डॉ. मेनका गुरुस्वामी भारत की पहली 'ओपनली क्वीयर' सांसद बनीं...
नई दिल्ली: डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने इतिहास रच दिया। सोमवार को उन्होंने राज्यसभा सांसद के तौर पर शपथ ली और इसी के साथ वह भारत की पहली 'ओपनली क्वीयर' (खुले तौर पर क्वीयर पहचान वाली) सांसद बन गईं। संवैधानिक कानून की विशेषज्ञ होने के नाते, उन्होंने 2018 में सुप्रीम कोर्ट के उस फ़ैसले में भी अहम भूमिका निभाई थी, जिसने भारत में समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया था।
डॉ. मेनका गुरुस्वामी सुप्रीम कोर्ट की एक जानी-मानी वरिष्ठ वकील हैं, जो LGBTQ अधिकारों को कानूनी मान्यता दिलाने और संवैधानिक कानून को आगे बढ़ाने में अपनी अहम भूमिका के लिए मशहूर हैं। वह पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के टिकट पर चुनी गईं। उच्च सदन में उनका चुनाव सरकार में LGBTQ प्रतिनिधित्व को दर्शाता है।
2018 के सुप्रीम कोर्ट केस में अहम भूमिका निभाई
डॉ. मेनका गुरुस्वामी एक जानी-मानी संवैधानिक वकील हैं, जिन्होंने 2018 के सुप्रीम कोर्ट केस में अहम भूमिका निभाई थी। इस केस में धारा 377 के कुछ हिस्सों को रद्द कर दिया गया था, जिससे भारत में समलैंगिकता को प्रभावी रूप से अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया गया।
संसद में डॉ. मेनका गुरुस्वामी का प्रवेश उन्हें उन चुनिंदा कानूनी पेशेवरों की श्रेणी में ला खड़ा करता है, जो अदालत से विधायिका की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। उनका चुनाव भारतीय राजनीति में ऐतिहासिक रूप से हाशिए पर रहे समुदायों को अधिक प्रतिनिधित्व दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बड़े-बड़े संस्थानों में की पढ़ाई
मेनका का जन्म 1974 में हैदराबाद में हुआ था। नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड (रोड्स स्कॉलर, BCL और D.Phil) और हार्वर्ड लॉ स्कूल से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने एक विशिष्ट करियर बनाया। उन्होंने येल लॉ स्कूल, NYU स्कूल ऑफ लॉ और यूनिवर्सिटी ऑफ टोरंटो फैकल्टी ऑफ लॉ में विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर पढ़ाया है, साथ ही कोलंबिया लॉ स्कूल में बीआर अंबेडकर रिसर्च स्कॉलर और लेक्चरर के रूप में काम किया है, जहां उनका मुख्य जोर संघर्ष के बाद उभरे लोकतंत्रों में संवैधानिक संरचना पर रहा है।
सबसे प्रभावशाली विचारकों में
मेनका गुरुस्वामी ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य संगठनों को मानवाधिकारों के संबंध में परामर्श भी दिया है। साल 2019 में 'फॉरेन पॉलिसी' ने उन्हें दुनिया के 100 सबसे प्रभावशाली विचारकों में शामिल किया और वे अपनी साथी वकील अरुंधति काटजू के साथ 'टाइम' पत्रिका की 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में भी शामिल हुईं।

19 सांसदों ने ली राज्यसभा सांसद की शपथ
सोमवार को संसद में राज्यसभा के 19 नए चुने गए और दोबारा चुने गए सदस्यों ने शपथ ली, जो उच्च सदन के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था। शपथ लेने वालों में महाराष्ट्र के पाँच सदस्य शामिल हैं, जिनमें रामदास बंदू अठावले, माया चिंतामन इवनाते, शरदचंद्र पवार, रामराव सखाराम वडकुटे और ज्योति नागनाथ वाघमारे शामिल हैं।
इनके अलावा, क्रिस्टोफर मणिकम, अंबुमणि रामदास, कॉन्स्टैंटाइन रविंद्रन, एल.के. सुधीश, एम. थंबीदुरई और तिरुचि शिवा तमिलनाडु से हैं। पश्चिम बंगाल के पाँच सदस्यों में बाबुल सुप्रियो, मेनका गुरुस्वामी, राजीव कुमार, रुक्मिणी मलिक और बिस्वजीत सिन्हा शामिल हैं, जबकि तीन सदस्य - संतृप्त मिश्रा, दिलीप कुमार राय और मनमोहन सामल - ओडिशा से हैं।