दिल्ली हाई कोर्ट ने चंदोलिया की चुनाव याचिका खारिज की...

By  Preeti Kamal April 25th 2026 02:10 PM -- Updated: April 25th 2026 12:43 PM

नई दिल्ली, भारत: दिल्ली हाई कोर्ट ने भाजपा नेता योगेंद्र चंदोलिया द्वारा पूर्व करोल बाग विधायक विशेष रवि के खिलाफ दायर चुनाव याचिका को कानूनी और प्रक्रियात्मक आधारों पर समाप्त कर दिया। जस्टिस दिनेश मेहता और जस्टिस विनोद कुमार की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि इस मामले में लगाए गए आरोप—शैक्षणिक योग्यता के गलत खुलासे—उस कानूनी प्रावधान के अंतर्गत नहीं आते, जिसके तहत याचिका दायर की गई थी।

अदालत ने कहा कि चंदोलिया का पूरा मामला जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 123(4) पर आधारित था, जो अन्य उम्मीदवारों के खिलाफ झूठे बयान देकर उनकी चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने से संबंधित है।

शैक्षणिक योग्यता की गलत जानकारी दी

इस मामले में आरोप यह था कि विशेष रवि ने अपनी ही शैक्षणिक योग्यता के बारे में गलत जानकारी दी, जो धारा 123(4) के दायरे में नहीं आता। बेंच ने यह भी कहा कि ये आरोप संभवतः धारा 123(2) (अनुचित प्रभाव) के अंतर्गत आ सकते थे, लेकिन चूंकि इसे सही तरीके से याचिका में शामिल नहीं किया गया, इसलिए अदालत इस पर विचार नहीं कर सकती।

सही जानकारी न देने से जनादेश पर पड़ता है असर- कोर्ट 

अदालत ने दोहराया कि चुनावी कानून में याचिकाओं का स्पष्ट और सटीक होना जरूरी है, और अदालतें याचिकाकर्ता द्वारा बताए गए प्रावधानों से आगे नहीं जा सकतीं। कोर्ट ने कहा कि उचित कानूनी आधार के अभाव में गंभीर आरोप भी चुनाव को निरस्त करने का कारण नहीं बन सकते, क्योंकि इससे 'जनता के जनादेश' पर असर पड़ता है।

यह याचिका अब निरर्थक हो गई है- कोर्ट

साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के ‘Ajmera Shyam case’ के फैसले का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि शैक्षणिक योग्यता से जुड़े खुलासे सहायक (supplementary) होते हैं और हर मामले में चुनाव रद्द करने के लिए पर्याप्त नहीं माने जाते, जब तक उनका बड़ा प्रभाव साबित न हो। अंत में अदालत ने कहा कि चूंकि दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो चुका है और 2025 में नए चुनाव हो चुके हैं, इसलिए यह याचिका अब निरर्थक (infructuous) हो गई है।

© Copyright Galactic Television & Communications Pvt. Ltd. 2026. All rights reserved.