दिल्ली के सत्य निकेतन हादसे के बाद देशभर की इमारतों की सुरक्षा पर SC की नजर, 10 सितंबर को अहम सुनवाई

सत्य निकेतन PG हादसे के बाद सुप्रीम कोर्ट देशभर में असुरक्षित इमारतों की जांच और सुरक्षा ऑडिट के मुद्दे पर विचार कर रहा है। 10 सितंबर को अहम सुनवाई होगी और दिल्ली हाईकोर्ट की PIL को SC में ट्रांसफर किए जाने की संभावना है।

By  Laxman September 8th 2026 04:34 PM

नई दिल्ली: दिल्ली के सत्य निकेतन में PG इमारत ढहने की घटना के बाद अब देशभर में असुरक्षित इमारतों की पहचान और सुरक्षा ऑडिट का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संकेत दिया कि वह केवल दिल्ली तक सीमित न रहते हुए पूरे देश में इमारतों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं की जांच पर विचार कर रहा है। मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने यह भी कहा कि सत्य निकेतन हादसे से संबंधित दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित याचिका को सुप्रीम कोर्ट अपने पास ट्रांसफर करने पर विचार कर सकता है। अगर ऐसा होता है, तो देशभर में PG, हॉस्टल और छात्रों के रहने की अन्य सुविधाओं की सुरक्षा का मुद्दा व्यापक स्तर पर अदालत के सामने आ सकता है।

पूरे देश में जांच की जरूरत पर जोर

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि उसके मन में पहले से ही पूरे देश में इस तरह की जांच कराने की योजना है। यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अदालत की ओर से नियुक्त एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) और वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा ने इसी विषय से जुड़ी एक याचिका का उल्लेख किया।

इस याचिका में देशभर में संचालित प्राइवेट PG, हॉस्टल और छात्रों के लिए उपलब्ध अन्य आवासीय सुविधाओं के निरीक्षण और सुरक्षा ऑडिट के लिए तत्काल निर्देश देने की मांग की गई है।

अमाइकस क्यूरी ने अदालत को बताया कि हाल की घटना को देखते हुए यह बेहद गंभीर विषय है। उनके मुताबिक निरीक्षण की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है और अंतिम निरीक्षण भी निर्धारित समय पर किया जाना था।

दिल्ली हाईकोर्ट की PIL भी हो सकती है ट्रांसफर

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि इसी तरह का मामला दिल्ली हाईकोर्ट में भी लंबित है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जा सकता है।

उनका कहना था कि सत्य निकेतन की घटना बेहद दुखद है और इस हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों तथा उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की जानी चाहिए। उन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित याचिका और वहां पारित आदेश का भी उल्लेख किया।

ऐसे में अब 10 सितंबर की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट यह तय कर सकता है कि दिल्ली से जुड़े मामले को अपने पास लेकर देशभर में भवन सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की व्यापक सुनवाई की जाए या नहीं।

सत्य निकेतन हादसे में गई 7 लोगों की जान

दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस के नजदीक सत्य निकेतन में 6 सितंबर को एक PG बिल्डिंग ढह गई थी। हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच छात्र बताए गए हैं। हादसे के बाद कई लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक चार लोगों का इलाज चल रहा था।

यह इमारत लड़कों के PG के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। हादसे के समय इसमें मरम्मत का काम चलने की बात सामने आई थी। घटना ने दिल्ली में छात्रों के लिए इस्तेमाल होने वाली निजी आवासीय इमारतों की सुरक्षा और उनके निर्माण मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

जुलाई में भी सुप्रीम कोर्ट ने जताई थी चिंता

भवन सुरक्षा का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट के सामने नया नहीं है। जुलाई में भी अदालत ने अनधिकृत और संभावित रूप से खतरनाक इमारतों के खिलाफ समय पर कार्रवाई नहीं किए जाने को लेकर नागरिक अधिकारियों की भूमिका पर चिंता जताई थी।

साकेत में इमारत गिरने और मालवीय नगर के एक होटल में आग लगने की घटनाओं के बाद कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी थी। इसके साथ ही IIT दिल्ली के प्रोफेसरों, MCD अधिकारियों और एमिकस क्यूरी की टीम को साकेत, मालवीय नगर और लाजपत नगर में जमीनी सर्वे करने के निर्देश दिए गए थे।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि भवन नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई नहीं करने वाले अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

PG और हॉस्टल की सुरक्षा पर बढ़ी चिंता

इस बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने भी सत्य निकेतन हादसे से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए MCD को हाई लेवल जांच के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने यह पता लगाने को कहा था कि संबंधित इमारत के पास निर्माण की वैध अनुमति थी या नहीं और यदि कोई प्रशासनिक चूक हुई तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान की जाए।

हाईकोर्ट ने दिल्ली में असुरक्षित PG आवासों की बढ़ती संख्या और छात्रों के लिए पर्याप्त संस्थागत हॉस्टल की कमी पर भी चिंता जताई थी। कोर्ट के सामने यह मुद्दा भी आया कि कुछ PG संचालक स्वीकृत भवन योजनाओं के विपरीत निर्माण कराते हैं।

अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह तय हो सकता है कि ऐसे मामलों को केवल स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई तक सीमित रखा जाए या देशभर में छात्र आवासों और अन्य इमारतों के लिए सुरक्षा ऑडिट का व्यापक ढांचा तैयार करने की दिशा में कदम उठाया जाए।

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