नई दिल्ली: त्विषा शर्मा मौत मामले में अदालत के आदेश पर दूसरा पोस्टमॉर्टम करने वाले एम्स (AIIMS) दिल्ली के मेडिकल बोर्ड ने अपनी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। इस रिपोर्ट ने फांसी में कथित तौर पर इस्तेमाल की गई जिमनास्टिक बेल्ट और उसके धातु के रिंग से जुड़े अहम फॉरेंसिक विवाद को स्पष्ट कर दिया है।

इस मामले का सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या धातु की रिंग वाली जिमनास्टिक बेल्ट वास्तव में फांसी लगाने के लिए इस्तेमाल की गई थी और क्या वह त्विषा शर्मा की गर्दन पर मिले निशानों से मेल खाती है। पहले पोस्टमॉर्टम के दौरान कथित लिगेचर (फंदे की सामग्री) मेडिकल बोर्ड के सामने पेश नहीं की गई थी। इसी कारण यह निष्कर्ष नहीं निकल पाया था। बाद में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एम्स दिल्ली के मेडिकल बोर्ड से दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने का आदेश दिया था।

मेडिकल बोर्ड की अंतिम राय को गोपनीय रखा गया है- सूत्र

सूत्रों के अनुसार, प्रयोगशाला और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच में लिगेचर सामग्री पर त्वचा के ऊतक (Skin Tissue) पाए गए, जो चोटों के पैटर्न से मेल खाते हैं। हालांकि मेडिकल बोर्ड की अंतिम राय अदालत के निर्देशों के अनुसार गोपनीय रखी गई है और सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंप दी गई है।

फॉरेंसिक विभाग के डाक्टर्स का मेडिकल बोर्ड बनाया गया

22 मई 2026 को जबलपुर स्थित मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रिट याचिका संख्या 19119/2026 पर सुनवाई करते हुए त्विषा शर्मा की मौत के मामले में दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद AIIMS नई दिल्ली के निदेशक ने फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के पांच विशेषज्ञ डॉक्टरों का मेडिकल बोर्ड बनाया। बोर्ड ने 24 मई को दूसरा पोस्टमॉर्टम किया और घटनास्थल का भी निरीक्षण किया।

CBI को 11 पन्नों की मेडिकल रिपोर्ट सौंपी गई

हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में जांच एजेंसी को सौंपने का निर्देश दिया था। आदेश का पालन करते हुए मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को अपनी 11 पन्नों की मेडिकल रिपोर्ट CBI को सौंप दी। इसकी जानकारी मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को भी दे दी गई।

मेडिकल बोर्ड ने मामले के हर पहलू का बारीकी से किया अध्ययन- डा. सुधीर गुप्ता

AIIMS के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने अदालत के निर्देशों का हवाला देते हुए रिपोर्ट का खुलासा करने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि मेडिकल बोर्ड ने करीब एक महीने तक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय शोध पत्रों का अध्ययन कर हर पहलू की वैज्ञानिक जांच के बाद निष्कर्ष तैयार किया है। उन्होंने कहा,

"मेडिकल बोर्ड ने मामले के हर पहलू का बेहद बारीकी से अध्ययन किया। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय जर्नल्स का विश्लेषण किया गया और वैज्ञानिक आधार पर विस्तृत राय तैयार की गई है। यह रिपोर्ट CBI और न्यायपालिका के लिए सत्य और न्याय के हित में पूरी तरह स्पष्ट है।"

दूसरे पोस्टमार्टम की वीडियोग्राफी जांच एजेंसी के पास सुरक्षित

फॉरवर्डिंग लेटर के अनुसार, सीलबंद रिपोर्ट CBI के जांच अधिकारी को सौंप दी गई है, जबकि दूसरे पोस्टमॉर्टम की वीडियोग्राफी जांच एजेंसी के पास सुरक्षित है।

गौरतलब है कि सेवानिवृत्त प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश गिरिबाला सिंह की बहू त्विषा शर्मा इसी वर्ष भोपाल स्थित अपने ससुराल में फंदे से लटकी हुई मिली थीं। शुरुआती जांच और पहले पोस्टमॉर्टम पर सवाल उठाते हुए परिवार ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया था। इसके बाद अदालत ने दूसरा पोस्टमॉर्टम कराने और जांच CBI को सौंपने का आदेश दिया था। माना जा रहा है कि AIIMS की यह रिपोर्ट CBI जांच में एक महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्य साबित होगी।