नई दिल्ली: नौकरीपेशा लोगों के लिए साल 2027 में वेतन बढ़ोतरी को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। एऑन (Aon) के सैलरी सर्वे के अनुसार, भारतीय कंपनियां अगले साल कर्मचारियों की सैलरी में औसतन 9.1% की बढ़ोतरी कर सकती हैं। यह अनुमान 2026 में दर्ज 9% की वृद्धि के करीब है। हालांकि, अलग-अलग उद्योगों में वेतन बढ़ने की दर समान नहीं रहने वाली है। वित्तीय सेवाओं, ऊर्जा और रियल एस्टेट से जुड़े क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारियों को अपेक्षाकृत बेहतर इंक्रीमेंट मिलने की संभावना है।

एऑन के  Annual Salary Increase and Turnover Survey 2026-27  में 45 उद्योगों की 1,200 से अधिक कंपनियों को शामिल किया गया है। सर्वे के मुताबिक, कंपनियां एक तरफ प्रतिभाशाली कर्मचारियों को अपने साथ बनाए रखना चाहती हैं, वहीं दूसरी ओर वेतन और कर्मचारियों से जुड़ी लागत पर भी नियंत्रण रखने की कोशिश कर रही हैं।

NBFC सेक्टर में सबसे ज्यादा सैलरी बढ़ने का अनुमान

सर्वे में नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों (NBFC) के कर्मचारियों के लिए सबसे ज्यादा 10.1% वेतन वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। इसके बाद ऊर्जा क्षेत्र में 9.9% और रियल एस्टेट तथा इंफ्रास्ट्रक्चर में 9.8% इंक्रीमेंट की संभावना जताई गई है।

फंड्स और एसेट मैनेजमेंट तथा लाइफ साइंसेज सेक्टर में वेतन 9.6% बढ़ सकता है। ऑटोमोबाइल और व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग में 9.5%, जबकि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) में 9.4% की बढ़ोतरी का अनुमान है। इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में यह दर 9.3% रह सकती है।

FMCG सेक्टर में औसतन 9.1% वेतन वृद्धि का अनुमान है। बैंकिंग में 8.5% और केमिकल उद्योग में 8% इंक्रीमेंट की संभावना जताई गई है। इसके मुकाबले टेक्नोलॉजी कंसल्टिंग और सर्विसेज सेक्टर में सबसे कम 6.6% वेतन बढ़ोतरी का अनुमान है।

ये आंकड़े सर्वे के अनुमान हैं। किसी कर्मचारी को वास्तव में कितना इंक्रीमेंट मिलेगा, यह उसकी भूमिका, प्रदर्शन, कंपनी की नीति और संबंधित उद्योग की परिस्थितियों पर भी निर्भर करेगा।

कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर बढ़ी

सैलरी बढ़ोतरी के साथ कंपनियों के सामने कर्मचारियों को बनाए रखने की चुनौती भी बढ़ रही है। सर्वे के मुताबिक, भारत में कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने की दर 2025 में 16.2% थी, जो 2026 में बढ़कर 18% हो गई। इससे पहले 2024 में यह दर 17.1% दर्ज की गई थी।

दूसरी ओर, कंपनियों की ओर से कर्मचारियों को नौकरी से हटाने की दर भी बढ़ी है। सर्वे में यह आंकड़ा 2025 के 3.4% से बढ़कर 2026 में 4% बताया गया है। ये रुझान संकेत देते हैं कि कंपनियां नियुक्तियों, कर्मचारियों को बनाए रखने और वर्कफोर्स की लागत को लेकर ज्यादा सतर्क हैं।

ऐसे माहौल में वेतन बढ़ोतरी के अलावा काम का अवसर, करियर में आगे बढ़ने की संभावना और नई तकनीकी क्षमताएं भी कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

महंगाई के बाद कितनी बढ़ेगी असली कमाई?

सैलरी में 9.1% की बढ़ोतरी का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों की खरीदारी करने की क्षमता भी उतनी ही बढ़ जाएगी। वास्तविक लाभ समझने के लिए महंगाई के असर को देखना जरूरी है।

सर्वे के अनुसार, महंगाई को समायोजित करने के बाद वास्तविक वेतन वृद्धि 2026 में 4.3% रहने का अनुमान था, जबकि 2027 के लिए इसे 5.1% बताया गया है। इसका अर्थ है कि कीमतों में बढ़ोतरी का असर घटाने के बाद कर्मचारियों की आय में होने वाला वास्तविक लाभ कुल इंक्रीमेंट से कम रह सकता है।

सर्वे में शामिल 60% कंपनियों को वित्त वर्ष 2026-27 में अपनी आय में 5% से अधिक वृद्धि की उम्मीद है। वहीं, 37% कंपनियों ने दोहरे अंकों में राजस्व वृद्धि का अनुमान लगाया है। इसके अलावा, 62% कंपनियां 9% से अधिक वेतन बढ़ोतरी के लिए बजट तैयार कर रही हैं।

AI स्किल्स वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ी

वेतन और नियुक्तियों के रुझानों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की भूमिका भी बढ़ रही है। सर्वे के मुताबिक, AI उत्पादकता टूल्स इस्तेमाल करने वाली कंपनियों का अनुपात 2025 के 46.1% से बढ़कर 2026 में 56% हो गया।

करीब 60% कंपनियां कर्मचारियों की स्किल्स बेहतर करने यानी अपस्किलिंग पर ध्यान दे रही हैं। AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस से जुड़ी भूमिकाओं में काम करने वाले प्रतिभाशाली कर्मचारियों के लिए टैलेंट प्रीमियम में 2025 की तुलना में लगभग 10% वृद्धि बताई गई है।

इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां अब केवल कर्मचारियों की संख्या या वेतन बजट पर नहीं, बल्कि उनकी तकनीकी दक्षता पर भी निवेश कर रही हैं। नई तकनीकों की जानकारी रखने वाले कर्मचारियों के लिए यह बेहतर अवसर पैदा कर सकता है, हालांकि इसका लाभ कौशल और नौकरी की मांग के अनुसार अलग-अलग होगा।

वेज कोड से बढ़ सकती है कंपनियों की लागत

सर्वे में वेज कोड से जुड़े अनुपालन और संभावित खर्च का भी आकलन किया गया है। एऑन के अनुसार, 65.4% कंपनियां पहले से अनुपालन कर रही हैं, जबकि 20.9% कंपनियों को अगले छह महीनों में इसके लिए तैयार होने की उम्मीद है।

सर्वे में 42.8% कंपनियों ने अनुमान लगाया कि वेज कोड के कारण उनकी पेरोल लागत कम से कम 1% बढ़ सकती है। इससे कंपनियों के कुल कर्मचारी खर्च और भविष्य के वेतन बजट पर असर पड़ने की संभावना है।

2027 में इंक्रीमेंट के लिए सेक्टर और स्किल्स अहम

कुल मिलाकर, 2027 में भारतीय कंपनियों में औसतन 9.1% वेतन वृद्धि का अनुमान नौकरीपेशा लोगों के लिए सकारात्मक संकेत है। हालांकि, सभी कर्मचारियों को एक जैसी बढ़ोतरी मिलने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। NBFC और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में अनुमानित इंक्रीमेंट अधिक है, जबकि कुछ तकनीकी सेवा क्षेत्रों में वृद्धि अपेक्षाकृत कम रह सकती है।

कर्मचारियों के लिए अपने उद्योग की मांग, प्रदर्शन और नई तकनीकी क्षमताओं को बेहतर बनाना महत्वपूर्ण रहेगा। साथ ही, वास्तविक आर्थिक लाभ समझने के लिए महंगाई और अन्य खर्चों को ध्यान में रखना भी जरूरी है।