नई दिल्ली: भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की प्रमुख पहल ICMR- माइंड्स (ICMR-MINDS) को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 में कैटेगरी-2 (AI और नई तकनीकों के उपयोग से नागरिक-केंद्रित सेवाओं में नवाचार) के तहत गोल्ड अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। यह पुरस्कार कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) द्वारा प्रदान किया जाता है।

आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह पुरस्कार केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राजस्थान सरकार के सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, राजस्थान के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास तथा डीएआरपीजी और पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा की उपस्थिति में प्रदान किया।

मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर साझा की जानकारी

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस उपलब्धि को साझा करते हुए कहा, "भारत की डिजिटल स्वास्थ्य यात्रा के लिए यह एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। मंत्रालय को ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन सेवा से एकीकृत AI-सक्षम क्लीनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम के लिए राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026 (गोल्ड) से सम्मानित किया गया है।"

लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों को ट्रीटमेंट करने में  मिलती है मदद

मंत्रालय ने बताया कि यह पुरस्कार उसकी ओर से संयुक्त सचिव मधुकर कुमार भगत और उनकी टीम ने प्राप्त किया। मंत्रालय के अनुसार, ई-संजीवनी प्लेटफॉर्म से जुड़ा AI-सक्षम क्लीनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम मरीजों के लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित चिकित्सकीय सहायता प्रदान करता है। इससे डॉक्टरों के निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है और लाखों मरीजों को लाभ मिलता है। मंत्रालय ने कहा कि यह सम्मान AI और उभरती तकनीकों के माध्यम से सुलभ, प्रभावी और नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

एक अन्य पोस्ट में मंत्रालय ने ICMR को बधाई देते हुए कहा कि ICMR- माइंड्स पहल को मानसिक स्वास्थ्य और नशा संबंधी विकारों की स्क्रीनिंग एवं प्रबंधन को गैर-संचारी रोग (एनसीडी) देखभाल के साथ डिजिटल तकनीक के माध्यम से जोड़ने में नवाचार के लिए गोल्ड अवॉर्ड मिला है। यह 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

यह सम्मान 1-2 जुलाई 2026 को जयपुर, राजस्थान में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन (एनसीईजी 2026) के दौरान प्रदान किया गया। ICMR- माइंड्स एक कार्यान्वयन अनुसंधान परियोजना है, जिसका उद्देश्य मानसिक एवं नशा संबंधी विकारों की स्क्रीनिंग और उपचार को अन्य गैर-संचारी रोगों की सेवाओं के साथ जोड़ना है। इसका क्लीनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (सीडीएसएस) प्रशिक्षित गैर-विशेषज्ञ स्वास्थ्यकर्मियों को डिजिटल निर्णय सहायता के जरिए मानसिक स्वास्थ्य की स्क्रीनिंग, मूल्यांकन, फॉलो-अप और नियमित उपचार में सक्षम बनाता है।

मरीजों की निरंतर देखभाल सुनिश्चित होती है

इस प्लेटफॉर्म में डिजिटल स्क्रीनिंग, भूमिका-आधारित चिकित्सकीय मार्गदर्शन, ऑफलाइन सुविधा, बहुभाषी इंटरफेस, गेमिफाइड फीचर्स तथा रियल-टाइम एडमिन डैशबोर्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। साथ ही यह रेफरल और बैक-रेफरल प्रणाली के जरिए मरीजों की निरंतर देखभाल सुनिश्चित करता है, जिससे विशेषज्ञ चिकित्सकों पर भार कम होता है और मरीजों के उपचार में निरंतरता बनी रहती है।

सात प्रमुख संस्थानों के सहयोग से संचालित है यह परियोजना

यह परियोजना सात राज्यों में सात प्रमुख संस्थानों के सहयोग से संचालित की जा रही है, जिनमें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, गुवाहाटी, गुजरात इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ, अहमदाबाद, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली, सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भोपाल, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भुवनेश्वर तथा पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआईएमईआर), चंडीगढ़ शामिल हैं।

 'ICMR तकनीक-संचालित नवाचारों को आगे भी बढ़ावा देता रहेगा'

इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. राजीव बहल, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव एवं ICMR के महानिदेशक ने कहा कि ICMR सार्वजनिक स्वास्थ्य की जटिल चुनौतियों के समाधान के लिए डेटा आधारित और तकनीक-संचालित नवाचारों को आगे भी बढ़ावा देता रहेगा। उन्होंने कहा कि सहभागी संस्थानों और राज्य स्वास्थ्य प्रणालियों के साथ मिलकर ICMR देशवासियों को किफायती, मानकीकृत और उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।