गुरुग्राम में शुरू हुआ भारत का पहला LPG 'गैस ATM'...

By  Preeti Kamal March 21st 2026 11:17 AM -- Updated: March 21st 2026 10:59 AM

गैस की किल्लत के बीच नई तकनीकी पहल: भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने गुरूग्राम में देश का पहला LPG ‘गैस ATM’ लॉन्च किया है। यह सुविधा सोहना सेक्टर 33 स्थित सेंट्रल पार्क फ्लावर वैली (Central Park Flower Valley) में शुरू की गई है।

दिल्ली-एनसीआर में गैस की आपूर्ति में उतार-चढ़ाव के बीच यह पहल उपभोक्ताओं के लिए राहत लेकर आई है। यह पूरी प्रक्रिया संपर्क रहित (contactless) और तेज़ है, जिससे कुछ ही मिनटों में सिलेंडर मिल जाता है।

कैसे काम करता है ‘गैस ATM’

यह अत्याधुनिक मशीन ‘स्वैप सिस्टम’ पर आधारित है। यानी उपभोक्ता अपना खाली सिलेंडर मशीन में जमा कर तुरंत भरा हुआ सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं।

प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • मोबाइल नंबर दर्ज करें
  • OTP से वेरिफिकेशन करें
  • QR कोड स्कैन करें
  • UPI या डेबिट कार्ड से भुगतान करें
  • मशीन से भरा हुआ सिलेंडर प्राप्त करें

हल्के और सुरक्षित कंपोजिट सिलेंडर

इस ‘गैस एटीएम’ की खास बात है कि इसमें पारंपरिक लोहे के भारी सिलेंडरों की जगह आधुनिक कंपोजिट सिलेंडर का इस्तेमाल किया गया है।

  • वजन: लगभग 15 किलोग्राम (पारंपरिक 30 किलोग्राम के मुकाबले)
  • सामग्री: फाइबर आधारित
  • फायदे: हल्के, सुरक्षित और आसानी से उठाने योग्य
  • उपभोक्ताओं के लिए क्या है फायदा
  • गैस की कमी के समय तुरंत उपलब्धता
  • लंबी कतारों से छुटकारा
  • डिजिटल और पारदर्शी प्रक्रिया
  • तेज़ और सुविधाजनक सेवा

भविष्य की योजना

BPCL इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद ऐसे ‘गैस ATM’ को Delhi-NCR के अन्य हिस्सों में भी शुरू करने की योजना बना रही है। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो देशभर में LPG वितरण प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

इन सिलेंडरों की पोर्टेबिलिटी के अलावा, इनमें एक पारदर्शी बॉडी होती है, जिससे घरों को गैस के स्तर को आसानी से देखने की सुविधा मिलती है। यह पारदर्शिता धातु के कंटेनरों के साथ होने वाले अनुमान को समाप्त करती है और परिवारों को अपनी रसोई की जरूरतों की बेहतर योजना बनाने में मदद करती है।

चौबीसों घंटे उपलब्धता

अधिकतम सुविधा सुनिश्चित करने के लिए, यह वेंडिंग मशीन 24 घंटे चालू रहती है। इसमें एक बुद्धिमान इन्वेंट्री प्रबंधन प्रणाली है, जिसमें एक समय में अधिकतम दस सिलेंडर रखे जा सकते हैं। जब उपलब्ध स्टॉक घटकर केवल दो यूनिट रह जाता है, तो मशीन स्वतः ही स्थानीय एजेंसी को अलर्ट भेजती है, जिससे तुरंत रीस्टॉक किया जा सके।

हालांकि यह सुविधा अभी शुरुआती चरण में है और लोगों में इसकी जागरूकता अपेक्षाकृत कम है, फिर भी यह ऊर्जा वितरण में सेल्फ-सर्विस मॉडल की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाती है।

ऊर्जा पर भू-राजनीतिक प्रभाव

इस पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत ऐसे समय में हुई है जब भारत एलपीजी आपूर्ति श्रृंखला में दबाव का सामना कर रहा है। देश अपनी कुकिंग गैस की लगभग 60% जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, इसलिए समुद्री मार्गों में किसी भी तरह की बाधा का सीधा असर घरेलू आपूर्ति पर पड़ता है।

हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) के बंद होने से, जो ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है, ईंधन के प्रवाह पर गंभीर असर पड़ा है। सरकार जहां घरेलू जरूरतों को सुरक्षित रखने के लिए उपलब्ध स्टॉक का पुनर्वितरण कर रही है, वहीं वाणिज्यिक क्षेत्र को इसकी कमी का अधिक सामना करना पड़ा है।

यदि गुरुग्राम में यह स्वचालित मॉडल सफल साबित होता है, तो यह भारत के अन्य शहरों के लिए एक स्केलेबल मॉडल बन सकता है, जो वैश्विक ऊर्जा उतार-चढ़ाव के प्रभाव को कम करने में मदद करेगा।

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