नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने व्हाट्सऐप के नए यूजरनेम फीचर को लेकर पहचान की चोरी (इम्पर्सनेशन) की आशंका जताई है। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने अपना यूजरनेम रिजर्व करने की कोशिश की तो उनके नाम और 'AAP' के साथ जुड़े कई संभावित यूजरनेम पहले से ही बुक मिले।

मनीष सिसोदिया ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि वह समझते हैं कि "मनीष सिसोदिया" नाम केवल उनका ही नहीं हो सकता, इसलिए उनके नाम के कई वर्जन पहले से लिए जा चुके हों, यह स्वाभाविक है। लेकिन उन्हें हैरानी इस बात की हुई कि उनके नाम के साथ AAP जोड़कर बनाए गए लगभग सभी संभावित यूजरनेम भी पहले से रिजर्व दिखाई दिए।

मनीष सिसोदिया ने दिए कई उदाहरण

मनीष सिसोदिया ने उदाहरण देते हुए बताया कि Manish.Sisodia.AAP, Manish_Sisodia_AAP, ManishSisodiaAAP जैसे कई यूजरनेम उपलब्ध नहीं थे। मनीष सिसोदिया ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार आम आदमी पार्टी में उनके नाम का कोई दूसरा व्यक्ति नहीं है। ऐसे में यदि किसी और ने ये यूजरनेम रिजर्व किए हैं तो इससे फर्जी पहचान बनाकर लोगों को गुमराह करने का खतरा पैदा हो सकता है।

उन्होंने व्हाट्सऐप और मेटा से अपील करते हुए कहा कि सार्वजनिक हस्तियों की पहचान की सुरक्षा के लिए मजबूत वेरिफिकेशन और शिकायत निवारण (ग्रीवेंस) व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, ताकि किसी की पहचान का दुरुपयोग न हो और उपयोगकर्ता सुरक्षित रहें। इस बीच, केंद्र सरकार द्वारा व्हाट्सऐप के प्रस्तावित यूजरनेम फीचर पर नोटिस जारी किए जाने के कुछ घंटे बाद कंपनी ने कहा कि यूजरनेम फीचर अभी लागू नहीं हुआ है और इसे इस वर्ष धीरे-धीरे शुरू किया जाएगा।

'मशहूर हस्तियों, वेरिफाइड अकाउंट्स से जुड़े यूजरनेम पहले से सुरक्षित'

व्हाट्सऐप के प्रवक्ता ने कहा कि सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थाओं, मशहूर हस्तियों और मेटा के वेरिफाइड अकाउंट्स से जुड़े प्रमुख यूजरनेम पहले से सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि केवल वास्तविक मालिक ही उन्हें प्राप्त कर सकें। इसके अलावा मिलते-जुलते यूजरनेम भी सुरक्षित रखे गए हैं।

कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने के लिए फोन नंबर अनिवार्य रहेगा। यूजरनेम के जरिए होने वाली धोखाधड़ी रोकने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए गए हैं। किसी यूजर को पहला संदेश मिलने पर यह जानकारी भी दिखाई जाएगी कि संदेश भेजने वाला नया अकाउंट है या नहीं, वह संपर्क सूची में है या नहीं, कोई साझा ग्रुप है या नहीं और वह किसी दूसरे देश से संदेश भेज रहा है या नहीं। वहीं, केंद्र सरकार ने इस फीचर पर चिंता जताते हुए कहा कि इससे पहचान की चोरी और फर्जी पहचान (स्पूफिंग) का खतरा बढ़ सकता है। सरकार ने मेटा से तीन दिनों के भीतर इस संबंध में विस्तृत जवाब मांगा है।