मजबूत हड्डियों और दांतों के लिए कैल्शियम बेहद जरूरी पोषक तत्व है। बचपन से ही हमें दूध पीने की सलाह दी जाती है, क्योंकि इसे कैल्शियम का अच्छा स्रोत माना जाता है। लेकिन अगर आपको दूध पसंद नहीं है या लैक्टोज इनटॉलरेंस के कारण आप इसका सेवन नहीं कर पाते, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। भारतीय रसोई में कई ऐसे पारंपरिक खाद्य पदार्थ मौजूद हैं, जो कैल्शियम से भरपूर होते हैं और आपकी रोजाना की डाइट का हिस्सा बन सकते हैं।
दिल्ली की न्यूट्रिशनिस्ट लवनीत बत्रा के बताए गए विकल्पों में तिल, रागी, राजगीरा, सहजन के पत्ते, सूखा अंजीर और राजमा शामिल हैं। इन खाद्य पदार्थों में कैल्शियम के साथ दूसरे जरूरी पोषक तत्व भी पाए जाते हैं। आइए जानते हैं इनके फायदे और इन्हें खाने के आसान तरीके।
1. तिल: कैल्शियम का अच्छा स्रोत
तिल भारतीय खानपान का पुराना हिस्सा हैं। सफेद और काले तिल का इस्तेमाल लड्डू, चिक्की, चटनी और कई पारंपरिक व्यंजनों में किया जाता है। दिए गए पोषण आंकड़ों के अनुसार, 100 ग्राम बिना छिले तिल में लगभग 975 मिलीग्राम कैल्शियम हो सकता है।
तिल में मैग्नीशियम और अन्य खनिज भी पाए जाते हैं, जो हड्डियों के सामान्य स्वास्थ्य के लिए उपयोगी हैं। इन्हें सलाद, चटनी या लड्डू के रूप में सीमित मात्रा में खाया जा सकता है। हालांकि, तिल कैलोरी से भरपूर होते हैं, इसलिए मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।
2. रागी: हड्डियों के लिए फायदेमंद अनाज
रागी को नाचनी भी कहा जाता है। यह कैल्शियम से भरपूर पारंपरिक अनाज है। 100 ग्राम रागी में लगभग 344 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जा सकता है। इसमें फाइबर और अन्य पोषक तत्व भी मौजूद होते हैं।
रागी को डाइट में शामिल करना आसान है। आप इसका दलिया, रोटी, डोसा या चीला बना सकते हैं। बच्चों और बुजुर्गों के भोजन में भी इसे शामिल किया जा सकता है, बशर्ते उनकी व्यक्तिगत पोषण जरूरतों का ध्यान रखा जाए।
3. राजगीरा: ग्लूटेन-फ्री विकल्प
राजगीरा का इस्तेमाल भारत में खासतौर पर व्रत के दौरान किया जाता है। 100 ग्राम राजगीरा में करीब 215 मिलीग्राम कैल्शियम होने का अनुमान है। यह ग्लूटेन-फ्री खाद्य विकल्प है और इसमें प्रोटीन, फॉस्फोरस तथा दूसरे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।
राजगीरे से आटा, रोटी, लड्डू और खिचड़ी बनाई जा सकती है। इसे नियमित भोजन में शामिल करके डाइट में विविधता लाई जा सकती है।
4. सहजन के पत्ते: पोषक तत्वों से भरपूर
सहजन यानी मोरिंगा के पत्ते भारतीय खानपान में इस्तेमाल किए जाते हैं। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 100 ग्राम ताजे सहजन के पत्तों में लगभग 185 मिलीग्राम कैल्शियम हो सकता है। इनमें विटामिन C और अन्य पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।
इन्हें सब्जी, दाल, सूप या पराठे में मिलाकर खाया जा सकता है। सहजन के पत्ते डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियों को शामिल करने का अच्छा विकल्प हैं।
5. सूखा अंजीर: मीठे स्वाद के साथ पोषण
अगर आपको मीठा खाना पसंद है, तो सूखा अंजीर एक अच्छा विकल्प हो सकता है। 100 ग्राम सूखे अंजीर में लगभग 162 मिलीग्राम कैल्शियम पाया जाता है। इसके अलावा इसमें फाइबर और पोटैशियम भी मौजूद होते हैं।
अंजीर को नाश्ते में या दो भोजन के बीच सीमित मात्रा में खाया जा सकता है। इसमें प्राकृतिक शुगर और कैलोरी भी होती हैं, इसलिए जरूरत के मुताबिक इसका सेवन करें।
6. राजमा: प्रोटीन और कैल्शियम का मेल
राजमा भारतीय घरों में पसंद की जाने वाली लोकप्रिय दालों में से एक है। 100 ग्राम कच्चे राजमा में लगभग 143 मिलीग्राम कैल्शियम हो सकता है। इसके साथ ही यह प्रोटीन, आयरन और मैग्नीशियम भी देता है।
राजमा को रातभर भिगोकर अच्छी तरह उबालना और पकाना चाहिए। अधपका राजमा खाना सुरक्षित नहीं है। इसे चावल, रोटी या सलाद के साथ संतुलित भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है।
मजबूत हड्डियों के लिए सिर्फ कैल्शियम काफी नहीं
हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए केवल कैल्शियम का सेवन करना पर्याप्त नहीं है। शरीर में कैल्शियम के बेहतर अवशोषण और हड्डियों की मजबूती के लिए विटामिन D भी जरूरी है। इसके अलावा पर्याप्त प्रोटीन, नियमित शारीरिक गतिविधि और संतुलित आहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
धूप से शरीर को विटामिन D बनाने में मदद मिलती है, हालांकि इसकी जरूरत व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य और जीवनशैली के अनुसार अलग हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति को लगातार हड्डियों में दर्द, कमजोरी या फ्रैक्चर की समस्या हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
इसलिए दूध न पीने वाले लोगों के लिए भी कैल्शियम के कई देसी विकल्प मौजूद हैं। तिल, रागी, राजगीरा, सहजन के पत्ते, अंजीर और राजमा को संतुलित मात्रा में डाइट में शामिल करके पोषण की विविधता बढ़ाई जा सकती है।
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