पहाड़, पानी और परंपरा: अरुणाचल के 'सुबनसिरी' में दिखेगा अनोखा संगम...
ईटानगर, अरुणाचल प्रदेश: अरुणाचल प्रदेश सरकार ने राज्य को एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से एक महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की है। इसके तहत सुबनसिरी लोअर पोंडेज को विश्वस्तरीय पर्वत-और-नदी आधारित पर्यटन हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसमें इको-टूरिज्म, एडवेंचर, संस्कृति और सतत आजीविका को एकीकृत किया जाएगा।
सुबनसिरी लोअर हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट (2000 मेगावाट), जो भारत की सबसे बड़ी जलविद्युत परियोजना है, दिसंबर 2026 तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है। इस परियोजना से बनने वाले जलाशय को पर्यटन के लिए एक अनोखे अवसर के रूप में देखा जा रहा है, खासकर देश के सबसे समृद्ध जैव-विविधता वाले नदी क्षेत्रों में।
इस परियोजना के लिए PM मोदी से मांगा सहयोग
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस परियोजना के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सहयोग मांगा है। उन्होंने पर्यटन, ऊर्जा, जल शक्ति, पोत परिवहन और पूर्वोत्तर विकास जैसे केंद्रीय मंत्रालयों से तकनीकी सहयोग की भी अपील की है।
इस योजना के तहत कई प्रमुख घटकों को शामिल किया गया है:
- इको-टूरिज्म और प्रकृति आधारित अनुभव
- एडवेंचर स्पोर्ट्स और वाटर स्पोर्ट्स
- सांस्कृतिक और विरासत पर्यटन
- अंतर्देशीय मत्स्य पालन और रोजगार सृजन
- लक्जरी रिवर क्रूज़ और जल आधारित गतिविधियां
समग्र, टिकाऊ पर्यटन मॉडल विकसित करना लक्ष्य
सरकार का लक्ष्य एक ऐसा समग्र और टिकाऊ पर्यटन मॉडल विकसित करना है, जो दुनिया के प्रसिद्ध स्थलों जैसे नेपाल का फेवा झील, थाईलैंड का केंग क्राचन, इटली का लेक कोमो और न्यूजीलैंड का मिलफोर्ड साउंड से प्रेरित हो।

जनजातीय समुदायों की भूमिका मुख्य होगी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इस परियोजना में स्थानीय और जनजातीय समुदायों की भूमिका मुख्य होगी, जिससे उन्हें प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और वे अपनी सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय विरासत के संरक्षक बनेंगे।
हर साल 1.5 लाख पर्यटकों को लुभाने का लक्ष्य
इस पहल से करीब 2,500 रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है और मध्यम अवधि में हर साल 1.5 लाख पर्यटकों को आकर्षित करने का लक्ष्य रखा गया है।

सतत विकास का नया मॉडल सामने आएगा
पहले चरण में सरकार प्रमुख डिजाइन और योजना एजेंसियों के साथ मिलकर विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करेगी, जिसमें स्थानीय समुदायों से भी परामर्श लिया जाएगा। यह परियोजना न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि हाइड्रोपावर इंफ्रास्ट्रक्चर के माध्यम से सतत विकास का एक नया मॉडल भी प्रस्तुत करेगी।
मुख्यमंत्री खांडू ने की थी 45 किमी. की हाई-स्पीड यात्रा
गौरतलब है कि 28 मार्च को मुख्यमंत्री खांडू ने अधिकारियों के साथ सुबनसिरी नदी पर लगभग 45 किलोमीटर की हाई-स्पीड यात्रा की थी, जिसे उन्होंने राज्य में पर्यटन और हाइड्रोपावर के समन्वय के प्रयास का हिस्सा बताया था।
