उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को लेकर सियासी विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र की वोटर लिस्ट में कथित गड़बड़ियों का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का दावा है कि कई मतदाताओं के EPIC नंबर समान रहने के बावजूद उनके नाम बदल दिए गए, जबकि कुछ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए और कुछ ऐसे लोगों को शामिल किया गया, जो संबंधित क्षेत्र के निवासी नहीं हैं। कांग्रेस ने इन आरोपों की जांच कराने और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर रोक लगाने की मांग की है।

लखनऊ स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में बुधवार, 21 अक्टूबर को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी नेताओं ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के आंकड़े पेश किए। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा, सांसद इमरान मसूद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने मतदाता सूची में कथित बदलावों को लेकर सवाल उठाए। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।

हालांकि, ये आंकड़े और गड़बड़ी के आरोप कांग्रेस की ओर से पेश किए गए हैं। चुनाव आयोग की ओर से इन विशिष्ट दावों पर क्या स्पष्टीकरण दिया गया है, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।

EPIC नंबर समान, लेकिन नाम बदलने का आरोप

कांग्रेस नेता राजेंद्र पाल गौतम ने दावा किया कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के EPIC नंबर और क्रम संख्या समान रखे गए, जबकि उनके नाम बदल दिए गए। EPIC नंबर मतदाता पहचान पत्र से जुड़ी विशिष्ट पहचान संख्या होती है। पार्टी का आरोप है कि एक ही पहचान संख्या के साथ नामों में बदलाव मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

गौतम के मुताबिक, इसी विधानसभा क्षेत्र में 804 वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने और लगभग 2,600 ऐसे लोगों के नाम जोड़े जाने का भी आरोप है, जो संबंधित क्षेत्र में नहीं रहते। कांग्रेस ने इन आंकड़ों को जोड़ते हुए कुल 16,554 मतों से संबंधित कथित अनियमितताओं का दावा किया है।

पार्टी का कहना है कि इन बदलावों की जांच की जानी चाहिए और यह स्पष्ट होना चाहिए कि अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद नामों तथा अन्य विवरणों में बदलाव किस प्रक्रिया के तहत किए गए। कांग्रेस ने संबंधित अधिकारियों से भी इस मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

SIR प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग

कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया को लेकर भी आपत्ति जताई। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से मामले में हस्तक्षेप करने और प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग दोहराई। राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में कथित बदलाव चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।

कांग्रेस के अनुसार, अंतिम ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद जुलाई से सितंबर के बीच बड़े पैमाने पर बदलाव किए जाने का दावा जांच के योग्य है। पार्टी ने कहा कि इन बदलावों का रिकॉर्ड सामने आना चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि नामों में परिवर्तन किस आधार पर हुए।

हालांकि, उपलब्ध सामग्री में अदालत द्वारा SIR पर रोक लगाए जाने या कांग्रेस की मांग पर कोई अंतिम न्यायिक आदेश दिए जाने की जानकारी नहीं है। इसलिए इस मांग को पार्टी की अपील के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि किसी स्वीकृत न्यायिक निर्णय के रूप में।

2022 के चुनाव परिणाम का भी दिया हवाला

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने पीलीभीत सदर सीट के पिछले विधानसभा चुनाव परिणाम का उल्लेख करते हुए कहा कि 2022 में भाजपा उम्मीदवार संजय गंगवार ने 6,930 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। कांग्रेस का तर्क है कि यदि उसके दावों के मुताबिक हजारों मतदाताओं के विवरण में अनियमितताएं हुई हैं, तो उनकी जांच जरूरी है।

श्रीनेत ने आरोप लगाया कि नामों में बदलाव के लिए किसी सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। उन्होंने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी सॉफ्टवेयर के जरिए जानबूझकर हेरफेर किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती है।

कांग्रेस ने मांग की कि संबंधित जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करें। पार्टी यह भी जानना चाहती है कि अंतिम सूची जारी होने के बाद मतदाता पहचान से जुड़े विवरणों में बदलाव किसके निर्देश पर और किस प्रक्रिया के तहत किए गए।

हर जिले में वोटर लिस्ट की जांच करेगी कांग्रेस

उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने कहा कि पार्टी राज्य के प्रत्येक जिले में मतदाता सूचियों की विस्तृत जांच कराने का अभियान चलाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उनके मुताबिक, कांग्रेस इस मुद्दे पर कानूनी सलाह भी ले रही है और संगठन के स्तर पर कार्रवाई करेगी।

सांसद इमरान मसूद ने भी मतदाताओं से अपील की कि वे अपनी पहचान संबंधी जानकारी और मतदाता सूची में दर्ज विवरणों का मिलान करें। उन्होंने कहा कि वोट की सुरक्षा केवल राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकार से जुड़ा विषय है।

मसूद ने दावा किया कि पार्टी ने केवल आरोप नहीं लगाए, बल्कि उनके समर्थन में आंकड़े भी पेश किए हैं। उन्होंने कहा कि यदि मतदाता सूची से जुड़े सवालों का समाधान नहीं हुआ, तो कांग्रेस इस मुद्दे को सड़क से लेकर संसद और अदालत तक उठाएगी।

मतदाताओं के लिए क्या जरूरी है?

इस विवाद के बीच मतदाताओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम अपनी प्रविष्टियों की जांच करना है। मतदाता सूची में नाम, EPIC नंबर और अन्य विवरण सही हैं या नहीं, इसकी पुष्टि आधिकारिक चुनावी माध्यमों से की जा सकती है। यदि किसी नागरिक को नाम गायब होने या विवरण में गलती मिलने की जानकारी मिलती है, तो उसे संबंधित निर्वाचन अधिकारी से संपर्क कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

फिलहाल पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर स्वतंत्र पुष्टि और चुनाव आयोग का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित रिकॉर्ड, बदलावों का आधिकारिक विवरण और सक्षम प्राधिकरण की जांच अहम होगी।

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर उठा यह विवाद आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है। लेकिन आरोपों की गंभीरता के साथ-साथ उनकी निष्पक्ष जांच और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालना भी उतना ही जरूरी है।