त्विषा शर्मा केस में नया खुलासा, सास पर सबूत मिटाने और CCTV लीक करने के गंभीर आरोप

By  Laxman May 22nd 2026 03:54 PM

मॉडल और अभिनेत्री Twisha Sharma की संदिग्ध मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। अब Madhya Pradesh सरकार ने हाई कोर्ट में बड़ा दावा करते हुए कहा है कि त्विषा की सास और रिटायर्ड जिला जज गिरिबाला सिंह ने मामले में सबूतों से छेड़छाड़ की, जांच को प्रभावित करने की कोशिश की और CCTV फुटेज के चुनिंदा हिस्से सोशल मीडिया पर लीक किए।

सरकार ने यह आरोप मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में दायर याचिका में लगाए हैं, जिसमें गिरिबाला सिंह को मिली अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग की गई है। मामला पहले ही CBI जांच के लिए भेजा जा चुका है और अब नए आरोपों ने पूरे केस को और गंभीर बना दिया है।

‘बहुत यांत्रिक तरीके से मिली जमानत’

राज्य सरकार ने अदालत में कहा कि सत्र अदालत ने गिरिबाला सिंह को “बहुत यांत्रिक तरीके” से अग्रिम जमानत दे दी, जबकि जांच में कई गंभीर तथ्य सामने आए थे।

सरकार ने दावा किया कि त्विषा शर्मा और उनके परिवार के बीच हुए व्हाट्सऐप चैट्स में लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के संकेत मिले हैं। याचिका में कहा गया कि चैट्स से साफ दिखता है कि शादी के बाद से त्विषा लगातार तनाव और दबाव में थीं।

CCTV फुटेज लीक करने का आरोप

मामले का सबसे बड़ा और संवेदनशील पहलू CCTV फुटेज को लेकर सामने आया है। राज्य सरकार ने कहा कि पुलिस ने 13 मई को घर की CCTV रिकॉर्डिंग जब्त कर ली थी, लेकिन इसके बावजूद गिरिबाला सिंह ने फुटेज की कॉपी अपने पास रखी।

सरकार का आरोप है कि बाद में उन्होंने “रणनीतिक तरीके” से फुटेज के छोटे-छोटे हिस्से सोशल मीडिया पर जारी किए, जिससे जांच प्रभावित हो सकती थी।

याचिका में कहा गया कि यह कदम जांच प्रक्रिया को बाधित करने और सबूतों के साथ छेड़छाड़ की श्रेणी में आता है।

जांच में सहयोग न करने का आरोप

सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि पुलिस ने गिरिबाला सिंह को कई बार जांच में शामिल होने के लिए नोटिस भेजे, लेकिन उन्होंने सहयोग नहीं किया।

जांच अधिकारी के मुताबिक 13 और 14 मई को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन वह पूछताछ के लिए सामने नहीं आईं। यहां तक कि व्हाट्सऐप के जरिए भेजे गए नोटिस का भी जवाब नहीं दिया गया।

पुलिस का दावा है कि जब अधिकारी उनके घर पहुंचे, तब घरेलू सहायिका ने नोटिस लेने से भी इनकार कर दिया। सरकार ने इसे जमानत की शर्तों का उल्लंघन बताया है।

घटना की रात क्या हुआ था?

सरकारी याचिका के अनुसार घटना वाली रात त्विषा ने अपने परिवार से कई बार बातचीत की थी। रात करीब 9:41 बजे उन्होंने परिवार को फोन किया, जिसमें कथित तौर पर उनके पति समर्थ सिंह की ऊंची आवाज सुनाई दी। इसके बाद फोन अचानक कट गया

परिवार का आरोप है कि बाद में उन्होंने कई बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने जवाब नहीं दिया। करीब 50 मिनट बाद परिवार को त्विषा की मौत की जानकारी दी गई।

गर्भपात के दबाव का भी आरोप

मध्य प्रदेश सरकार ने अदालत में यह भी कहा कि त्विषा पर कथित तौर पर गर्भपात का दबाव बनाया जा रहा था। याचिका में दावा किया गया कि मई 2026 के पहले सप्ताह में उन्हें एक महीने की गर्भावस्था खत्म करने के लिए मजबूर किया गया।

हालांकि इन आरोपों पर अभी अदालत में अंतिम निष्कर्ष नहीं निकला है।

मेडिकल रिपोर्ट में चोटों का जिक्र

सरकार ने मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि जांच में शरीर के अन्य हिस्सों पर चोट के निशान और गर्दन पर लिगेचर मार्क पाए गए हैं। यही वजह है कि मामले को सामान्य आत्महत्या नहीं माना जा रहा।

CBI जांच पर टिकी निगाहें

यह मामला अब CBI को सौंपा जा चुका है। दहेज उत्पीड़न, सबूतों से छेड़छाड़, डिजिटल फुटेज लीक और जांच को प्रभावित करने जैसे आरोपों ने इसे मध्य प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल कर दिया है।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में CBI की जांच और अदालत की सुनवाई इस केस की दिशा तय करेगी।

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