नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को NEET पेपर लीक के आरोपों को लेकर 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' प्रदर्शन की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से जांच कराने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई। याचिका में घटना के संबंध में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज सभी FIR को किसी विशेष जांच एजेंसी को सौंपने और कथित हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।

मामले का उल्लेख मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ के समक्ष किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता बरुण कुमार सिन्हा ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि इसे शुक्रवार को ही सुना जाए। पीठ ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च की NIA जांच की मांग

यह जनहित याचिका अखिल भारत हिंदू महासभा के पूर्व उपाध्यक्ष सतीश कुमार अग्रवाल ने अधिवक्ता स्नेह वर्धन और प्रतिभा सिन्हा के माध्यम से दायर की है। याचिका में केंद्र सरकार, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI), दिल्ली पुलिस आयुक्त और दिल्ली सरकार को पक्षकार बनाया गया है।याचिकाकर्ता के अनुसार, कथित NEET पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन 6 जून 2026 को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था और 20 जुलाई को 'संसद चलो' मार्च के रूप में सामने आया।

याचिका में हिंसा और संपत्ति को नुकसान का आरोप

याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान स्थिति हिंसक हो गई। इसमें पथराव, पुलिसकर्मियों के घायल होने, पत्रकारों पर हमले, सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान, आपातकालीन सेवाओं में बाधा और संसद भवन की ओर बढ़ने के प्रयास जैसे आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने 20 जुलाई की घटना की NIA या किसी अन्य विशेष जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की है। याचिका में संसद क्षेत्र में कथित रूप से प्रवेश करने के प्रयास और पुलिसकर्मियों पर हमले की भी जांच की मांग की गई है।

सभी FIR विशेष जांच एजेंसी को ट्रांसफर करने की मांग

PIL में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज सभी FIR को किसी विशेष जांच एजेंसी को सौंपने की मांग की गई है। इसके अलावा हिंसा, तोड़फोड़, आपातकालीन सेवाओं में बाधा और सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि शुरुआत में NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दे पर शुरू हुआ प्रदर्शन बाद में राजनीतिक नेताओं और अन्य संगठनों के प्रभाव में आ गया।

याचिका में विदेशी फंडिंग और कुछ कार्यकर्ताओं व संगठनों की कथित भूमिका से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं और इन पहलुओं की जांच की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन संविधान के तहत अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल हिंसा, संपत्ति को नुकसान, सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा या राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करने वाली गतिविधियों के लिए नहीं किया जा सकता।