NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद देशभर के 22 लाख से ज्यादा छात्रों के सामने अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है। National Testing Agency (NTA) ने दोबारा परीक्षा कराने का संकेत देते हुए कहा है कि नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। संभावना जताई जा रही है कि री-एग्जाम जून के आखिर या जुलाई की शुरुआत में आयोजित हो सकता है।

परीक्षा रद्द होने के फैसले के बाद छात्रों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ गई है। कई जगहों पर NTA की कार्यप्रणाली और परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। इस विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan का कार्यकाल भी विपक्ष और छात्र संगठनों के निशाने पर आ गया है।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल और पेपर लीक का 'साया': 2021 से अब तक सवालों के घेरे में कई परीक्षाएं

भारत के शिक्षा तंत्र में पिछले कुछ वर्षों से 'पेपर लीक' एक ऐसा शब्द बन गया है, जो किसी भी परीक्षा की घोषणा के साथ ही छात्रों के मन में डर पैदा कर देता है। जुलाई 2021 में जब धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाला था, तब देश को उम्मीद थी कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के नेतृत्व में एक पारदर्शी और त्रुटिहीन परीक्षा प्रणाली विकसित होगी। लेकिन आज, पांच साल बाद, स्थिति इसके ठीक विपरीत नजर आती है। 2021 से लेकर 2026 तक, शायद ही कोई ऐसा साल बीता हो जब किसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षा की सुचिता पर सवाल न उठे हों।

नीट (NEET-UG), यूजीसी-नेट (UGC-NET), सीयूईटी (CUET) और अन्य भर्ती परीक्षाओं में जिस तरह से पेपर लीक और धांधली के मामले सामने आए हैं, उसने न केवल सरकारी दावों की पोल खोल दी है, बल्कि करोड़ों मेहनतकश छात्रों के सपनों को भी चकनाचूर कर दिया है। GTC Bharat की इस विशेष रिपोर्ट में हम विश्लेषण करेंगे कि आखिर क्यों धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल विवादों के साये में रहा है।

जुलाई 2021 और नई चुनौतियां

7 जुलाई 2021 को धर्मेंद्र प्रधान ने रमेश पोखरियाल 'निशंक' के बाद शिक्षा मंत्री के रूप में शपथ ली थी। उस समय देश कोरोना महामारी की चुनौतियों से उबर रहा था और परीक्षाओं का आयोजन एक बड़ी चुनौती थी। मंत्रालय ने नई शिक्षा नीति (NEP 2020) के क्रियान्वयन और डिजिटल लर्निंग पर जोर देने की बात कही थी। लेकिन जल्द ही, प्रशासनिक सुधारों की जगह 'पेपर लीक' की खबरें सुर्खियों में आने लगीं।

विवादों का घटनाक्रम (2021-2026): एक कड़वी सच्चाई

मंत्री जी के कार्यकाल के दौरान परीक्षाओं में आई गड़बड़ियों की सूची काफी लंबी है। यहाँ कुछ मुख्य घटनाओं का विवरण दिया गया है:

1. 2021: JEE Main 2021 शुरुआत में ही उठे सवाल 

धर्मेंद्र प्रधान के पदभार संभालने के कुछ ही महीनों बाद, सितंबर 2021 में नीट-यूजी की परीक्षा के दौरान राजस्थान के सीकर और जयपुर से पेपर लीक की खबरें आईं। इसके अलावा, दिसंबर 2021 में UGC-NET (हिंदी) का पेपर व्हाट्सएप पर 6 घंटे पहले ही लीक हो गया था। सीबीआई ने जेईई मेंस 2021 में भी रिमोट एक्सेस के जरिए धांधली करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ किया था।

2. 2022: CUET UG 2022

CUET UG 2022 देश में पहली बार बड़े स्तर पर आयोजित की गई केंद्रीय विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा थी, लेकिन इसकी शुरुआत कई विवादों और तकनीकी समस्याओं के साथ हुई। परीक्षा के दौरान कई केंद्रों पर सर्वर डाउन, प्रश्नपत्र में गड़बड़ी, परीक्षा समय में देरी और तकनीकी खराबी की शिकायतें सामने आईं। कुछ छात्रों को परीक्षा शुरू होने के कई घंटे बाद तक इंतजार करना पड़ा, जबकि कई केंद्रों पर परीक्षा रद्द भी करनी पड़ी।

इसके बाद National Testing Agency ने प्रभावित छात्रों के लिए दोबारा परीक्षा आयोजित की थी।

3. 2024: विश्वास का सबसे बड़ा संकट

यह साल भारतीय परीक्षा इतिहास के सबसे खराब वर्षों में से एक माना जाएगा।

  • NEET-UG 2024: 24 लाख से ज्यादा छात्रों ने यह परीक्षा दी, लेकिन परिणाम आने के बाद 'ग्रेस मार्क्स' और पेपर लीक के आरोपों ने पूरे देश को हिला दिया। एक ही सेंटर से कई टॉपर्स का निकलना और बिहार पुलिस द्वारा पेपर लीक के पुख्ता सबूत पेश करना, मंत्रालय के लिए बड़ी फजीहत का कारण बना।
  • UGC-NET 2024: जून में परीक्षा संपन्न होने के ठीक एक दिन बाद इसे रद्द कर दिया गया। मंत्रालय ने स्वीकार किया कि डार्क नेट पर पेपर लीक होने की सूचना मिली थी।

4. 2026: ताजा मामला और हताशा

NEET UG 2026 का आयोजन 3 मई 2026 को देशभर में किया गया था। परीक्षा के बाद कई राज्यों में पेपर लीक और परीक्षा केंद्रों पर अनियमितताओं के आरोप सामने आए। सोशल मीडिया पर प्रश्नपत्र वायरल होने के दावे किए गए, जिसके बाद मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।

National Testing Agency (NTA) ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की और कहा कि परीक्षा की निष्पक्षता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए, जबकि केंद्र सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

NTA: सवालों के घेरे में 'एजेंसी'

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को इस उद्देश्य से बनाया गया था कि यह परीक्षाओं को उच्च स्तरीय तकनीक और सुरक्षा के साथ आयोजित करेगी। लेकिन हकीकत यह है कि आज NTA विवादों का केंद्र बन चुकी है।

  • संरचनात्मक खामियां: एजेंसी की निर्भरता निजी वेंडरों पर बहुत ज्यादा है, जिससे डेटा लीक होने का खतरा बना रहता है।
  • तकनीकी खामियां: CUET जैसी परीक्षाओं में तकनीकी गड़बड़ियों के कारण परीक्षा केंद्रों पर छात्रों को घंटों इंतजार करना पड़ा और कई बार परीक्षाएं टालनी पड़ीं।

सरकार की प्रतिक्रिया: कानून और समितियां

विपक्ष और छात्रों के बढ़ते दबाव के बीच, सरकार ने 'लोक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024' लागू किया है। इस कानून के तहत पेपर लीक करने वालों के लिए 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।

इसके अलावा, परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए डॉ. के. राधाकृष्णन के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया गया है। हालांकि, छात्रों का कहना है कि कानून और समितियां तब तक बेकार हैं जब तक कि प्रशासनिक स्तर पर जवाबदेही तय नहीं की जाती।

विशेषज्ञों और छात्रों की प्रतिक्रिया

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली का केंद्रीकरण (Centralization) ही सबसे बड़ी समस्या है। मनोवैज्ञानिक रूप से छात्र इस कदर टूट चुके हैं कि अब वे अपनी मेहनत पर कम और 'लीक' की खबरों पर ज्यादा ध्यान देने लगे हैं।

"हमने दो साल तक दिन-रात एक कर दिया, लेकिन अंत में पता चला कि पेपर पहले ही बिक चुका था। शिक्षा मंत्री और NTA को हमारे आंसुओं का हिसाब देना होगा।" - एक निराश नीट अभ्यर्थी

राजनीतिक प्रभाव और विश्वसनीयता पर प्रहार

विपक्ष ने इन विफलताओं को लेकर लगातार धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित कई अन्य नेताओं ने इसे "भ्रष्ट तंत्र" करार दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारतीय चिकित्सा और तकनीकी शिक्षा की साख को धक्का लगा है। अगर भारत के प्रवेश परीक्षाओं पर ही सवाल उठेंगे, तो यहां की डिग्रियों की वैश्विक मान्यता पर भी असर पड़ना लाजमी है।