दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों की शुरुआत के साथ ही वायु प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। दिवाली से पहले ही राजधानी की हवा सांस लेने लायक नहीं रह गई है। सोमवार सुबह दिल्ली के कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बेहद खराब स्तर पर पहुंच गया। नोएडा, गाजियाबाद और गुरुग्राम में भी प्रदूषण का असर साफ दिखाई दे रहा है। कई इलाकों में AQI 300 से ऊपर दर्ज किया गया, जबकि कुछ स्थानों पर यह 400 के पार पहुंच गया।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह 10 बजे दिल्ली का औसत AQI 314 था। इसके बाद सुबह 11 बजे तक इसमें तेजी से बढ़ोतरी हुई और यह 350 के पार पहुंच गया। इससे पहले हुई बारिश के कारण हवा की गुणवत्ता में कुछ सुधार आया था, लेकिन मौसम में बदलाव के साथ प्रदूषण दोबारा बढ़ने लगा है।
दिल्ली के कई इलाकों में AQI बेहद खराब
दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण का स्तर काफी ऊंचा दर्ज किया गया। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक जहांगीरपुरी में AQI 420 तक पहुंच गया। रोहिणी और पंजाबी बाग में यह 399 दर्ज हुआ, जबकि ITO में 351 और इंडिया गेट तथा जनपथ के आसपास 335 रहा।
एनसीआर के शहरों की स्थिति भी राहत देने वाली नहीं है। उपलब्ध सुबह के औसत आंकड़ों में दिल्ली का AQI 320, नोएडा का 310, गाजियाबाद का 300 और गुरुग्राम का 300 बताया गया। इन आंकड़ों से साफ है कि प्रदूषण केवल राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के शहर भी इसकी चपेट में हैं।

दिल्ली में लागू हुआ विंटर एक्शन प्लान
बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली में 1 नवंबर से विंटर एक्शन प्लान लागू किया गया है। इसके तहत 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल फैलाने वाली बाहरी निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया गया है। वहीं, 10 दिसंबर से 20 जनवरी के बीच निर्माण कार्य पूरी तरह बंद रखने की योजना है।
सरकारी और निजी संस्थानों को कर्मचारियों की उपस्थिति सीमित रखने की सलाह भी दी गई है। इसके तहत 50 प्रतिशत कर्मचारियों को कार्यालय बुलाने और बाकी को घर से काम करने की व्यवस्था अपनाने का सुझाव दिया गया है।
क्यों बढ़ रहा है दिल्ली-NCR में प्रदूषण?
सर्दियों में तापमान गिरने के कारण प्रदूषक कण वातावरण में नीचे की सतह के पास जमा होने लगते हैं। हवा की गति कम होने पर ये कण आसानी से फैल नहीं पाते। इससे धुंध और प्रदूषण की स्थिति गंभीर हो जाती है।
इसके अलावा पंजाब और हरियाणा के कुछ हिस्सों में पराली जलाने की घटनाएं भी दिल्ली-एनसीआर की हवा को प्रभावित कर सकती हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण स्थलों की धूल और औद्योगिक उत्सर्जन भी प्रदूषण बढ़ाने वाले प्रमुख कारक हैं।

अगले दिनों में भी राहत की उम्मीद कम
एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम की रिपोर्ट के मुताबिक, अगले पांच से छह दिनों तक दिल्ली-एनसीआर में हवा की गुणवत्ता खराब से बेहद खराब श्रेणी में बने रहने की आशंका जताई गई है।
ऐसे हालात में बच्चों, बुजुर्गों और सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। बाहर निकलते समय प्रदूषण के स्तर पर नजर रखें और संभव हो तो लंबे समय तक खुले वातावरण में रहने से बचें। प्रशासन के लिए भी चुनौती होगी कि लागू प्रतिबंधों और प्रदूषण नियंत्रण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
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