KPSC भर्ती घोटाले में ED का बड़ा दावा, आंसर-की बेचकर रिश्वत लेने का आरोप; 35 करोड़ के कॉम्प्लेक्स की थी तैयारी

कर्नाटक KPSC भर्ती घोटाले में ED ने दावा किया है कि गिरफ्तार चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार कथित रिश्वत की रकम से 35 करोड़ रुपये का कॉम्प्लेक्स बनवाने की योजना बना रहे थे। आंसर-की लीक, लाखों की रिश्वत और करोड़ों के नकद लेनदेन के आरोपों की जांच जारी है।

By  Laxman November 3rd 2026 05:45 PM

कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) भर्ती घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। एजेंसी के मुताबिक, गिरफ्तार KPSC चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार कथित रिश्वत की रकम से अपने गृह जिले यादगीर में करीब 35 करोड़ रुपये का एक विशाल कॉम्प्लेक्स तैयार करवाने की योजना बना रहे थे। इस प्रोजेक्ट में स्कूल, शॉपिंग मॉल, हॉस्टल, खेल का मैदान और कन्वेंशन हॉल बनाने की तैयारी थी।

ED ने ये दलीलें विशेष अदालत में आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पेश कीं। जांच एजेंसी का दावा है कि भर्ती परीक्षाओं की आंसर-की कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों तक पहुंचाई गई और इसके बदले लाखों रुपये की रिश्वत ली गई। इस मामले में KPSC चेयरमैन शिवशंकरप्पा साहूकार और आयोग की सदस्य बीवी गीता गिरफ्तार हैं।

35 करोड़ के प्रोजेक्ट में स्कूल, मॉल और हॉस्टल बनाने की योजना

ED के मुताबिक, साहूकार अपने गृह जिले के शाहपुर में एक बड़े कॉम्प्लेक्स का निर्माण कराने की योजना बना रहे थे। इसके लिए आर्किटेक्चरल डिजाइन भी तैयार कराए गए थे। जिस जमीन पर यह प्रोजेक्ट प्रस्तावित था, वह उनकी पत्नी के नाम पर बताई गई है।

एजेंसी ने अदालत को बताया कि इस परिसर में स्कूल, हॉस्टल, खेल मैदान, मॉल और कन्वेंशन हॉल जैसी सुविधाएं विकसित की जानी थीं। जांच के दौरान एक और कथित कड़ी सामने आई। ED के अनुसार, आंसर-की लीक के बदले रिश्वत देने वाले एक उम्मीदवार के पिता को प्रस्तावित स्कूल में केयरटेकर बनाने की योजना थी।

हालांकि, यह सभी बातें जांच एजेंसी की ओर से अदालत में रखे गए आरोप हैं। इनकी पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है।

9 उम्मीदवारों को आंसर-की देने का आरोप

इस भर्ती घोटाले का संबंध 9 जनवरी को आयोजित पशु चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा से बताया जा रहा है। ED का आरोप है कि साहूकार और KPSC सदस्य बीवी गीता ने कथित तौर पर नौ उम्मीदवारों को परीक्षा की आंसर-की उपलब्ध कराई थी।

इसके बदले उम्मीदवारों से उनकी रैंक और कथित सौदे के अनुसार 10 लाख से 40 लाख रुपये तक की रकम मांगी गई थी। एजेंसी के अनुसार, तीसरी रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवार के पिता के साथ 20 लाख रुपये की कथित डील हुई थी, जिसमें से साहूकार को 10 लाख रुपये मिले।

वहीं, पहली रैंक हासिल करने वाले उम्मीदवार से 40 लाख रुपये की डील का आरोप है। ED का दावा है कि इस सौदे के तहत बीवी गीता को 20 लाख रुपये मिले थे।

10 करोड़ रुपये से अधिक के नकद लेनदेन का दावा

जांच एजेंसी ने अदालत में साहूकार और रियल एस्टेट कारोबारी एसपी दयानंद के बीच 10 करोड़ रुपये से अधिक के नकद लेनदेन होने का दावा भी किया। ED के मुताबिक, अगस्त 2025 से दिसंबर 2025 के बीच करीब 4.99 करोड़ रुपये के लेनदेन हुए थे।

एजेंसी ने बताया कि साहूकार के आवास पर 18 से 24 अगस्त के बीच तलाशी ली गई थी। इस दौरान एक नोटबुक और कुछ दस्तावेज मिले, जिनमें कथित तौर पर परीक्षा के उम्मीदवारों और पैसों के लेनदेन से संबंधित विवरण दर्ज थे।

ED का कहना है कि इन दस्तावेजों और अन्य वित्तीय जानकारियों के आधार पर भर्ती परीक्षा में कथित भ्रष्टाचार तथा पैसों के लेनदेन की कड़ियों की जांच की जा रही है।

जमानत पर बचाव पक्ष और ED के बीच बहस

विशेष अदालत में जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान साहूकार के वकील सीएच हनुमंतराय ने PMLA के प्रावधानों का हवाला देते हुए राहत की मांग की। बचाव पक्ष की दलील थी कि उनके मुवक्किल पर व्यक्तिगत रूप से एक करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से अर्जित संपत्ति हासिल करने का आरोप नहीं है। इसलिए उन्हें जमानत का लाभ मिलना चाहिए।

ED की ओर से पेश वकील माहेश्वरी डीएम ने इस दलील का विरोध किया। उन्होंने कहा कि कथित अपराध को किसी एक उम्मीदवार या एक लेनदेन तक सीमित करके नहीं देखा जा सकता। पूरे भर्ती घोटाले और कथित वित्तीय नेटवर्क को ध्यान में रखना जरूरी है। एजेंसी ने यह भी कहा कि PMLA के तहत एक करोड़ रुपये की वैधानिक सीमा का सवाल अभियोजन शिकायत दाखिल होने के बाद ही निर्धारित किया जा सकता है।

बीवी गीता ने महिला होने के आधार पर मांगी राहत

KPSC सदस्य बीवी गीता के वकील ने भी जमानत की मांग करते हुए महिला होने के आधार पर PMLA के तहत उपलब्ध विशेष राहत का हवाला दिया।

इसके जवाब में ED ने कहा कि गीता को इस मामले में गलत तरीके से फंसाया नहीं गया है। एजेंसी के अनुसार, वह पेशे से वकील हैं और लोकायुक्त में अभियोजक के रूप में भी काम कर चुकी हैं। इसलिए उन्हें अपने कथित कृत्यों और उनके कानूनी परिणामों की जानकारी थी।

दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सोमवार को दोनों पक्षों की दलीलें पूरी हो गईं। इसके बाद विशेष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

हाई कोर्ट ने गठित की नई SIT

इस मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया है। कर्नाटक हाई कोर्ट ने KPSC भर्ती घोटाले की जांच के लिए ADGP आर. हितेंद्र के नेतृत्व में नई विशेष जांच टीम (SIT) गठित करने का आदेश दिया है।

अदालत ने निर्देश दिया है कि ED और SIT की जांच एक-दूसरे की पूरक होनी चाहिए, ताकि मामले के वित्तीय और आपराधिक पहलुओं की समग्र जांच की जा सके।

कर्नाटक CID और ED की जांच में साहूकार, बीवी गीता तथा परीक्षा नियंत्रक और IAS अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार के नाम भी सामने आए हैं। इन पर करीब 20 उम्मीदवारों को परीक्षा के प्रश्न और उत्तर उपलब्ध कराने से जुड़े आरोप हैं। वहीं, CID को 26 नवंबर तक मामले में चार्जशीट दाखिल करनी है।

अब इस मामले में दो महत्वपूर्ण घटनाक्रम पर नजर रहेगी। पहला, आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर विशेष अदालत का फैसला और दूसरा, नई SIT की जांच। यदि जांच में ED के दावों की पुष्टि होती है, तो यह मामला कर्नाटक की भर्ती व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।

© Copyright Galactic Television & Communications Pvt. Ltd. 2026. All rights reserved.