बिहार में NDA की एकजुटता पर सवाल, MLC चुनाव के नतीजों के बाद BJP-JDU में बढ़ी खटास; संजय झा करेंगे समीक्षा
बिहार विधान परिषद चुनाव में तीन सीटों पर हार के बाद JDU और BJP के बीच मतभेद की चर्चा तेज हो गई है। दो निर्दलीय MLC के भाजपा में शामिल होने से जदयू की नाराजगी बढ़ी है। अब संजय झा की अगुवाई में होने वाली समीक्षा बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं।
बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं होने के संकेत मिलने लगे हैं। विधान परिषद चुनाव में जनता दल यूनाइटेड (JDU) के खराब प्रदर्शन के बाद भाजपा और जदयू के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। चार सीटों के चुनाव में तीन पर हार का सामना करने के बाद जदयू के भीतर नाराजगी है। पार्टी के कुछ नेताओं ने सहयोगी भाजपा की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। अब गुरुवार को होने वाली चुनावी समीक्षा बैठक को काफी अहम माना जा रहा है। इस बैठक में जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा समेत कई वरिष्ठ नेताओं के शामिल होने की संभावना है।
यह विवाद केवल चुनावी नतीजों तक सीमित नहीं है। दो निर्दलीय विधान परिषद सदस्यों के भाजपा में शामिल होने के बाद दोनों सहयोगी दलों के बीच राजनीतिक असहजता और बढ़ गई है। खास बात यह है कि इन दोनों नेताओं ने चुनाव में जदयू उम्मीदवारों को हराया था।
तीन सीटों पर हार से JDU में नाराजगी
हालिया विधान परिषद चुनाव में जदयू को चार में से तीन सीटों पर हार का सामना करना पड़ा। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में जदयू उम्मीदवार अभिषेक झा को निर्दलीय बंशीधर ब्रजवासी ने हराया। वहीं, सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में पार्टी के उम्मीदवार पुष्कर आनंद को राहुल राज से शिकस्त मिली। राहुल राज को भाजपा का बागी उम्मीदवार बताया गया है।
दरभंगा शिक्षक सीट पर भी जदयू को निराशा हाथ लगी। यहां पार्टी के उम्मीदवार घनश्याम राय को जन सुराज पार्टी के एसपी राय ने हरा दिया। इन नतीजों के बीच जदयू के लिए राहत की बात पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार की जीत रही।
तीन सीटों पर हार के बाद पार्टी के अंदर चुनावी रणनीति और सहयोगी दलों की भूमिका की समीक्षा की मांग तेज हो गई है।
निर्दलीय MLC के BJP में जाने से बढ़ा विवाद
चुनाव के बाद बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के भाजपा में शामिल होने से विवाद ने नया मोड़ ले लिया। दोनों नवनिर्वाचित निर्दलीय विधान परिषद सदस्य हैं और उन्होंने चुनाव में जदयू के उम्मीदवारों को हराया था।
इनके भाजपा में शामिल होने के बाद राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं। दोनों सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने की मांग भी सामने आई है। जदयू के कुछ नेताओं का मानना है कि भाजपा ने जिस तेजी से दोनों को अपने साथ जोड़ा, उससे गठबंधन के भीतर सहयोग की भावना पर सवाल खड़े होते हैं।
जदयू के एक वरिष्ठ नेता ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव के दौरान सहयोगी की भूमिका ठीक से नहीं निभाई। उनके मुताबिक, राहुल राज को भाजपा का अघोषित समर्थन हासिल था और इसी वजह से जदयू उम्मीदवार को नुकसान हुआ। नेता ने यह भी दावा किया कि यदि भाजपा ने गठबंधन धर्म का पालन किया होता तो NDA कम से कम आठ में से पांच सीटें जीत सकता था।
हालांकि, ये आरोप जदयू के एक नेता की ओर से लगाए गए हैं। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया का विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं है।
संजय झा की बैठक में क्या होगा?
जदयू गुरुवार को चुनावी नतीजों की समीक्षा के लिए बैठक करने जा रही है। इसमें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और विजय कुमार चौधरी के शामिल होने की उम्मीद है।
बैठक में चुनावी हार के कारणों, उम्मीदवारों के प्रदर्शन और सहयोगी भाजपा की भूमिका पर चर्चा हो सकती है। पार्टी के भीतर यह मांग भी उठ रही है कि भाजपा के सामने अपनी नाराजगी मजबूती से रखी जाए।
इस बैठक को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह ऐसे समय हो रही है, जब NDA के दोनों प्रमुख सहयोगियों के बीच राजनीतिक तालमेल को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
ललन सिंह और संजय झा के बीच अंदरूनी खींचतान की चर्चा
जदयू के भीतर नेतृत्व और प्रभाव को लेकर चल रही कथित खींचतान भी इस बैठक के दौरान चर्चा में रह सकती है। पार्टी के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह तथा संजय झा के बीच मतभेदों की चर्चा लंबे समय से राजनीतिक गलियारों में होती रही है।
पटना स्नातक सीट से नीरज कुमार की जीत के बाद यह चर्चा और तेज हुई। बताया जाता है कि नीरज कुमार ने जीत के बाद ललन सिंह की खुले तौर पर आलोचना की थी। आरोप है कि ललन सिंह ने इस सीट पर निष्कासित जदयू नेता अनंत कुमार सिंह को परोक्ष समर्थन दिया था।
जदयू के एक नेता के मुताबिक, नीरज कुमार की जीत से ललन सिंह असहज हो सकते हैं। यह भी संभावना जताई गई है कि ललन सिंह बैठक में शामिल नहीं होंगे। हालांकि, इस संबंध में उनकी ओर से किसी आधिकारिक बयान की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
निशांत कुमार की भूमिका पर भी नजर
पार्टी के भीतर चल रही चर्चाओं के बीच बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वह जदयू प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे हैं। समीक्षा बैठक में उनके शामिल होने की संभावना है।
जदयू के एक अन्य नेता का दावा है कि संजय झा और ललन सिंह के बीच मतभेदों के बावजूद पार्टी के भविष्य को लेकर दोनों की सोच में समानता है। उनके मुताबिक, दोनों नेता चाहते हैं कि आने वाले समय में पार्टी की राजनीति निशांत कुमार के इर्द-गिर्द केंद्रित हो।
हालांकि, निशांत कुमार की भविष्य की राजनीतिक भूमिका को लेकर पार्टी की ओर से कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
NDA के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम?
बिहार में भाजपा और जदयू लंबे समय से सहयोगी राजनीति का हिस्सा रहे हैं। ऐसे में विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद दोनों दलों के बीच उभरी नाराजगी गठबंधन की एकजुटता के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
अब सबकी नजर जदयू की समीक्षा बैठक पर है। बैठक में पार्टी क्या रणनीति अपनाती है और भाजपा के सामने अपनी नाराजगी किस तरह रखती है, इससे दोनों दलों के रिश्तों की आगे की दिशा का संकेत मिल सकता है। फिलहाल तीन सीटों पर हार, निर्दलीय MLC के भाजपा में शामिल होने और जदयू के अंदरूनी समीकरणों ने बिहार की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।