धार, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ द्वारा विवादित भोजशाला-कमाल मौला परिसर को मंदिर घोषित किए जाने और हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिए जाने के बाद शनिवार को श्रद्धालुओं ने धार जिले स्थित भोजशाला परिसर में प्रवेश कर पूजा-अर्चना की। अदालत के आदेश के बाद कई श्रद्धालु परिसर में पहुंचे और विधिवत पूजा की।
एक श्रद्धालु ने फैसले का स्वागत करते हुए कहा, “कई वर्षों बाद हमें बिना किसी बाधा के दर्शन करने का अवसर मिला है। अदालत ने शानदार फैसला दिया है। मैं अब हर दिन यहां पूजा करने आऊंगा।” मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया और भोजशाला परिसर को राजा भोज से संबंधित बताया।
#WATCH | Madhya Pradesh | Devotees offer prayers and recite Hanuman Chalisa at the Bhojshala complex in Dhar, a day after the Indore Bench of the Madhya Pradesh High Court declared the disputed complex a temple and granted the Hindu side the right to worship at the site pic.twitter.com/mm53pNveD2
— ANI (@ANI) May 16, 2026
🚨 #NewsAlert | मध्य प्रदेश | हाई कोर्ट द्वारा भोजशाला स्थल को मंदिर घोषित किए जाने के बाद, लोग धार स्थित भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना करने के लिए पहुंचे। #MadhyaPradesh | #Dhar | #Bhojshala | #HighCourt | #BhojshalaComplex |#Univarta pic.twitter.com/YXLMGRdI91
— यूनीवार्ता (@univartaindia1) May 16, 2026
भोजशाला स्थल को ‘संरक्षित स्मारक’ घोषित किया गया
एएसआई के वकील अविरल विकास खरे ने फैसले की कानूनी रूपरेखा बताते हुए कहा, “इस आदेश की मुख्य बात यह है कि भोजशाला स्थल को 1904 से ‘संरक्षित स्मारक’ घोषित किया गया है। इसका मतलब है कि इस स्मारक का पूरा प्रशासन और नियंत्रण केवल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पास रहेगा।”
अदालत ने माना कि विवादित स्थल मूल रूप से देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित मंदिर था, जिसका निर्माण भोज-परमार वंश के काल में हुआ था। कोर्ट ने एएसआई के पुराने आदेश में भी संशोधन किया।
परिसर एएसआई की निगरानी में ही रहेगा
अविरल विकास खरे ने कहा, “अदालत ने स्थल की ऐतिहासिक प्रकृति तय करते हुए माना कि यहां पहले वाग्देवी मंदिर था। इसके आधार पर हिंदू समुदाय को पूजा का अधिकार दिया गया है। साथ ही, मुस्लिम पक्ष को शुक्रवार को नमाज की अनुमति देने वाले एएसआई के 2003 के आदेश में बदलाव किया गया है। हालांकि परिसर एएसआई की निगरानी में ही रहेगा।”
Dhar, Madhya Pradesh: The Madhya Pradesh High Court delivered a verdict in the Bhojshala-Kamal Maula dispute, declaring the complex a temple dedicated to Goddess Saraswati (Vagdevi). Following the verdict, devotees, along with office-bearers of the Bhoj Utsav Samiti, gathered at… pic.twitter.com/kyjBBGIyqx
— IANS (@ians_india) May 16, 2026
कोर्ट ने भोजशाला परिसर को राजा भोज का माना
हिंदू पक्ष की ओर से पेश अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन ने फैसले को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि कोर्ट ने 7 अप्रैल 2003 के एएसआई आदेश को आंशिक रूप से निरस्त कर दिया है।
उन्होंने कहा, “इंदौर हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार दिया और भोजशाला परिसर को राजा भोज का माना है।” वकील ने यह भी बताया कि अदालत ने लंदन के संग्रहालय में रखी गई देवी वाग्देवी की प्रतिमा को वापस लाने की मांग पर भी टिप्पणी की है।
Indore, Madhya Pradesh: On the Dhar-Bhojshala case, Advocate Vishnu Shankar Jain says, "Today, after the Ram Mandir verdict, a very historic decision has been made by the judiciary of this country. The temple of Maa Saraswati and Maa Vagdevi, located in Dhar Bhojshala, was the… pic.twitter.com/0jVk6Fqi8n
— IANS (@ians_india) May 15, 2026
मुस्लिम पक्ष इस फैसले को दे सकता है चुनौती
वहीं, हाईकोर्ट के फैसले के कुछ घंटों बाद ही सुप्रीम कोर्ट में दो कैविएट याचिकाएं दायर की गई हैं, क्योंकि आशंका जताई जा रही है कि मुस्लिम पक्ष इस फैसले को चुनौती दे सकता है। मामले के अंतिम निर्णय तक राज्य प्रशासन ने एएसआई की निगरानी में दोनों समुदायों के धार्मिक अभ्यास के लिए साझा व्यवस्था लागू कर रखी थी।
