नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने शनिवार को मेदांता अस्पताल में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी और उनके आईसीयू के बाहर तैनाती पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि अगर अदालत साफ कर चुकी है कि सोनम वांगचुक हिरासत में नहीं हैं, तो पुलिस लोगों को उनसे मिलने से किस अधिकार के तहत रोक रही है? एक्स पर पोस्ट करते हुए गीतांजलि जे. आंगमो ने कहा, “सफदरजंग से लेकर अब मेदांता तक, हर जगह पुलिस मौजूद है। मुख्य गेट पर, रिसेप्शन पर, लिफ्ट के पास और सोनम वांगचुक के आईसीयू के बाहर। वे तय कर रहे हैं कि कौन उनसे मिल सकता है और कौन नहीं।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह हिरासत में नहीं हैं, तो यह सब किस अधिकार के तहत हो रहा है? एक प्रबुद्ध लोकतंत्र में पुलिस की भूमिका नागरिकों की रक्षा करना और कानून का पालन सुनिश्चित करना है या सत्ता में बैठे लोगों की ओर से नागरिकों को नियंत्रित करना? ये ऐसे सवाल हैं जो हर भारतीय को पूछने चाहिए।” सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी थी। यह फैसला केंद्र सरकार की ओर से नीट परीक्षा और देश की प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था में व्यापक सुधार को लेकर लिखित आश्वासन मिलने के बाद लिया गया।

आंगमो ने की लोगों से पति के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की अपील

इससे पहले शुक्रवार को गीतांजलि जे. आंगमो ने लोगों से अपने पति के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि 26 दिनों की भूख हड़ताल के दौरान सोनम वांगचुक का 11 किलोग्राम वजन कम हुआ, जिसमें मांसपेशियों का वजन भी शामिल है और फिलहाल वह आईसीयू में भर्ती हैं। उन्होंने कहा था, “सोनम वांगचुक की आलोचना करने से पहले एक पल रुकिए और सोचिए कि 26 दिनों तक अपने से बड़े उद्देश्य के लिए उपवास करने का साहस क्या होता है। आज वह आईसीयू में हैं। उन्होंने आराम की जगह त्याग को चुना और इस दौरान 11 किलोग्राम वजन गंवाया, जिसमें मांसपेशियों का वजन भी शामिल है।”

सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल खत्म करने के फैसले पर दिए जवाब

शुक्रवार को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने अपनी भूख हड़ताल खत्म करने के फैसले पर सवाल उठाने वाले आलोचकों को भी जवाब दिया। उन्होंने कहा कि अपनी प्रतिबद्धता साबित करने के लिए उन्हें किसी से “चरित्र प्रमाणपत्र” लेने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा, “छात्रों के लिए 26 दिनों तक उपवास करने के बाद, 11 किलोग्राम वजन कम करने के बाद, जिसमें मांसपेशियों का वजन भी शामिल है, और जब मेरे अंगों और दिमाग को स्थायी नुकसान का खतरा पैदा हो गया था… क्या मुझे किसी से यह चरित्र प्रमाणपत्र लेना होगा कि मेरा उपवास कितना पवित्र था, मैंने इसे किसके हाथों खत्म किया या मैंने कोई समझौता किया या नहीं?”

"प्रिय दिल्ली पुलिस, आप जो करना चाहते हैं कर लीजिए"

सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में मेदांता अस्पताल में अपनी भूख हड़ताल खत्म की। इस बीच कॉकरेच जनता पार्टी (सीजेपी) ने कहा है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक उसका आंदोलन जारी रहेगा। इससे पहले सीजेपी कार्यकर्ता आशुतोष रांका ने भी आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल पर लोगों को खाना भेजने और प्रदर्शनकारियों की मदद करने से रोक रही है।

आशुतोष रांका ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा, “प्रिय दिल्ली पुलिस, आप जो करना चाहते हैं कर लीजिए। आप लोगों को जंतर-मंतर आने से नहीं रोक सकते। आप लोगों को खाना खाने से नहीं रोक सकते। आप हमें मदद मिलने से नहीं रोक सकते। और सबसे महत्वपूर्ण बात, आप धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को नहीं रोक सकते। वह इस्तीफा देंगे।” शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ करीब दो घंटे चली बैठक के बाद सीजेपी प्रतिनिधियों ने दावा किया था कि सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विचार करने के लिए शनिवार दोपहर तक का समय मांगा है।