UPSC ने सिविल सेवा परीक्षा में लागू किया फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम, फर्जी उम्मीदवारों पर लगेगी रोक
नई दिल्ली: सिविल सेवा परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को और मजबूत बनाने तथा प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन) पर रोक लगाने के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने फेस ऑथेंटिकेशन प्रोटोकॉल को सफलतापूर्वक लागू किया है। यह तकनीक हाल ही में आयोजित सिविल सेवा और भारतीय वन सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 में इस्तेमाल की गई। इसके तहत यह सुनिश्चित किया गया कि आवेदन पत्र भरते समय जिस अभ्यर्थी की फोटो अपलोड की गई थी, वही उम्मीदवार एडमिट कार्ड के साथ परीक्षा देने पहुंचा है।
UPSC के अनुसार, इस प्रणाली ने परीक्षा केंद्रों पर उम्मीदवारों की लाइव और रियल-टाइम पहचान सुनिश्चित की। निरीक्षकों (इनविजिलेटर्स) ने मोबाइल फोन आधारित सत्यापन के जरिए अभ्यर्थियों का फेस ऑथेंटिकेशन किया, जिससे फर्जी उम्मीदवारों और परीक्षा में गड़बड़ी की संभावना समाप्त हो गई। आयोग ने इस वर्ष सिविल सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा 2026 के दौरान देशभर के 2,072 परीक्षा केंद्रों पर रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन अभियान चलाया।
फेस ऑथेंटिकेशन कराना अनिवार्य किया गया
यह एप्लिकेशन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) के तकनीकी सहयोग से UPSC द्वारा विकसित और लागू की गई है। UPSC ने एक ऐसी प्रक्रिया भी तैयार की है, जिसके तहत प्रत्येक अभ्यर्थी को परीक्षा कक्ष में प्रवेश से पहले फेस ऑथेंटिकेशन कराना अनिवार्य किया गया। इसके लिए विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार कर सभी राज्यों, जिलों और परीक्षा केंद्रों के साथ साझा की गई।
आयोग के मुताबिक, निरीक्षकों को कई चरणों में प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रणाली की खास बात यह है कि इसके लिए किसी महंगे हार्डवेयर की जरूरत नहीं पड़ती। यह किसी भी एंड्रॉयड स्मार्टफोन पर काम करती है और निरीक्षकों ने अपने मोबाइल फोन का उपयोग कर सत्यापन प्रक्रिया पूरी की, जिससे लागत और लॉजिस्टिक बोझ दोनों कम हुए।
प्रति मिनट लगभग 12,000 फेस ऑथेंटिकेशन प्रोसेस करने में सक्षम है एप्लिकेशन
एक अन्य महत्वपूर्ण विशेषता इसकी गति है। किसी एक उम्मीदवार का फेस ऑथेंटिकेशन करने में केवल 6 से 8 सेकंड का समय लगता है, जिससे परीक्षा केंद्रों पर लंबी कतारें नहीं लगीं और प्रवेश प्रक्रिया सुचारू रही। यह प्रणाली इतनी सक्षम रही कि एक ही समय में 7,000 से अधिक निरीक्षकों ने इसका उपयोग किया। परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश के व्यस्त समय में यह एप्लिकेशन प्रति मिनट लगभग 12,000 फेस ऑथेंटिकेशन प्रोसेस करने में सक्षम रही।
UPSC के अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा, "यह प्रतिरूपण-मुक्त परीक्षाएं सुनिश्चित करने की दिशा में UPSC का नया कदम है। यह तकनीक NeGD के सहयोग से पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित की गई है। लगभग 5.5 लाख उम्मीदवारों और 2,000 से अधिक परीक्षा केंद्रों पर इसे सफलतापूर्वक लागू करना एक बड़ी उपलब्धि है।" UPSC का मानना है कि रियल-टाइम फेस ऑथेंटिकेशन का सफल क्रियान्वयन सिविल सेवा परीक्षा की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।