दिल्ली दंगा यूएपीए मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत पर फैसला सुरक्षित

उमर खालिद की ओर से भी नियमित जमानत के लिए अलग याचिका दायर की गई है। अदालत ने इससे पहले 9 जून को उनकी याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था, जबकि 13 जून को शरजील इमाम की याचिका पर भी पुलिस से जवाब मांगा गया था। अब सभी की निगाहें कड़कड़डूमा अदालत के फैसले पर टिकी हैं, जो आज या सोमवार को सुनाया जा सकता है।

By  Preeti Kamal July 4th 2026 04:30 PM -- Updated: July 4th 2026 03:53 PM

नई दिल्ली: दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने वर्ष 2020 के दिल्ली दंगा मामले से जुड़े कथित बड़ी साजिश (लार्जर कॉन्सपिरेसी) प्रकरण में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार उमर खालिद और शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (एएसजे) समीर बजपई ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रखा। अदालत ने कहा कि यदि आदेश लिखने की प्रक्रिया पूरी हो जाती है तो फैसला आज ही सुनाया जाएगा, अन्यथा सोमवार को आदेश जारी किया जाएगा। दोनों आरोपियों ने 5 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी जमानत याचिकाएं खारिज किए जाने के बाद ट्रायल कोर्ट का रुख किया है।

आरोप तय करने पर बहस अभी भी पूरी नहीं हुई 

शरजील इमाम की ओर से दायर जमानत याचिका में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के छह महीने बाद भी मुकदमे की सुनवाई में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है और वह पिछले लगभग छह वर्षों से न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी ओर से अधिवक्ता अहमद इब्राहिम ने अदालत में दलील दी कि मामला अभी तक आरोप तय (चार्ज फ्रेम) करने के चरण तक भी नहीं पहुंचा है और आरोप तय करने पर बहस अभी भी पूरी नहीं हुई है।

सैयद इफ्तिखार अंद्राबी बनाम NIA मामले का भी हवाला दिया गया

याचिका में यह भी कहा गया है कि गुलफिशा फातिमा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही माना था कि मुकदमे में सुनवाई की दिशा में कोई ठोस प्रगति नहीं हुई है और छह महीने बाद भी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है। याचिका में सैयद इफ्तिखार अंद्राबी बनाम राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) मामले का भी हवाला दिया गया है। इसमें कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट की एक समन्वय पीठ ने माना है कि गुलफिशा फातिमा मामले के फैसले ने के. ए. नजीब मामले में तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा स्थापित सिद्धांतों के प्रभाव को सीमित कर दिया है।

इसके अलावा, याचिका में यह भी उल्लेख किया गया कि 22 मई 2026 को तस्लीम अहमद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इसी कथित बड़ी साजिश मामले के एक सह-आरोपी को अंतरिम जमानत देते हुए यूएपीए की धारा 43डी(5) के तहत जमानत से जुड़े कानूनी प्रश्न को बड़ी पीठ के पास भेजने का निर्देश दिया था।

सभी की निगाहें कड़कड़डूमा अदालत के फैसले पर टिकी

वहीं, उमर खालिद की ओर से भी नियमित जमानत के लिए अलग याचिका दायर की गई है। अदालत ने इससे पहले 9 जून को उनकी याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया था, जबकि 13 जून को शरजील इमाम की याचिका पर भी पुलिस से जवाब मांगा गया था। अब सभी की निगाहें कड़कड़डूमा अदालत के फैसले पर टिकी हैं, जो आज या सोमवार को सुनाया जा सकता है।

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