‘द जंगल बुक’ के शेर खान की आवाज थे नाना पाटेकर, 90s के बच्चों को आज भी याद है अंदाज

नाना पाटेकर ने 90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित ‘द जंगल बुक’ के हिंदी संस्करण में शेर खान को अपनी आवाज दी थी। उनकी गहरी और प्रभावशाली आवाज ने इस खलनायक किरदार को बच्चों के बीच यादगार बना दिया था।

By  Preeti Kamal October 8th 2026 04:30 PM -- Updated: October 8th 2026 04:25 PM

मुंबई: 90 के दशक में दूरदर्शन पर ‘द जंगल बुक’ शुरू होते ही कई घरों में बच्चों की नजरें टीवी स्क्रीन पर टिक जाती थीं। मोगली, बालू, बघीरा और भेड़ियों के बीच एक ऐसा किरदार भी था, जिसकी मौजूदगी कहानी का माहौल अचानक गंभीर और डरावना कर देती थी—शेर खान।

हिंदी संस्करण में शेर खान के किरदार को अपनी आवाज देने वाले अभिनेता नाना पाटेकर थे। उनकी गहरी और प्रभावशाली आवाज ने शेर खान के किरदार को ऐसी पहचान दी कि 90 के दशक में टीवी देखने वाली एक पूरी पीढ़ी के लिए शेर खान की आवाज और नाना पाटेकर की आवाज एक-दूसरे से जुड़ गई।

पर्दे पर नहीं दिखे, लेकिन आवाज ने बनाई पहचान

नाना पाटेकर ने शेर खान का किरदार पर्दे पर निभाया नहीं था। उनकी भूमिका केवल आवाज देने तक सीमित थी, लेकिन उनकी आवाज के अंदाज ने एनिमेटेड किरदार में अलग प्रभाव पैदा किया।

उनकी भारी आवाज, संवाद बोलने का ठहरा हुआ अंदाज और शब्दों पर खास जोर शेर खान को एक प्रभावशाली और खतरनाक किरदार बनाता था। उन्हें हर संवाद के लिए तेज आवाज या चीखने की जरूरत नहीं पड़ती थी। शांत आवाज में बोले गए संवादों में भी खतरे का एहसास बना रहता था।

दूरदर्शन पर 90 के दशक में घर-घर पहुंचा ‘जंगल बुक’

90 के दशक की शुरुआत में जापानी एनिमेटेड टेलीविजन सीरीज ‘जंगल बुक: द एडवेंचर्स ऑफ मोगली’ का हिंदी डब संस्करण दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ। सीरीज की कहानी एक ऐसे बच्चे मोगली के इर्द-गिर्द घूमती थी, जिसे जंगल में भेड़ियों ने पाला था।

कहानी में मोगली के साथ बालू भालू, बघीरा काला तेंदुआ और भेड़ियों का परिवार जैसे किरदार थे। ये सभी मोगली के जीवन में अलग-अलग भूमिका निभाते थे। लेकिन शेर खान की भूमिका अलग थी। वह मोगली को जंगल के लिए खतरा मानता था और उसे जंगल से बाहर निकालना चाहता था। जब भी शेर खान कहानी में आता था, माहौल में तनाव बढ़ जाता था।

नाना पाटेकर की आवाज ने शेर खान को बनाया यादगार

शेर खान को प्रभावशाली बनाने में नाना पाटेकर की आवाज की बड़ी भूमिका रही। उनकी गहरी आवाज ने किरदार को अधिकार और गंभीरता का एहसास दिया। उनके संवाद बोलने के तरीके में एक नियंत्रित गुस्सा महसूस होता था। आवाज में ठहराव और संवादों के बीच उनकी खास शैली शेर खान के व्यक्तित्व के अनुरूप बैठती थी।

90 के दशक के बच्चों के लिए यह आवाज बचपन की यादों का हिस्सा बन गई। शेर खान को देखकर या उसकी आवाज सुनकर पैदा होने वाला डर एनिमेशन से ज्यादा उस आवाज के प्रभाव से जुड़ा हुआ था।

2016 की फिल्म में भी नाना पाटेकर ने दी आवाज

नाना पाटेकर का शेर खान से जुड़ाव केवल 90 के दशक की टेलीविजन सीरीज तक सीमित नहीं रहा। दो दशक से ज्यादा समय बाद 2016 में रिलीज हुई हॉलीवुड फिल्म ‘द जंगल बुक’ के हिंदी संस्करण में भी उन्होंने शेर खान को अपनी आवाज दी।

उस समय तक नाना पाटेकर हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं में अपनी अलग पहचान बना चुके थे। ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनके गंभीर और प्रभावशाली अभिनय को दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके बावजूद शेर खान की आवाज उनके करियर का एक अलग और खास हिस्सा रही। इस भूमिका में उनकी पहचान उनके चेहरे या शारीरिक अभिनय से नहीं, बल्कि केवल आवाज से बनी।

एक आवाज जो पीढ़ी की याद बन गई

नाना पाटेकर ने अपने लंबे करियर में कई तरह के किरदार निभाए। उनके कुछ किरदारों ने दर्शकों को सोचने पर मजबूर किया, कुछ ने हंसाया और कुछ ने अपने अभिनय से चौंकाया। लेकिन 90 के दशक में बड़े हुए बच्चों के लिए शेर खान की आवाज की याद कुछ अलग है। वह आवाज डर का एहसास पैदा करती थी और यही वजह है कि ‘द जंगल बुक’ के दशकों बाद भी नाना पाटेकर की शेर खान वाली आवाज दर्शकों की स्मृतियों में बनी हुई है।

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