नई दिल्ली: दिल्ली के उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की सलाहकार परिषद की बैठक की अध्यक्षता करते हुए राजधानी के दीर्घकालिक और सतत शहरी विकास की रणनीति की समीक्षा की। बैठक में सस्ती आवास योजना, ट्रैफिक जाम, जल सुरक्षा, पुनर्विकास और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में परिषद के सदस्यों के साथ सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी और सुधांशु त्रिवेदी भी मौजूद रहे। इसके अलावा दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (एनसीआरटीसी), दिल्ली जल बोर्ड, बिजली विभाग, स्वास्थ्य विभाग, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के प्रतिनिधि तथा डीडीए के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।
प्रमुख शहरी चुनौतियों की समीक्षा की गई
बैठक में राजधानी के सामने मौजूद प्रमुख शहरी चुनौतियों की समीक्षा की गई। इनमें किफायती आवास की मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ता अंतर, झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों का पुनर्वास, अनधिकृत कॉलोनियों का नियमितीकरण और पुनर्विकास, ट्रैफिक जाम, प्रदूषण, ज़ोन-ओ का विकास एवं नियमन, शहरी बाढ़, बढ़ते तापमान, विरासत भवनों का संरक्षण और जल संकट जैसे मुद्दे शामिल रहे।
Chaired the meeting of the Advisory Council of @official_dda today, in the presence of Hon’ble MPs Shri @RamvirBidhuri and Shri @SudhanshuTrived, to review the roadmap for sustainable urban development in the National Capital.We held wide-ranging deliberations on the upcoming… pic.twitter.com/sWx6NLPKm1
— LG Delhi (@LtGovDelhi) July 3, 2026
चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रोडमैप का प्रस्ताव रखा
उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू ने राजधानी के विकास के लिए चार प्रमुख स्तंभों पर आधारित रोडमैप का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि दिल्ली को एक टिकाऊ, हरित और रहने योग्य शहर बनाने के लिए पर्यावरण संरक्षण, बेहतर जीवन गुणवत्ता, आर्थिक एवं सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और समावेशी शहरी विकास पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के तहत प्रति व्यक्ति हरित क्षेत्र बढ़ाने, यमुना नदी के तट का विकास और हरित एवं जल आधारित बुनियादी ढांचे को आपस में जोड़ने की योजना पर जोर दिया गया। वहीं, बेहतर जीवन गुणवत्ता के लिए आपदा प्रबंधन, जल सुरक्षा और सुरक्षित सड़कों को प्राथमिकता देने की बात कही गई।
बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर बल दिया गया
आर्थिक और सांस्कृतिक विकास के लिए व्यावसायिक बाजारों के पुनर्विकास, लॉजिस्टिक्स हब विकसित करने और विरासत स्थलों को आर्थिक एवं सांस्कृतिक संपदा के रूप में उपयोग करने की रणनीति पर भी चर्चा हुई। समावेशी विकास के तहत ट्रैफिक जाम मुक्त शहर, मल्टी-मॉडल परिवहन व्यवस्था और मेट्रो स्टेशनों से अंतिम छोर तक बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
"दिल्ली का विकास समावेशी, टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए"
बैठक में शहर के विभिन्न क्षेत्रों के प्रस्तावित विकास कार्यों की भी जानकारी दी गई। इनमें 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी), 200 वर्ग किलोमीटर में लैंड पूलिंग, 700 वर्ग किलोमीटर विकसित आवासीय क्षेत्र, 150 वर्ग किलोमीटर कम घनत्व वाले क्षेत्र, ज़ोन-ओ में 100 वर्ग किलोमीटर नदी तट विकास, पुरानी दिल्ली के 24 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का पुनर्विकास, बंगला ज़ोन के 31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का विकास तथा 20 वर्ग किलोमीटर के उच्च घनत्व वाले कॉरिडोर का विकास शामिल है।
बैठक के अंत में तरणजीत सिंह संधू ने कहा कि "दिल्ली का विकास समावेशी, टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप होना चाहिए।" उन्होंने कहा कि बैठक में तैयार की गई रणनीति राजधानी के विकास के लिए भविष्य का रोडमैप साबित होगी।
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