क्या सिर्फ HbA1c टेस्ट काफी है? नई रिसर्च के बाद जानिए डायबिटीज की 7 जरूरी जांच
नई रिसर्च के अनुसार, भारत जैसे देशों में आयरन की कमी (Iron Deficiency Anemia) HbA1c टेस्ट के नतीजों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में विशेषज्ञ डायबिटीज की पुष्टि के लिए केवल HbA1c पर निर्भर रहने के बजाय कई अन्य जांचों की सलाह दे रहे हैं।
डायबिटीज की पहचान और उसकी निगरानी के लिए लंबे समय से HbA1c टेस्ट को सबसे भरोसेमंद जांचों में से एक माना जाता रहा है। यह टेस्ट पिछले लगभग तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर स्तर का अनुमान देता है। लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक शोध ने इस टेस्ट को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है।
रिसर्च के अनुसार, भारत और दक्षिण एशिया के कई देशों में बड़ी संख्या में लोग आयरन की कमी (Iron Deficiency Anemia) से प्रभावित हैं। ऐसे लोगों में HbA1c टेस्ट के परिणाम वास्तविक ब्लड शुगर स्तर से अलग हो सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस वजह से केवल HbA1c के आधार पर डायबिटीज की पुष्टि करना हमेशा सही नहीं हो सकता।
हालांकि, यह समझना जरूरी है कि मरीज को कौन-सी जांच करानी चाहिए, इसका अंतिम निर्णय डॉक्टर की सलाह पर ही होना चाहिए।
क्या होता है HbA1c टेस्ट?
HbA1c एक ब्लड टेस्ट है, जिसे ग्लाइकेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट भी कहा जाता है। यह बताता है कि पिछले दो से तीन महीनों में किसी व्यक्ति का औसत ब्लड शुगर स्तर कैसा रहा है।
डॉक्टर इस टेस्ट का इस्तेमाल डायबिटीज की पहचान के साथ-साथ पहले से डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में शुगर कंट्रोल की निगरानी के लिए भी करते हैं।
आयरन की कमी क्यों डाल सकती है असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, जब शरीर में आयरन की कमी होती है तो लाल रक्त कोशिकाओं (RBCs) का जीवनकाल और उनकी कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। इसका असर HbA1c रिपोर्ट पर भी पड़ सकता है।
ऐसी स्थिति में रिपोर्ट वास्तविक शुगर स्तर से अधिक या कम दिखाई दे सकती है। इसलिए यदि मरीज को एनीमिया है, तो डॉक्टर अन्य जांचों को भी साथ में देखने की सलाह दे सकते हैं।
डायबिटीज की पुष्टि के लिए कौन-कौन से टेस्ट जरूरी हो सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार केवल एक टेस्ट पर निर्भर रहने के बजाय मरीज की पूरी स्वास्थ्य स्थिति को समझना जरूरी होता है। इसके लिए डॉक्टर निम्न जांचों की सलाह दे सकते हैं—
- BSF (Blood Sugar Fasting) - खाली पेट ब्लड शुगर की जांच डायबिटीज की शुरुआती पहचान में मदद करती है।
- OGTT (Oral Glucose Tolerance Test) - इस टेस्ट में ग्लूकोज पीने के बाद शरीर की शुगर नियंत्रित करने की क्षमता का आकलन किया जाता है।
- Serum Insulin Test - यह जांच बताती है कि शरीर कितना इंसुलिन बना रहा है और इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति क्या है।
- CBC (Complete Blood Count) - CBC टेस्ट से एनीमिया और अन्य रक्त संबंधी समस्याओं का पता चलता है, जो HbA1c रिपोर्ट को प्रभावित कर सकती हैं।
- Lipid Profile - डायबिटीज के मरीजों में हृदय रोग का खतरा अधिक रहता है। इसलिए कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।
- Urine Routine/Microscopy - यह टेस्ट किडनी और मूत्र संक्रमण जैसी समस्याओं की शुरुआती पहचान में मदद करता है।
- Urine Microalbumin - डायबिटीज के कारण किडनी पर पड़ने वाले शुरुआती प्रभाव का पता लगाने के लिए यह जांच बेहद उपयोगी मानी जाती है।
क्या अब HbA1c की जरूरत नहीं रहेगी?
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा। HbA1c आज भी दुनिया भर में एक महत्वपूर्ण जांच मानी जाती है। हालांकि जिन मरीजों में आयरन की कमी, एनीमिया या कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां हों, वहां डॉक्टर अतिरिक्त जांचों के आधार पर ही अंतिम निर्णय लेते हैं।
यानी HbA1c को पूरी तरह छोड़ने की बजाय मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, लक्षण और अन्य जांच रिपोर्टों के साथ मिलाकर देखा जाना चाहिए।
डॉक्टर की सलाह सबसे जरूरी
डायबिटीज की जांच या इलाज के लिए स्वयं कोई टेस्ट चुनना उचित नहीं है। यदि बार-बार प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, अचानक वजन घटना, थकान या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण हों तो डॉक्टर से सलाह लेकर आवश्यक जांच करानी चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि सही समय पर सही जांच और समय पर इलाज से डायबिटीज की जटिलताओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
डॉ. निश्चल गुप्ता होम्योपैथी के एक भरोसेमंद कंसल्टेंट हैं, जिन्हें क्लिनिकल प्रैक्टिस का 17 साल से ज़्यादा का अनुभव है। होम्योपैथी में MD की डिग्री के साथ, डॉ. गुप्ता ने कई सालों में एलर्जी, त्वचा की समस्याओं, पाचन संबंधी दिक्कतों, गठिया और हार्मोनल असंतुलन जैसी कई तरह की बीमारियों का सफलतापूर्वक इलाज किया है और सभी उम्र के मरीज़ों का भरोसा जीता है।
नोट: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी मेडिकल निर्णय के लिए डॉक्टर या स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।