बलूचिस्तान में कथित हिरासत में मौत का मामला, अंतरराष्ट्रीय जांच की उठी मांग...

द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में पिछले दो दशकों से जबरन गुमशुदगी एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। स्थानीय मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने समय-समय पर ऐसी रिपोर्टें जारी की हैं, जिनमें पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों पर जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का दृष्टिकोण इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है।

By  Preeti Kamal July 2nd 2026 05:05 PM

बलूचिस्तान, पाकिस्तान: पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में 15 वर्षीय एक किशोर की कथित हिरासत के बाद मौत का मामला सामने आने के बाद जबरन गुमशुदगी (एनफोर्स्ड डिसअपीयरेंस) और मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर चिंताएं एक बार फिर गहरा गई हैं। यह दावा बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने किया है, जिसकी रिपोर्ट द बलूचिस्तान पोस्ट ने प्रकाशित की है।

रिपोर्ट के अनुसार, मृतक की पहचान फ़ैज़ मोहम्मद के 15 वर्षीय बेटे के रूप में की गई है, जो पंजगुर जिले के चितकान क्षेत्र का निवासी था। बलूच यकजेहती कमेटी का आरोप है कि किशोर को रमजान के दौरान कथित तौर पर उठा लिया गया था और वह लगभग तीन महीने तक लापता रहा। इसके बाद 29 जून को उसका शव एयरपोर्ट रोड पर मिलने का दावा किया गया।

किशोर की हत्या तथाकथित "डेथ स्क्वॉड" द्वारा की गई

संगठन का आरोप है कि किशोर की हत्या तथाकथित "डेथ स्क्वॉड" द्वारा की गई। बलूच कार्यकर्ता इस शब्द का इस्तेमाल कथित तौर पर राज्य समर्थित सशस्त्र समूहों के लिए करते हैं। बलूच यकजेहती कमेटी ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे जबरन गुमशुदगी के बाद न्यायेतर हत्या (एक्स्ट्राज्यूडिशियल किलिंग) का एक और मामला बताया है।

जून महीने में यह ऐसा 10वां मामला है

संगठन ने सवाल उठाया कि उसके नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है, जबकि उसके आरोपों के अनुसार ऐसी हत्याओं के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही। समिति ने अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों और वैश्विक समुदाय से हस्तक्षेप करने तथा बलूचिस्तान में बिगड़ती मानवाधिकार स्थिति की जांच करने की अपील की है।

रिपोर्ट के मुताबिक, बलूच यकजेहती कमेटी का दावा है कि जून महीने में यह ऐसा 10वां मामला है, जिसमें कथित तौर पर जबरन गुमशुदा किए गए व्यक्ति बाद में मृत पाए गए। संगठन का आरोप है कि कई मामलों में शवों पर यातना के निशान मिले या उन्हें कथित फर्जी मुठभेड़ों में मारे जाने का दावा किया गया। इन मामलों में लोगों के लापता रहने की अवधि कुछ दिनों से लेकर कई महीनों तक बताई गई है।

पिछले दो दशकों से जबरन गुमशुदगी एक गंभीर मुद्दा

द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में पिछले दो दशकों से जबरन गुमशुदगी एक गंभीर मुद्दा बना हुआ है। स्थानीय मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने समय-समय पर ऐसी रिपोर्टें जारी की हैं, जिनमें पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों पर जबरन गुमशुदगी और न्यायेतर हत्याओं के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का दृष्टिकोण इस रिपोर्ट में शामिल नहीं है।

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