्ट की स्थापना आजम खान ने की थी और वह इसके प्रमुख नियंत्रकों में शामिल हैं। आजम खान विश्वविद्यालय के मानद चांसलर भी हैं।
जांच की शुरुआत रामपुर के अजीमनगर थाने में दर्ज 26 प्राथमिकी (FIR) के आधार पर हुई थी। इन मामलों में आरोप लगाया गया था कि विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा किया गया। इसके अतिरिक्त, जिला प्रशासन की जांच में करीब 34 एकड़ क्षेत्र में फैली शत्रु संपत्ति के 45 भूखंडों पर कथित अवैध कब्जे का मामला भी सामने आया था।
बताया गया कि संबंधित जमीन को ट्रस्ट को पट्टे पर देने का आदेश रद्द होने के बाद भी कब्जा जारी रहा। बाद में गृह मंत्रालय के शत्रु संपत्ति अभिरक्षक ने जिला प्रशासन की मदद से जमीन का कब्जा वापस लिया। ED अब विश्वविद्यालय की संपत्तियों और उनसे जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है।
499 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई थी परिसर की लागत
ED की कार्रवाई का प्रमुख आधार विश्वविद्यालय परिसर की जमीन और इमारतों की अनुमानित लागत तथा ट्रस्ट के आयकर रिकॉर्ड में दर्ज खर्च के बीच का अंतर है।
जिला मूल्यांकन अधिकारी की 10 नवंबर 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक, विश्वविद्यालय परिसर में मौजूद 59 इमारतों के निर्माण की लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई थी। वहीं, 114 बिक्री विलेखों के माध्यम से हासिल की गई जमीन का मूल्य 4.63 करोड़ रुपये बताया गया। इस तरह जमीन और इमारतों की कुल अनुमानित लागत 499.09 करोड़ रुपये बैठती है।
इसके विपरीत, ट्रस्ट ने अपने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च दिखाया था। ED के अनुसार, इसमें शामिल 12.29 करोड़ रुपये का दान जांच में वास्तविक नहीं पाया गया। एजेंसी की गणना के मुताबिक, इस राशि को हटाने के बाद ट्रस्ट का वास्तविक निर्माण और जमीन खरीद खर्च 66.03 करोड़ रुपये रह गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि कुल लागत में से केवल 72.63 करोड़ रुपये के स्रोत का वैध हिसाब मिल पाया। शेष 426.46 करोड़ रुपये की रकम का स्रोत ट्रस्ट के पदाधिकारी साबित नहीं कर सके। इसी आधार पर ED ने इस रकम को अपराध से अर्जित आय मानते हुए संबंधित जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।
सरकारी ठेकों और निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप
ED की जांच में रामपुर के कुछ ठेकेदारों और कंपनियों के वित्तीय लेनदेन भी जांच के दायरे में आए। एजेंसी का आरोप है कि सरकारी ठेकों से प्राप्त धन और निर्माण सामग्री का इस्तेमाल विश्वविद्यालय के निर्माण में किया गया।
जांच के दौरान एक कंपनी के प्रबंध निदेशक के बयान का हवाला देते हुए ED ने दावा किया कि लोक निर्माण विभाग से लगभग 186 करोड़ रुपये के ठेके हासिल करने वाली कंपनी ने ठेका राशि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के लिए निर्माण सामग्री खरीदने में लगाया। एक अन्य फर्म के साझेदारों के बारे में भी कथित तौर पर कहा गया कि उन्होंने आजम खान के प्रभाव में काम किया था। इस फर्म की ओर से ट्रस्ट को 40 लाख रुपये का दान दिए जाने की जानकारी भी जांच में सामने आई।
ED ने PMLA की धारा 66(2) के तहत जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ साझा की थी। इसके आधार पर 13 अक्टूबर 2026 को अजीमनगर थाने में एक नई FIR दर्ज किए जाने की बात कही गई है। इसमें आजम खान, ट्रस्ट और अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप दर्ज किए गए।
सरकारी धन से बने पंडाल के स्वामित्व पर भी सवाल
जांच में विश्वविद्यालय परिसर में सरकारी धन से बने कुछ निर्माण कार्यों को लेकर भी सवाल उठे हैं। ED के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार ने परिसर में पंडाल, अन्य भवनों और अस्पताल ब्लॉक सहित विभिन्न कार्यों के लिए कुल 23.41 करोड़ रुपये मंजूर किए थे।
एजेंसी के अनुसार, वर्ष 2015 में पंडाल के निर्माण के लिए 12.16 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। उस समय जारी सरकारी आदेश में पंडाल का स्वामित्व संस्कृति विभाग के पास रहने की शर्त थी। साथ ही, इसे बेचने या हस्तांतरित करने पर रोक थी और राज्य सरकार को इसका मुफ्त इस्तेमाल करने की सुविधा मिलनी थी।
ED का आरोप है कि वर्ष 2016 में जारी एक अन्य आदेश के जरिए इन शर्तों में बदलाव किया गया। इसके बाद पंडाल का स्वामित्व विश्वविद्यालय को हस्तांतरित कर दिया गया और सरकार के मुफ्त इस्तेमाल की शर्त भी हटा दी गई। एजेंसी का कहना है कि इस प्रक्रिया से सार्वजनिक धन से निर्मित संपत्ति निजी परिसर का हिस्सा बन गई।
उस समय आजम खान राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री थे और उनके पास नगर विकास विभाग का प्रभार था। विश्वविद्यालय परिसर में कुछ निर्माण कार्य उत्तर प्रदेश जल निगम द्वारा कराए जाने की बात भी जांच में सामने आई है।
विधायक निधि और अन्य संस्थानों से मिले दान की जांच
ED के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया कि विधायक और विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से करीब 6.60 करोड़ रुपये के कई काम विश्वविद्यालय के निजी परिसर में कराए गए थे। इन कार्यों को उत्तर प्रदेश जल निगम ने पूरा किया था। एजेंसी ने इस पहलू को भी जांच का हिस्सा बनाया है।
इसके अलावा, मेरठ के दो शैक्षणिक संस्थानों से ट्रस्ट को 6.24 करोड़ रुपये का दान मिलने की जानकारी सामने आई। ED का आरोप है कि इस धनराशि के पीछे राजनीतिक प्रभाव की भूमिका थी। आयकर विभाग की ओर से ट्रस्ट का पंजीकरण रद्द किए जाने की जानकारी भी एजेंसी ने अपने बयान में दी है।
इन मामलों में वित्तीय लेनदेन, दान की वास्तविकता और सरकारी धन के उपयोग से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
तलाशी में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त
ED ने 19 अगस्त 2026 को विश्वविद्यालय और उससे जुड़े परिसरों में तलाशी अभियान चलाया था। इस दौरान एजेंसी ने इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और कथित रूप से आपत्तिजनक रिकॉर्ड जब्त किए। इसके अलावा, रामपुर पुलिस की ओर से आजम खान और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज 28 अन्य FIR को भी जांच में शामिल किए जाने की जानकारी दी गई है।
इन मामलों में वर्ष 2016 के दौरान कुछ परिवारों के मकान गिराए जाने, मारपीट, धमकी, नकदी और गहने छीनने तथा मवेशियों की कथित लूट जैसे आरोप शामिल हैं। FIR और आरोपपत्रों के अनुसार, गिराए गए मकानों का मलबा विश्वविद्यालय परिसर में ले जाने और नगर पालिका के लिए खरीदी गई सफाई मशीनरी को वहां भेजे जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र कानूनी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।
फिलहाल ED की कार्रवाई ने जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े वित्तीय मामलों को फिर चर्चा में ला दिया है। संपत्ति का अस्थायी अटैचमेंट जांच के दौरान उठाया गया कदम है। मामले में आरोपों की अंतिम वैधता और संबंधित लोगों की जिम्मेदारी का निर्धारण सक्षम अदालत की प्रक्रिया के तहत होगा।