दिल्ली से कोलकाता तक एक्सप्रेसवे का सुपर नेटवर्क तैयार, 6 हाई-स्पीड कॉरिडोर बदलेंगे सफर की तस्वीर

वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के बीच तेज रफ्तार सड़क नेटवर्क तैयार होगा। इससे यात्रा का समय घटने के साथ व्यापार, लॉजिस्टिक्स और क्षेत्रीय विकास को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

By  Laxman July 22nd 2026 11:56 AM

देश में सड़क बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। आने वाले वर्षों में दिल्ली से कोलकाता तक का सफर पहले की तुलना में काफी तेज और सुविधाजनक होने वाला है। इसकी वजह है छह प्रमुख एक्सप्रेसवे को जोड़कर तैयार किया जा रहा हाई-स्पीड रोड नेटवर्क, जो उत्तर भारत को पूर्वी भारत से आधुनिक सड़क संपर्क के जरिए जोड़ेगा।

इस महत्वाकांक्षी नेटवर्क में यमुना एक्सप्रेसवे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे, विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे और वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे शामिल होंगे। इन सभी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद दिल्ली से कोलकाता तक की सड़क यात्रा लगभग 12 से 13 घंटे में पूरी हो सकेगी, जबकि वर्तमान में राष्ट्रीय राजमार्ग के जरिए यही दूरी तय करने में करीब 22 से 24 घंटे लग जाते हैं।

दिल्ली से कोलकाता तक बनेगा निर्बाध एक्सप्रेसवे नेटवर्क

प्रस्तावित नेटवर्क की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि वाहन चालकों को बीच-बीच में शहरों के ट्रैफिक या पुराने राजमार्गों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। दिल्ली से निकलने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे के जरिए आगरा, वहां से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, फिर गंगा एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल लिंक के माध्यम से वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे तक सीधा संपर्क मिलेगा।

इस नेटवर्क के तैयार होने से लंबी दूरी की यात्रा अधिक सुरक्षित, तेज और आरामदायक बनने की उम्मीद है।

विंध्य एक्सप्रेसवे को मिली मंजूरी

उत्तर प्रदेश सरकार ने हाल ही में विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं के जरिए राज्य के प्रमुख एक्सप्रेसवे को एक बड़े ग्रिड के रूप में विकसित करने की योजना बनाई गई है।

करीब 26,315 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला विंध्य एक्सप्रेसवे प्रयागराज, मिर्जापुर, भदोही, सोनभद्र सहित कई जिलों को जोड़ेगा। वहीं लगभग 9,039 करोड़ रुपये की लागत वाला विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे गाजीपुर, चंदौली और मिर्जापुर को बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।

इन दोनों परियोजनाओं को वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए आधुनिक इंटरचेंज भी विकसित किया जाएगा।

वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे से मिलेगा बड़ा लाभ

करीब 610 किलोमीटर लंबा वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे इस पूरे नेटवर्क की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। इस ग्रीनफील्ड परियोजना पर लगभग 35,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।

इसके बनने के बाद वाराणसी से कोलकाता की यात्रा, जो वर्तमान में लगभग 13 से 14 घंटे लेती है, घटकर करीब 6 से 7 घंटे रह जाएगी।

यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के चंदौली से शुरू होकर बिहार के कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया, झारखंड के चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो तथा पश्चिम बंगाल के पुरुलिया, बांकुरा, हुगली होते हुए हावड़ा तक पहुंचेगा।

चार राज्यों को मिलेगा सीधा फायदा

यह परियोजना केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल को भी आधुनिक सड़क संपर्क उपलब्ध कराएगी।

बिहार में एक्सप्रेसवे की लंबाई लगभग 159 किलोमीटर होगी, जबकि झारखंड में यह करीब 187 किलोमीटर और पश्चिम बंगाल में लगभग 242 किलोमीटर तक फैलेगा।

इससे कई औद्योगिक, कृषि और व्यापारिक क्षेत्रों को नई आर्थिक संभावनाएं मिलने की उम्मीद है।

आगरा-लखनऊ और गंगा एक्सप्रेसवे भी होंगे आपस में जुड़े

राज्य सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए भी नई लिंक परियोजनाओं को मंजूरी दी है।

इनमें लगभग 50.98 किलोमीटर लंबा लिंक एक्सप्रेसवे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक पहुंच बनाएगा, जबकि 90.84 किलोमीटर लंबा दूसरा लिंक फर्रुखाबाद के रास्ते गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ेगा।

इन परियोजनाओं पर कुल मिलाकर 12,264 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है और इन्हें अगले तीन वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

लॉजिस्टिक्स सेक्टर को मिलेगा बड़ा फायदा

दिल्ली से कोलकाता तक हाई-स्पीड सड़क संपर्क बनने से माल ढुलाई की लागत और समय दोनों में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।

उत्तर भारत से पूर्वी भारत के बंदरगाहों तक सामान तेजी से पहुंच सकेगा, जिससे उद्योग, ई-कॉमर्स, कृषि उत्पादों और निर्यात कारोबार को गति मिलेगी। ट्रांसपोर्ट कंपनियों के लिए भी परिचालन लागत कम होने की उम्मीद है।

पर्यटन और रोजगार को भी मिलेगा बढ़ावा

बेहतर सड़क नेटवर्क केवल यात्रा को आसान नहीं बनाएगा, बल्कि पर्यटन, होटल उद्योग, वेयरहाउसिंग, औद्योगिक निवेश और स्थानीय रोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा देगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक्सप्रेसवे के किनारे नए औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक पार्क और व्यावसायिक केंद्र विकसित होने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।

देश के इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव

दिल्ली से कोलकाता तक बनने वाला यह एक्सप्रेसवे नेटवर्क देश के सबसे महत्वपूर्ण सड़क संपर्क परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद उत्तर और पूर्वी भारत के बीच आवागमन पहले से कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक होगा। साथ ही यह परियोजना देश के आर्थिक विकास, निवेश और व्यापारिक गतिविधियों को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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