यूपी चुनाव तक टल सकता है परिसीमन बिल, केंद्र के अगले कदम पर टिकी निगाहें

परिसीमन बिल पर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध जारी है। कांग्रेस सर्वदलीय बैठक और नए प्रस्ताव पर स्पष्टता मांग रही है। इस बीच चर्चा है कि सरकार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक इंतजार कर सकती है, हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।

By  Laxman October 21st 2026 06:26 PM

नई दिल्ली:  परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को लेकर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक खींचतान जारी है। संसद के मानसून सत्र का औपचारिक समापन नहीं होने और सर्वदलीय बैठक की मांग के बीच अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार परिसीमन बिल को आगे बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक इंतजार कर सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से ऐसी किसी समयसीमा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

परिसीमन बिल को लेकर सरकार की रणनीति फिलहाल स्पष्ट नहीं है। अप्रैल में इस मुद्दे पर विधेयक पारित कराने की कोशिश सफल नहीं हो पाई थी। संविधान संशोधन से जुड़े इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण उस समय सरकार को अपेक्षित सफलता नहीं मिली।

सर्वदलीय बैठक को लेकर विपक्ष के सवाल

कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे इस मुद्दे पर सरकार से लगातार जवाब मांग रहे हैं। उन्होंने 16 अक्टूबर को प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर परिसीमन बिल और संसद सत्र की स्थिति पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री ने मार्च 2026 में विभिन्न राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श किया था।

इस जवाब के बाद कांग्रेस ने सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि क्या उस बातचीत के दौरान कोई ऐसा आश्वासन दिया गया था, जिसका उल्लेख अप्रैल में पेश किए गए विधेयक में नहीं है। पार्टी का कहना है कि यदि सरकार किसी नए प्रस्ताव या बदलाव के साथ आगे बढ़ना चाहती है, तो पहले सभी संबंधित दलों को विश्वास में लिया जाना चाहिए।

कांग्रेस की ओर से मुख्य रूप से तीन सवाल उठाए गए हैं। पहला, क्या सरकार परिसीमन बिल में कोई नया प्रस्ताव शामिल करने की तैयारी कर रही है? दूसरा, सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाने से क्यों बच रही है? तीसरा, क्या सरकार दोबारा वही विधेयक पेश करने की योजना बना रही है, जबकि पहले उसे पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया था?

खरगे के अनुसार, वह इस विषय पर प्रधानमंत्री और संसदीय कार्य मंत्री को कई बार पत्र लिख चुके हैं। विपक्ष का तर्क है कि व्यापक राजनीतिक सहमति के बिना इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक विषय पर आगे बढ़ना मुश्किल हो सकता है।

सरकार ने विपक्ष पर लगाया चर्चा से बचने का आरोप

दूसरी ओर, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू का कहना है कि सरकार ने विपक्ष के साथ बातचीत करने के कई प्रयास किए। उनके मुताबिक, कांग्रेस की ओर से चर्चा के लिए समय नहीं मिलने के बाद सरकार ने अन्य राजनीतिक दलों से संपर्क करना शुरू किया।

मानसून सत्र के औपचारिक समापन को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच मतभेद हैं। रिजिजू का कहना है कि संविधान में संसद सत्र के सत्रावसान के लिए कोई निश्चित समयसीमा निर्धारित नहीं है। इसी वजह से सरकार के पास इस प्रक्रिया को लेकर तत्काल निर्णय लेने की बाध्यता नहीं है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मानसून सत्र की अंतिम बैठक 13 अगस्त को हुई थी, लेकिन सत्र का औपचारिक समापन नहीं किया गया। इस स्थिति ने राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर दिया है। विपक्ष सरकार से स्पष्ट जवाब चाहता है, जबकि सरकार का कहना है कि बातचीत के रास्ते बंद नहीं हुए हैं।

डीएमके और अन्य दलों का रुख बन सकता है निर्णायक

परिसीमन बिल पर आगे बढ़ने के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों का समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खासतौर पर डीएमके ने स्पष्ट किया है कि नए विधेयक का मसौदा देखे बिना वह अपने रुख पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं करना चाहती। इससे संकेत मिलता है कि प्रस्ताव की वास्तविक रूपरेखा सामने आने के बाद ही कुछ दल अपना रुख स्पष्ट कर सकते हैं।

वाईएसआर कांग्रेस के रुख को लेकर भी सरकार के संभावित समर्थन पर चर्चा हो रही है। ऐसे में सरकार के सामने विधेयक के लिए पर्याप्त राजनीतिक सहमति जुटाने की चुनौती बनी हुई है। यदि समर्थन को लेकर अनिश्चितता जारी रहती है, तो विधेयक को दोबारा पेश करने का फैसला आसान नहीं होगा।

क्या यूपी चुनाव के बाद आएगा फैसला?

राजनीतिक गलियारों में यह संभावना जताई जा रही है कि केंद्र सरकार परिसीमन बिल पर जल्दबाजी करने के बजाय उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव तक इंतजार कर सकती है। इस अनुमान के अनुसार, बजट सत्र के बाद भी विधेयक को आगे बढ़ाने का विकल्प खुला रह सकता है।

उत्तर प्रदेश चुनाव के परिणामों के बाद राजनीतिक समीकरणों में बदलाव आ सकता है। ऐसे में सरकार नए सिरे से समर्थन जुटाने और विधेयक की रणनीति तय करने पर विचार कर सकती है। हालांकि, यह फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं और संभावनाओं पर आधारित आकलन है, सरकार की घोषित नीति नहीं।

कुल मिलाकर, परिसीमन बिल का भविष्य अब राजनीतिक सहमति, प्रस्तावित मसौदे और सरकार के अगले कदम पर निर्भर करता दिखाई दे रहा है। जब तक सरकार विधेयक की आगे की समयसीमा और संभावित बदलावों पर स्पष्टता नहीं देती, तब तक इसके जल्द पेश होने या उत्तर प्रदेश चुनाव तक टलने को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है।

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