मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के बाद भोजशाला में पूजा शुरू

By  Preeti Kamal May 16th 2026 10:30 AM -- Updated: May 16th 2026 09:55 AM

धार, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर को मंदिर घोषित किए जाने और हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिए जाने के बाद शनिवार को श्रद्धालुओं ने धार जिले स्थित भोजशाला परिसर में प्रवेश कर पूजा-अर्चना की। अदालत के आदेश के बाद कई श्रद्धालु परिसर में पहुंचे और विधिवत पूजा की।

एक श्रद्धालु ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “कई वर्षों बाद हमें बिना किसी बाधा के दर्शन करने का अवसर मिला है। अदालत ने शानदार फैसला दिया है। मैं अब हर दिन यहां पूजा करने आऊंगा।” मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया और भोजशाला परिसर को राजा भोज से संबंधित बताया।

 भोजशाला स्थल को ‘संरक्षित स्मारक’ घोषित किया गया

एएसआई के वकील अविरल विकास खरे ने फैसले की कानूनी रूपरेखा बताते हुए कहा, “इस आदेश की मुख्य बात यह है कि भोजशाला स्थल को 1904 से ‘संरक्षित स्मारक’ घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि इस स्मारक का पूरा प्रशासन और नियंत्रण केवल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पास रहेगा।” 

अदालत ने माना कि विवादित स्थल मूल रूप से देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित मंदिर था, जिसका निर्माण भोज-परमार वंश के काल में हुआ था। कोर्ट ने एएसआई के पुराने आदेश में भी संशोधन किया।

परिसर एएसआई की निगरानी में ही रहेगा

अविरल विकास खरे ने कहा, “अदालत ने स्थल की ऐतिहासिक प्रकृति तय करते हुए माना कि यहां पहले वाग्देवी मंदिर था। इसके आधार पर हिंदू समुदाय को पूजा का अधिकार दिया गया है। साथ ही, मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज की अनुमति देने वाले एएसआई के 2003 के आदेश में बदलाव किया गया है। हालांकि परिसर एएसआई की निगरानी में ही रहेगा।”

कोर्ट ने भोजशाला परिसर को राजा भोज का माना

हिंदू पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने फैसले को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि कोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के एएसआई आदेश को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है।

उन्होंने कहा, “इंदौर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया और भोजशाला परिसर को राजा भोज का माना है।” वकील ने यह भी बताया कि अदालत ने लंदन के संग्रहालय में रखी गई देवी वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की मांग पर भी टिप्पणी की है।

 मुस्लिम पक्ष इस फैसले को दे सकता है चुनौती

वहीं, हाईकोर्ट के फैसले के कुछ घंटों बाद ही सुप्रीम कोर्ट में दो कैविएट याचिकाएं दायर की गई हैं, क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि मुस्लिम पक्ष इस फैसले को चुनौती दे सकता है। मामले के अंतिम निर्णय तक राज्य प्रशासन ने एएसआई की निगरानी में दोनों समुदायों के धार्मिक अभ्यास के लिए साझा व्यवस्था लागू कर रखी थी।


© Copyright Galactic Television & Communications Pvt. Ltd. 2026. All rights reserved.