नेपाल में भोटे कोशी का कहर, 8 की मौत और 33 सुरक्षाकर्मी लापता; 430 MW बिजली उत्पादन प्रभावित
नेपाल में भोटे कोशी नदी की अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 8 लोगों की मौत और 33 सुरक्षाकर्मियों के लापता होने की जानकारी है। पुल, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि नेपाली सेना का रेस्क्यू अभियान जारी है।
काठमांडू: नेपाल में बुधवार को तिब्बत से आने वाली भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों के कई इलाके बाढ़ की चपेट में आ गए। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक अब तक 8 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 33 सुरक्षाकर्मी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
बाढ़ से कई घर, सड़कें और पुल बह गए हैं। बिजली परियोजनाओं को भी भारी नुकसान पहुंचा है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार करीब 430 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। स्थिति को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाई है।
60 किलोमीटर के इलाके में बाढ़ का असर
भोटे कोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है और रसुवा में त्रिशूली नदी से मिलती है। अचानक बढ़े जलस्तर ने तिब्बत के जिलोंग से लेकर रसुवा, नुवाकोट और धादिंग तक करीब 60 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में तबाही मचाई।
रसुवा के तिमुरे और स्याप्रू बेसी सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बताए जा रहे हैं। कई बस्तियों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा है। क्षेत्र में नदी का जलस्तर असामान्य रूप से बढ़ने के बाद प्रशासन ने लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी।
त्रिशुली हाई स्कूल, जिसे इलाके के पुराने और प्रमुख स्कूलों में गिना जाता है, भी बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। क्षेत्र का संपर्क कई स्थानों पर टूट गया है।
33 सुरक्षाकर्मी समेत कई लोग लापता
बाढ़ के बाद राहत एवं बचाव एजेंसियों ने लापता लोगों की तलाश शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक रसुवा में नेपाल पुलिस के 26 जवान और सशस्त्र पुलिस बल के 7 जवान लापता हैं।
इसके अलावा तिमुरे स्थित रसुवा सीमा शुल्क कार्यालय के 14 कर्मचारी भी लापता बताए गए हैं। इनमें 11 स्थायी और 3 संविदा कर्मचारी शामिल हैं।
अब तक आठ शव बरामद होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि प्रभावित इलाकों में संपर्क बाधित होने के कारण हताहतों और नुकसान का अंतिम आंकड़ा अभी स्पष्ट नहीं है।
हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू, कम से कम 17 लोग बचाए गए
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने के लिए नेपाली सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियां अभियान चला रही हैं। सेना के हेलिकॉप्टरों की मदद से अब तक कम से कम 17 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।
इनमें छह लोगों को स्याप्रू बेसी, दो को मैलुंग और चार को धुंचे से बचाए जाने की जानकारी दी गई है। कुछ अन्य लोगों को बचाकर बिदुर नगरपालिका के चक्रदेव अस्पताल में भर्ती कराया गया।
प्रशासन ने खोज और बचाव अभियान के लिए चार सैन्य हेलिकॉप्टरों के साथ निजी हेलिकॉप्टरों को भी लगाया है।
पुल और सड़कें बहने से संपर्क टूटा
बाढ़ की तेज धारा में कई पुल बह गए हैं। त्रिशूली नदी पर बने कम से कम आधा दर्जन पुलों के क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। मालेखु क्षेत्र के पुलों को भी नुकसान पहुंचा है।
नुवाकोट के त्रिशूली बाजार के पास करीब 60 घरों के बहने की प्रारंभिक जानकारी है। दो मोटर योग्य पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं और कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है। त्रिशूली अस्पताल तक पहुंचने वाली सड़क भी प्रभावित हुई है।
पुलों और सड़कों के टूटने से चितवन और पोखरा जैसे महत्वपूर्ण पर्यटन क्षेत्रों की ओर जाने वाले मार्गों पर भी असर पड़ा है।
430 MW बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित
बाढ़ का असर नेपाल के ऊर्जा क्षेत्र पर भी पड़ा है। शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक करीब 430 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है।
त्रिशूली और देवीघाट जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा 25 मेगावाट क्षमता वाले सौर ऊर्जा संयंत्र के तीन ब्लॉक और एक सबस्टेशन भी बाढ़ की चपेट में आए हैं।
यह नुकसान नेपाल की कुल करीब 3.2 गीगावाट जलविद्युत क्षमता के मुकाबले महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
GLOF की संभावना की भी जांच
अचानक आई बाढ़ के कारणों को लेकर जांच जारी है। अधिकारियों के मुताबिक पिछले 24 घंटे में रसुवा में सात मिलीमीटर से भी कम बारिश दर्ज की गई थी। ऐसे में अचानक नदी का जलस्तर बढ़ने के पीछे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) की संभावना की जांच की जा रही है।
प्रशासन को चीन की ओर से मिली जानकारी के अनुसार भोटे कोशी का जलस्तर अब कम हो रहा है, लेकिन अधिकारियों ने आगे अचानक बाढ़ आने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया है।
पिछले साल भी भोटे कोशी में एक घातक बाढ़ आई थी, जिसका संबंध तिब्बत में ग्लेशियर के ऊपर बनी झील के अचानक खाली होने से बताया गया था।
चीन की सीमा पर भी तबाही
नेपाल के साथ लगती चीन की सीमा पर भी प्राकृतिक आपदा का असर देखने को मिला है। चीनी सरकारी समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में भूस्खलन से कई लोगों के मारे जाने या लापता होने की आशंका है।
ग्यिरोंग बंदरगाह के आसपास सड़क, संचार और बिजली आपूर्ति प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है। चीन की ओर भी खोज एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश तेज करने और संभावित दूसरी आपदाओं को रोकने के लिए निगरानी तथा पूर्व चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य व्यवस्था भी अलर्ट पर
आपदा के बाद नेपाल में स्वास्थ्य सेवाओं को भी तैयार रखा गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने काठमांडू के बीर अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में 100 आपातकालीन बेड आरक्षित किए हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से करीब 1,000 लोगों के लिए दवाएं और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। आपात स्थिति से निपटने के लिए टेंट और मेडिकल टीमों को भी तैयार रखा गया है।
फिलहाल नेपाल सेना, पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां राहत एवं बचाव अभियान में जुटी हैं। प्रभावित इलाकों में संपर्क बहाल करने और लापता लोगों की तलाश को प्राथमिकता दी जा रही है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना और नदी के दोबारा उफान की आशंका के बीच लोगों को सुरक्षित रखना है।