UP Voter List: पीलीभीत में 10 हजार से ज्यादा वोटर एंट्री में गड़बड़ी, CEO ने पूरे प्रदेश में जांच के दिए आदेश
पीलीभीत में मतदाता सूची की जांच के दौरान 10 हजार से अधिक ऐसी प्रविष्टियां मिलने की जानकारी सामने आई है, जिनमें जरूरी फॉर्म-8 का रिकॉर्ड नहीं था। मामले के बाद यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पूरे प्रदेश में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए हैं।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। पीलीभीत में जांच के दौरान 10 हजार से अधिक ऐसी प्रविष्टियां मिलने की जानकारी सामने आई है, जिनमें मतदाताओं का विवरण बदलने के लिए जरूरी आवेदन दर्ज नहीं था। मामले की शुरुआती जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने पूरे प्रदेश में इसी तरह की प्रविष्टियों की जांच के निर्देश दिए हैं।
इस मामले ने मतदाता सूची में दर्ज व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और उसे बदलने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। निर्वाचन अधिकारियों को अब यह पता लगाना होगा कि क्या पीलीभीत जैसी अनियमितताएं दूसरे जिलों में भी हुई हैं और यदि हुई हैं, तो इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
शिकायत से सामने आया मामला
जानकारी के मुताबिक, मामला तब सामने आया जब समाजवादी पार्टी की ओर से एक मतदाता के निर्वाचन फोटो पहचान पत्र (EPIC) में नाम और पिता का नाम बदलने की शिकायत की गई। इस संबंध में 19 तारीख को ज्ञापन मिलने के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने पीलीभीत के जिलाधिकारी से जांच कर रिपोर्ट मांगी।
शुरुआती जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद संबंधित विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज अन्य बदलावों की भी पड़ताल की गई। इस जांच में 10 हजार से अधिक ऐसी प्रविष्टियां सामने आईं, जिनके लिए निर्धारित फॉर्म-8 जमा किए जाने का रिकॉर्ड नहीं मिला।
यह मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि मतदाता सूची में किसी व्यक्ति का नाम, पता या अन्य विवरण बदलने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन जरूरी होता है। ऐसी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता की जानकारी में बदलाव सही दस्तावेजों और उचित सत्यापन के बाद ही किया जाए।
फॉर्म-8 के बिना कैसे बदली जानकारी?
निर्वाचन प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में दर्ज विवरण में सुधार या बदलाव के लिए फॉर्म-8 का इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ आवश्यक दस्तावेज जमा करने और संबंधित जानकारी का सत्यापन करने की प्रक्रिया भी होती है।
पीलीभीत में जांच के दौरान ऐसी प्रविष्टियां मिलने की बात सामने आई है, जिनमें आवश्यक आवेदन के बिना ऑनलाइन बदलाव किए गए थे। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिनवा ने इस मामले को गंभीर बताते हुए इसे केवल सामान्य गलती मानने से इनकार किया।
जांच में संबंधित वीआरसी ऑपरेटरों के साथ उन अधिकारियों की भूमिका भी देखी गई, जिन्होंने कथित तौर पर इन बदलावों को मंजूरी दी थी। इससे यह सवाल भी उठता है कि मतदाता सूची में बदलाव की ऑनलाइन प्रक्रिया के दौरान सत्यापन और निगरानी की व्यवस्था किस तरह काम कर रही थी।
अधिकारियों और ऑपरेटरों पर कार्रवाई
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 31 मई से 31 अगस्त के बीच की गई प्रविष्टियों की जांच में दो निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी भी सामने आई। संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटरों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।
जांच के बाद संबंधित कर्मचारियों को मतदाता सूची से जुड़े काम से तत्काल हटाने के निर्देश दिए गए। वीआरसी ऑपरेटरों की सेवाएं समाप्त करने के लिए प्रस्ताव भी मांगा गया है। वहीं, दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस मामले में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 30 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई किए जाने की जानकारी दी गई है। हालांकि, आरोपों और जिम्मेदारी से जुड़े अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही तय होंगे।
अब पूरे उत्तर प्रदेश में होगी जांच
पीलीभीत में मामला सामने आने के बाद निर्वाचन विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने प्रदेश के अन्य जिलों में भी उन प्रविष्टियों की जांच करने के निर्देश दिए हैं, जिनमें फॉर्म-8 और जरूरी दस्तावेजों के बिना मतदाता की जानकारी बदले जाने की आशंका है।
इस जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश होगी कि क्या अन्य क्षेत्रों में भी निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ है। साथ ही, संदिग्ध प्रविष्टियों की पहचान कर आवश्यक सुधार और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकेगी।
पूरे प्रदेश में जांच के आदेश का उद्देश्य मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनाए रखना है। मतदाता सूची चुनावी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए उसमें नाम और अन्य व्यक्तिगत विवरणों का सही होना जरूरी है।
मतदाता सूची की पारदर्शिता पर बढ़ा जोर
पीलीभीत का मामला निर्वाचन व्यवस्था में जवाबदेही और डिजिटल रिकॉर्ड की निगरानी की अहमियत को सामने लाता है। मतदाताओं की जानकारी में बदलाव के लिए तय नियमों का पालन न होने से लोगों के पहचान संबंधी विवरण प्रभावित हो सकते हैं।
अब प्रदेशव्यापी जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मामला केवल पीलीभीत तक सीमित है या अन्य जिलों में भी ऐसी अनियमितताएं हुई हैं। जांच के नतीजे और निर्वाचन विभाग की आगे की कार्रवाई इस मामले में महत्वपूर्ण होंगे।