ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ा: ट्रंप बोले- सीजफायर खत्म, तेहरान पर साधा निशाना
होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्धविराम अब प्रभावी नहीं रहा। दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां तेज होने से पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात तनावपूर्ण हो गए हैं।
पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव गहराता दिखाई दे रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में हालिया घटनाक्रम के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव तेज हो गया है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ईरान के साथ लागू युद्धविराम (सीजफायर) अब समाप्त हो चुका है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत की संभावनाएं पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं।
ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी सेना ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर कार्रवाई की है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में उठाया गया है।
ट्रंप बोले- डील में समय बर्बाद हो रहा है
तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि उनकी नजर में ईरान के साथ युद्धविराम अब प्रभावी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा हालात में तेहरान सरकार के साथ समझौते की कोशिशें समय की बर्बादी साबित हो रही हैं।
हालांकि उन्होंने यह संकेत भी दिया कि कूटनीतिक संवाद पूरी तरह बंद नहीं हुआ है और भविष्य में बातचीत की संभावना बनी रह सकती है।
अमेरिका ने कई सैन्य ठिकानों पर की कार्रवाई
अमेरिकी सैन्य अधिकारियों के अनुसार, हालिया ऑपरेशन के दौरान ईरान में 80 से अधिक सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इन लक्ष्यों में वायु रक्षा प्रणाली, कमांड एवं कंट्रोल सेंटर, तटीय रडार स्टेशन, जहाज-रोधी मिसाइल सिस्टम और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की कई तेज रफ्तार नौकाएं शामिल थीं।
अमेरिका का दावा है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर संभावित हमलों को रोकना है।
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया
दूसरी ओर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए निशाना बनाया।
ईरानी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा युद्धविराम का उल्लंघन करने के जवाब में की गई। साथ ही ईरान ने यह दावा भी किया कि उसने एक अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को मार गिराया है।
हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
हालिया घटनाक्रम की शुरुआत होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यावसायिक तेल टैंकरों पर हुए हमलों के बाद हुई। इस मार्ग को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा व्यापार गलियारों में गिना जाता है।
अमेरिका ने इन घटनाओं के बाद ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की और तेहरान को तेल निर्यात से जुड़ी कुछ छूटों को भी समाप्त कर दिया। इसके बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच टकराव इसी तरह जारी रहा तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बरकरार
हालांकि दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद लगाए हुए है। कई देशों ने संयम बरतने और तनाव कम करने की अपील की है ताकि व्यापक सैन्य संघर्ष की स्थिति से बचा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में स्थिरता बनाए रखना केवल क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।