लखनऊ, उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 10वें दीपोत्सव से पहले अयोध्या में वर्ष 2017 के बाद हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम की नगरी अपनी प्राचीन भव्यता फिर से प्राप्त कर रही है। उन्होंने दीपोत्सव को आस्था, सांस्कृतिक गौरव और विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक बताया।
योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से अयोध्या में दीपोत्सव की तैयारियों और शहर के विकास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सप्तपुरियों में प्रमुख श्री अयोध्या धाम अपने 10वें भव्य और दिव्य दीपोत्सव के स्वागत के लिए तैयार है।
2017 से पहले अयोध्या की उपेक्षा का लगाया आरोप
मुख्यमंत्री के अनुसार, इस अवसर पर सरयू नदी के तट लाखों मिट्टी के दीपों से जगमगाएंगे। रामायण के प्रसंगों को दर्शाती आकर्षक झांकियां, भव्य शोभायात्राएं और सांस्कृतिक कार्यक्रम त्रेतायुग की स्मृतियों को जीवंत करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक दीप भगवान श्रीराम के प्रति असीम श्रद्धा का प्रतीक होगा और सनातन संस्कृति की महिमा को प्रदर्शित करेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 से पहले की सरकारों पर अयोध्या की उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले भगवान श्रीराम की नगरी अव्यवस्था और उपेक्षा का सामना कर रही थी। उन्होंने रामभक्तों पर गोली चलाने की घटना और हनुमानगढ़ी मंदिर से जुड़े प्रसंग का उल्लेख करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों की आलोचना की। ये आरोप मुख्यमंत्री ने अपने राजनीतिक बयान के दौरान लगाए।
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— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 26, 2026
राम मंदिर से अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक विकास का जिक्र
योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयासों को दिया। उन्होंने कहा कि भव्य श्रीराम मंदिर, महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, विकसित रामपथ, नए घाट और आधुनिक सुविधाओं ने अयोध्या को धार्मिक आस्था और आधुनिक विकास के संगम के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने अयोध्या के सौर नगरी के रूप में उभरने का भी उल्लेख किया।
2017 में 1.71 लाख दीपों से शुरू हुआ था दीपोत्सव
मुख्यमंत्री ने दीपोत्सव की शुरुआत का जिक्र करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में 1.71 लाख दीपों से शुरू हुआ यह आयोजन आज देश और दुनिया में करोड़ों रामभक्तों की आस्था का प्रतीक बन चुका है।
उन्होंने कहा कि इस वर्ष भी श्रद्धालु दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से नया विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए तैयार हैं। दीपोत्सव अब केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि अयोध्या की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के पुनरुत्थान का माध्यम बन गया है।
सांस्कृतिक गौरव और विकसित भारत का संकल्प
योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव को उन पीढ़ियों के सपनों से जोड़ते हुए कहा कि सदियों से श्रद्धालु अयोध्या को उसके त्रेतायुगीन वैभव में देखने की कामना करते रहे हैं। उन्होंने दीप प्रज्ज्वलन को आस्था की विजय, सांस्कृतिक आत्मगौरव के जागरण और विकसित भारत के निर्माण के संकल्प का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री के संदेश के अनुसार, अयोध्या का दीपोत्सव धार्मिक परंपराओं के साथ-साथ भारत की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास की आकांक्षाओं को भी प्रदर्शित करता है।
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