शरजील इमाम की 10 दिन की जमानत ख़त्म, परिवार ने की न्याय की मांग...

By  Preeti Kamal March 30th 2026 12:30 PM -- Updated: March 30th 2026 11:56 AM

जहानाबाद,  बिहार: बिहार के जहानाबाद में, 2020 दिल्ली दंगों के आरोपी Sharjeel Imam के चाचा अरशद इमाम ने सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar से अपील की कि वे संसद में जाकर आरोपियों के लिए न्याय की मांग करें, क्योंकि जेडीयू प्रमुख को हाल ही में राज्यसभा सांसद चुना गया है। शरजील इमाम अपने छोटे भाई मुज्जम्मिल इमाम की शादी में शामिल होने के लिए बिहार आए थे। इसके लिए दिल्ली की एक अदालत ने उन्हें 10 दिन की अंतरिम जमानत दी थी।

मीडिया से बातचीत में उनके चाचा अरशद इमाम ने कहा, "वह 10 दिन की जमानत पर यहां आए थे। ईद थी, शादी और रिसेप्शन था, इसलिए खुशी का माहौल था। मैं अपने पार्टी प्रमुख नितीश कुमार से एक बार फिर आग्रह करता हूं कि अब जब वे दिल्ली जा रहे हैं, तो हमारे बच्चे के लिए न्याय की गुहार लगाएं। मुझे उम्मीद है कि भारतीय न्यायपालिका हमें न्याय देगी।"

जमानत अवधि के दौरान दी गईं थी सख्त हिदायतें

कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर वाजपेई ने 9 मार्च को शरजील इमाम को 20 मार्च से 30 मार्च तक अंतरिम जमानत देने की अनुमति दी थी। इसके तहत उन्हें 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदार देने थे, साथ ही कुछ शर्तें भी लागू थीं।

अदालत ने निर्देश दिया था कि जमानत अवधि के दौरान इमाम किसी भी गवाह या मामले से जुड़े व्यक्ति से संपर्क नहीं करेंगे, अपना मोबाइल नंबर जांच अधिकारी को देंगे और उसे चालू रखेंगे। साथ ही उन्हें मीडिया से बात करने या सोशल मीडिया का उपयोग करने की अनुमति नहीं थी। उन्हें केवल परिवार के सदस्यों से मिलने और अपने घर या शादी समारोह के स्थानों तक सीमित रहने का निर्देश दिया गया था।

शरजील लगभग छह वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं

शरजील, जो खुद को "राजनीतिक कैदी और छात्र कार्यकर्ता" बताते हैं, लगभग छह वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं। गिरफ्तारी के समय वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पीएचडी कर रहे थे। शरजील इमाम, उमर खालिद और 16 अन्य को जनवरी 2020 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत गिरफ्तार किया गया था।

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 50 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस के अनुसार, ये दंगे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध के बीच एक "पूर्व नियोजित साजिश" का परिणाम थे।

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