रामेश्वरम, तमिलनाडु: देश में 'सुपर एल नीनो' (Super El Nino) के संभावित प्रभावों को लेकर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से तमिलनाडु के रामेश्वरम स्थित अग्नि तीर्थम बीच पर प्रसिद्ध रेत कलाकार सरवनन ने आकर्षक सैंड आर्ट तैयार की। यह पहल रामनाथपुरम जिला प्रशासन और रामेश्वरम नगर पालिका के सहयोग से की गई, जिसे पर्यटकों और स्थानीय लोगों ने खूब सराहा।
सरवनन ने बताया कि विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) और भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने वर्ष 2026 को 'Super El Nino' वर्ष घोषित किया है। ऐसे में लोगों को इसके संभावित दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, "सुपर एल नीनो का सबसे अधिक असर कृषि, समुद्री जैव विविधता और मत्स्य पालन पर पड़ सकता है। समुद्र में मौजूद कोरल रीफ प्रभावित होंगे, जिससे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचेगा।"
#WATCH | Rameswaram, Tamil Nadu: El Nino awareness sand sculpture installed at Agni Theertham beach to spread awareness on the global weather phenomenon. pic.twitter.com/qPbMqmR4Xb
— ANI (@ANI) July 5, 2026
जिला प्रशासन के निर्देश पर बनाई गई सैंड आर्ट
सरवनन ने बताया कि यह जागरूकता अभियान रामनाथपुरम जिला कलेक्टर के निर्देश और रामेश्वरम नगर पालिका आयुक्त के सहयोग से चलाया जा रहा है। सैंड आर्ट के माध्यम से लोगों को जलवायु परिवर्तन और 'El Nino' के प्रभावों के बारे में जानकारी दी जा रही है।
क्या है 'एल नीनो'?
'El Nino' एक प्राकृतिक मौसमीय घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का समुद्री सतह तापमान सामान्य से अधिक बढ़ जाता है। इससे दुनिया भर में हवा और वर्षा के पैटर्न में बदलाव आता है। इसके कारण कहीं भीषण सूखा तो कहीं अत्यधिक बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियां पैदा हो सकती हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, सुपर एल नीनो के कारण भारत में:
- तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है।
- मानसून के पैटर्न में बदलाव आ सकता है।
- कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
- समुद्री जैव विविधता और मत्स्य पालन को नुकसान पहुंच सकता है।
- स्वास्थ्य और जल संसाधनों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक मौसम एजेंसियों ने कृषि, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी है।
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