दिवाली तक सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग, व्यापारियों ने बताया त्योहारों का अहम समय

दिवाली से पहले दिल्ली के व्यापारियों ने सेंट्रल दिल्ली में भाई दूज तक प्रदर्शन रोकने की मांग की है। CTI अध्यक्ष बृजेश गोयल ने बाजारों में यातायात और माल की आवाजाही सामान्य रखने के लिए अलग-अलग स्थायी Protest Zones बनाने का सुझाव दिया है।

By  Laxman November 3rd 2026 12:38 PM

दिल्ली में दिवाली और उससे जुड़े त्योहारों से पहले व्यापारिक गतिविधियों को सुचारू बनाए रखने की मांग तेज हो गई है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने प्रशासन से अपील की है कि भाई दूज तक सेंट्रल दिल्ली में किसी भी तरह के प्रदर्शन और रैली की अनुमति न दी जाए। व्यापारियों का कहना है कि त्योहारों के दौरान बाजारों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ती है और ऐसे समय में विरोध-प्रदर्शनों के कारण यातायात, पार्किंग तथा सामान की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

CTI के अध्यक्ष बृजेश गोयल की ओर से इस संबंध में सोशल मीडिया पर मांग रखी गई है। उनका कहना है कि त्योहारों के दौरान व्यापारियों को बिना किसी बाधा के कारोबार करने का अवसर मिलना चाहिए। खासतौर पर सेंट्रल दिल्ली के प्रमुख बाजारों में माल की सप्लाई और ग्राहकों की आवाजाही सामान्य रहनी जरूरी है।

त्योहारों में कारोबार पर असर की चिंता

CTI के मुताबिक, आने वाले दिनों में दिल्ली के व्यापारियों के लिए काफी महत्वपूर्ण त्योहार हैं। संगठन ने बताया कि 6 नवंबर को धनतेरस, 8 नवंबर को दिवाली और 11 नवंबर को भाई दूज मनाया जाएगा। इन त्योहारों के दौरान बाजारों में खरीदारी का दबाव काफी बढ़ जाता है।

व्यापारियों का दावा है कि सालाना कारोबार का लगभग 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा इसी त्योहारी अवधि में होता है। ऐसे में यदि बाजारों के आसपास प्रदर्शन, रैलियां या राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, तो ग्राहकों को दुकानों तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है। इसके अलावा माल से भरे वाहनों की आवाजाही और पार्किंग व्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका है।

संगठन का मानना है कि प्रशासन को इस अवधि में बाजारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यातायात और सुरक्षा व्यवस्था तैयार करनी चाहिए।

सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शन रोकने की अपील

CTI ने मांग की है कि भाई दूज तक सेंट्रल दिल्ली में प्रदर्शन और रैलियों की अनुमति न दी जाए। संगठन का कहना है कि इससे त्योहारों के दौरान बाजारों में सामान्य गतिविधियां जारी रह सकेंगी और व्यापारियों को राहत मिलेगी।

व्यापारियों के मुताबिक, त्योहारों के समय ग्राहकों की संख्या बढ़ने के कारण पार्किंग की उपलब्धता पहले से ही चुनौती बनी रहती है। यदि इसी दौरान किसी बड़े प्रदर्शन के कारण सड़कें बंद होती हैं या यातायात का रूट बदला जाता है, तो खरीदारी के लिए आने वाले लोगों को अतिरिक्त परेशानी हो सकती है।

दिल्ली में स्थायी Protest Zones बनाने का सुझाव

CTI ने केवल त्योहारों तक सीमित मांग नहीं रखी है, बल्कि भविष्य में होने वाले बड़े राजनीतिक प्रदर्शनों और रैलियों के लिए अलग स्थान तय करने का सुझाव भी दिया है। संगठन के अनुसार, दिल्ली के बाहरी इलाकों में बुराड़ी, अलीपुर, जसोला और यमुना खादर जैसे स्थानों को स्थायी प्रदर्शन क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।

इस व्यवस्था से राजनीतिक दलों और संगठनों को अपनी बात रखने के लिए निर्धारित जगह मिलेगी। वहीं, शहर के व्यस्त व्यापारिक इलाकों और प्रमुख बाजारों में यातायात तथा कारोबार को बाधित होने से बचाया जा सकेगा।

व्यापारियों को प्रशासन से उम्मीद

CTI का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विरोध-प्रदर्शन और रैलियों का अपना महत्व है, लेकिन इनके लिए ऐसे स्थान निर्धारित होने चाहिए जहां आम लोगों और व्यापारिक गतिविधियों को कम से कम परेशानी हो।

अब व्यापारियों की नजर प्रशासन के फैसले पर है। यदि त्योहारों के दौरान सेंट्रल दिल्ली में यातायात और बाजारों की गतिविधियां सामान्य रहती हैं, तो इससे दुकानदारों के साथ-साथ खरीदारी के लिए आने वाले ग्राहकों को भी सुविधा मिलेगी। हालांकि, प्रदर्शन पर रोक लगाने या वैकल्पिक स्थान तय करने का अंतिम निर्णय संबंधित प्रशासन और पुलिस के अधिकार क्षेत्र में आता है।

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