पश्चिम एशिया तनाव के बीच सोना-चांदी 7% से ज्यादा लुढ़के, मजबूत डॉलर से निवेशकों का रुख बदला...
मुंबई, महाराष्ट्र: पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक आर्थिक चिंताओं और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के बीच सोमवार को घरेलू बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में 7 प्रतिशत से अधिक की तेज गिरावट देखी गई। मजबूत डॉलर के कारण निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं से हटता नजर आया। सोने की कीमतों में सत्र के दौरान भारी गिरावट आई।
यह शुरुआती कारोबार में 1,40,158 रुपये से गिरकर 1,29,595 रुपये तक पहुंच गया और फिलहाल करीब 1,34,000 रुपये के आसपास कारोबार कर रहा है, जो 7 प्रतिशत से अधिक की गिरावट को दर्शाता है। चांदी की कीमतों में भी इसी तरह का रुझान देखने को मिला। यह 7 प्रतिशत से ज्यादा गिरकर 2,09,797 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई, जबकि दिन में यह 1,99,643 रुपये के निचले स्तर तक गई, जिससे बाजार में उच्च उतार-चढ़ाव का संकेत मिलता है।
सोने की कीमतों में आई गिरावट
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे बढ़ती महंगाई की चिंताएं, ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद और मजबूत डॉलर जैसे कई कारण हैं। कामा ज्वेलरी के प्रबंध निदेशक कॉलिन शाह ने कहा कि सोने की कीमतों में आई भारी गिरावट पश्चिम एशिया में जारी तनाव का ही एक असर है। उन्होंने कहा, “तेल आपूर्ति में बाधा के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जिसे महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारण के रूप में देखा जा रहा है। इससे केंद्रीय बैंकों में सतर्कता बढ़ेगी और ब्याज दरें बढ़ने की संभावना है, जिसका सीधा असर खपत पर पड़ेगा।”
इसके अलावा, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती निवेशकों को सोने से दूर कर रही है।हालांकि लंबी अवधि में सोने का नजरिया सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन इस संघर्ष के कारण वैश्विक और घरेलू अर्थव्यवस्थाओं पर असर पड़ेगा और जेम्स व ज्वेलरी एक्सपोर्ट सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।
सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है
मानव मोदी ने कहा कि महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण सोने की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक बाधा आने की आशंका है, जिससे महंगाई बढ़ने का डर और गहरा गया है। उन्होंने कहा कि अब बाजार को उम्मीद है कि तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहने पर केंद्रीय बैंक सख्त रुख अपना सकते हैं, जिससे बिना ब्याज वाले निवेश जैसे सोने की आकर्षण क्षमता कम हो जाती है।
मानव मोदी ने यह भी बताया कि पहले जहां बाजार में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद थी, अब रुख बदलकर दरों में ठहराव या हल्की बढ़ोतरी की संभावना देखी जा रही है। कुल मिलाकर, कीमती धातुओं की कीमतों में यह तेज गिरावट वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों, ब्याज दरों की उम्मीदों और भू-राजनीतिक तनाव के निवेशकों के रुख पर पड़ रहे असर को दर्शाती है।