पाकिस्तान के पंजाब में बिजली संकट पर बढ़ा जनाक्रोश, घंटों तक अंधेरे में रहने को मजबूर लोग

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भीषण गर्मी के कारण तकनीकी खराबियां बढ़ गई हैं। डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी (डीएचए) क्षेत्र के कुछ ग्रिड स्टेशनों को बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।

By  Preeti Kamal July 3rd 2026 04:10 PM

लाहौर, पाकिस्तान: भीषण गर्मी के बीच पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में अघोषित बिजली कटौती ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। लगातार हो रही बिजली कटौती के कारण आम जनता में नाराजगी बढ़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार बिजली की पर्याप्त आपूर्ति का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। यह जानकारी द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, लाहौर सहित कई शहरों में घरों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और बच्चों तथा बुजुर्गों सहित संवेदनशील वर्गों को भीषण गर्मी के बीच घंटों बिना बिजली के रहना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं ने यह भी शिकायत की कि बार-बार होने वाले वोल्टेज उतार-चढ़ाव और अचानक बिजली गुल होने से एयर कंडीशनर, रेफ्रिजरेटर, टेलीविजन और पानी के पंप जैसे घरेलू उपकरण खराब हो रहे हैं। इससे पहले से महंगी बिजली का बोझ झेल रहे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ रहा है।

आधिकारिक इनकार के बावजूद अघोषित लोड शेडिंग जारी

लाहौर के टाउनशिप, ग्रीन टाउन, गुलबर्ग और गार्डन टाउन सहित कई इलाकों के लोगों ने बार-बार बिजली बाधित होने, कम वोल्टेज और आपूर्ति बहाल होने में देरी की शिकायत की। लाहौर इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी (लेस्को) के अधीन आने वाले अन्य क्षेत्रों से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आई हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि आधिकारिक इनकार के बावजूद अघोषित लोड शेडिंग जारी है।

हालांकि, लेस्को का कहना है कि लाहौर में न तो घोषित और न ही अघोषित लोड शेडिंग की जा रही है। कंपनी के अनुसार, करीब 4,200 मेगावाट बिजली की मांग के बराबर आपूर्ति की जा रही है। कंपनी ने अस्थायी बिजली बाधित होने का कारण रखरखाव कार्य, अधिक लाइन लॉस वाले फीडर और तकनीकी कारणों को बताया है।

बिजली की मांग 4,750 मेगावाट से अधिक पहुंच गई

वहीं, द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, अलग-अलग रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पंजाब में 500 से 800 मेगावाट तक बिजली की कमी बनी हुई है। बताया गया कि बिजली की मांग 4,750 मेगावाट से अधिक पहुंच गई है, जबकि नेशनल पावर कंट्रोल सेंटर से लगभग 4,200 मेगावाट ही आपूर्ति मिल रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भीषण गर्मी के कारण तकनीकी खराबियां बढ़ गई हैं। डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी (डीएचए) क्षेत्र के कुछ ग्रिड स्टेशनों को बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा।

इसके अलावा ट्रांसफॉर्मर खराब होने और तकनीकी कर्मचारियों की कमी ने भी स्थिति को और गंभीर बना दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम और रात के समय हालात और खराब हो जाते हैं, क्योंकि उस समय सौर ऊर्जा प्रणाली से बैकअप नहीं मिल पाता। ग्रामीण और उपनगरीय इलाकों के लोगों ने आरोप लगाया कि कई गांवों में छह घंटे से अधिक समय तक बिजली कटौती की जा रही है।

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